कथित स्किट को लेकर कंकरखेड़ा थाने में शिकायत लेकर पहुंचे परशुराम स्वाभिमान सेना के पदाधिकारी
मेरठ। संसद परिसर में 31 जुलाई 2026 को हुए कथित विरोध प्रदर्शन को लेकर मेरठ में मामला गरमा गया है। परशुराम स्वाभिमान सेना ने इस प्रकरण में थाना कंकरखेड़ा में लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भगवान श्रीराम के चित्र का ऐसा उपयोग किया गया, जिससे सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
परशुराम स्वाभिमान सेना के क्षेत्रीय मंत्री मोंटी राजपूत ने शनिवार को थाना कंकरखेड़ा पहुंचकर पुलिस को शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में कहा गया है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर एक सांकेतिक नाट्य प्रदर्शन (स्किट) किया गया था। संगठन का आरोप है कि इस प्रदर्शन के दौरान सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवान श्रीराम के चित्र का कथित रूप से ऐसा उपयोग किया गया, जिसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के विरुद्ध बताया गया है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदर्शन के समय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी सांसद भी मौजूद थे। संगठन ने पुलिस से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उपलब्ध वीडियो फुटेज, समाचार रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर तथ्य सामने लाए जाएं।
जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की मांग
परशुराम स्वाभिमान सेना ने शिकायत में कहा है कि यदि जांच के दौरान यह प्रथम दृष्टया स्थापित होता है कि किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है अथवा किसी धार्मिक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य किया गया है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय कानून के प्रावधानों के अनुसार एफआईआर दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस कथित घटना से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उनका मानना है कि किसी भी धर्म, देवी-देवता या धार्मिक प्रतीकों का ऐसा उपयोग नहीं होना चाहिए जिससे समाज में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो।
सभी धर्मों के सम्मान की बात कही
इस अवसर पर राष्ट्रीय परशुराम परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. संजीव डोगरा तथा संजीव शर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परशुराम परिषद और परशुराम स्वाभिमान सेना सभी धर्मों और आस्थाओं का समान सम्मान करती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी धार्मिक प्रतीक, देवी-देवता या आस्था के साथ कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जाता है, तो उससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। ऐसे मामलों में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है, ताकि कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
पुलिस से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
संगठन के पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि मेरठ पुलिस शिकायत का विधिक रूप से संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करेगी। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि जांच में कोई अपराध स्थापित होता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पुलिस की ओर से शिकायत प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस मामले में जांच के बाद ही किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।