मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर जनसभा को संबोधित करते आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद
मेरठ। बीए छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर शुक्रवार को मेरठ में राजनीतिक माहौल उस समय गर्मा गया, जब नगीना से सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद को पीड़ित परिवार से मिलने जाते समय सिवाया टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। करीब एक घंटे तक चले गतिरोध के बाद प्रशासन की पहल पर पीड़ित परिवार को टोल प्लाजा बुलाया गया, जहां सांसद ने उनसे मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि परिवार की मांगें पूरी नहीं हुईं तो लखनऊ में बड़ा आंदोलन किया जाएगा और लोकसभा में भी यह मुद्दा उठाया जाएगा।
सिवाया टोल पर भारी पुलिस बल की तैनाती
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे चंद्रशेखर आजाद पूर्व एडीजी प्रेम प्रकाश और लगभग 300 समर्थकों के साथ मेरठ पहुंचे। उनके गांव जाने की सूचना पहले से होने के कारण पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। सिवाया टोल प्लाजा पर बैरिकेडिंग कर लगभग 400 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात किए गए थे।
पुलिस अधिकारियों ने चंद्रशेखर आजाद को गांव जाने की अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि इससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और माहौल बिगड़ने की आशंका है। इस पर सांसद ने कड़ा विरोध जताया और सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है और उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना अनुचित है।

प्रशासन के प्रस्ताव पर टोल प्लाजा पहुंचा पीड़ित परिवार
करीब एक घंटे तक चले गतिरोध के बाद प्रशासन ने समाधान के तौर पर पीड़ित परिवार को सिवाया टोल प्लाजा बुलाने का प्रस्ताव रखा। प्रारंभिक असहमति के बाद चंद्रशेखर आजाद इस प्रस्ताव पर सहमत हुए। इसके बाद पुलिस सुरक्षा के बीच पीड़ित परिवार को टोल प्लाजा लाया गया, जहां सांसद ने उनसे विस्तार से बातचीत की।
चंद्रशेखर आजाद ने परिवार की पूरी बात सुनी और उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने परिवार की महिलाओं के साथ कथित मारपीट की घटना पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि पीड़ितों के साथ ऐसा व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम
मीडिया से बातचीत में सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्होंने प्रशासन को सात दिन का समय दिया है। यदि इस अवधि में पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला और उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो लखनऊ में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले को लोकसभा में भी मजबूती से उठाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिस समय प्रशासन को पीड़ित परिवार के घावों पर मरहम लगाना चाहिए था, उस समय प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया। उनका आरोप था कि जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के व्यवहार के कारण परिवार भय के वातावरण में जीने को मजबूर है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह भी सामने आना चाहिए कि किसके निर्देश पर यह कार्रवाई हुई।
ललिता गौतम हत्याकांड क्या है?
ललिता गौतम बीए की छात्रा थीं। 15 मई को वह परीक्षा देने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। दो दिन बाद उनका शव गन्ने के खेत में मिला। परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रा के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की गई।
इस घटना के विरोध में परिजनों और समाज के लोगों ने मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को हटाया। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
रोहाना टोल पर भी पुलिस से हुई तीखी बहस
मेरठ पहुंचने से पहले मुजफ्फरनगर के रोहाना टोल प्लाजा पर भी चंद्रशेखर आजाद की पुलिस अधिकारियों से तीखी नोकझोंक हुई। सहारनपुर से मेरठ आते समय पुलिस ने उनके काफिले की कुछ गाड़ियों को रोक लिया था।
वीडियो में चंद्रशेखर आजाद इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह से सवाल करते दिखाई दिए कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को किस आधार पर रोका जा रहा है। उन्होंने पूछा कि आखिर उन्होंने कौन-सा अपराध किया है, जिसके कारण उन्हें आगे जाने से रोका गया।
इंस्पेक्टर ने जवाब दिया कि वे केवल वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का पालन कर रहे हैं। इस दौरान दोनों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ।
पूर्व एडीजी प्रेम प्रकाश ने भी उठाए सवाल
पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं पूर्व एडीजी प्रेम प्रकाश भी चंद्रशेखर आजाद के साथ मौजूद रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मेरठ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मामले में शुरुआत से ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रा के लापता होने के मामले में केवल गुमशुदगी दर्ज करने के बजाय तत्काल गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए था।
पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल लोगों को रात में उनके घर जाकर डराया और धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर लोगों की सुरक्षा करने वाली पुलिस ही उन्हें भयभीत करने का काम कर रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
राजनीतिक हलचल तेज
ललिता गौतम हत्याकांड और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विभिन्न राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि लगातार पीड़ित परिवार से मिल रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। चंद्रशेखर आजाद की मेरठ यात्रा और प्रशासन को दिया गया सात दिन का अल्टीमेटम अब इस पूरे प्रकरण को और अधिक राजनीतिक और सामाजिक महत्व प्रदान करता दिखाई दे रहा है।