मेनका गांधी के बयान के खिलाफ जिला अधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर रोष व्यक्त करते जैन समाज के लोग
मेरठ। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कथित बयान को लेकर जैन समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। भारतीय जैन मिलन के पदाधिकारियों और समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपते हुए मेनका गांधी के विरुद्ध धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की मांग की है।
29 जून 2026 को दिए गए ज्ञापन में जैन समाज ने कहा कि हाल ही में मेनका गांधी द्वारा जैन दिगंबर संतों की ‘पिच्छिका’ (मोरपंखी) के संबंध में दिया गया कथित बयान तथ्यहीन, भ्रामक और जैन धर्म की मान्यताओं को आहत करने वाला है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि इस प्रकार के बयान से करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और समाज में आक्रोश व्याप्त है।
पिच्छिका को लेकर जैन समाज ने रखा अपना पक्ष
ज्ञापन में कहा गया कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्मः” है और जैन संत सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव की रक्षा को भी अपना धार्मिक कर्तव्य मानते हैं। समाज के अनुसार दिगंबर संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छिका किसी भी मोर की हत्या या उसके जीवित रहते पंख निकालकर नहीं बनाई जाती।
भारतीय जैन मिलन ने अपने ज्ञापन में कहा कि शरद ऋतु के दौरान मोर प्राकृतिक रूप से अपने पंख छोड़ते हैं और इन्हीं गिरे हुए पंखों को एकत्र कर पिच्छिका तैयार की जाती है। इसका उपयोग संत जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन के उद्देश्य से करते हैं।
एफआईआर दर्ज करने की मांग
ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा किसी धर्म के प्रतीकों या धार्मिक मान्यताओं के संबंध में कथित रूप से गलत एवं भ्रामक जानकारी प्रसारित कर समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया है, तो संबंधित कानूनों के तहत इसकी जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
भारतीय जैन मिलन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जैन समाज की धार्मिक भावनाओं की रक्षा सुनिश्चित की जाए और कानून के अनुरूप उचित कदम उठाए जाएं।
शांतिप्रिय समाज होने का किया उल्लेख
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जैन समाज सदैव अहिंसा, सामाजिक सद्भाव, व्यापार, शिक्षा और सेवा कार्यों में अग्रणी रहा है। समाज ने अपेक्षा जताई कि उसकी धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं का सम्मान किया जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की विवादित टिप्पणियों पर निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।