कावड़ सेवा शिविर का शुभारंभ करती पूर्व एमएलसी डॉ सरोजनी अग्रवाल
मेरठ। श्रावण मास में हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे शिवभक्त कांवड़ियों की सेवा के लिए मेरठ में विभिन्न स्थानों पर सेवा शिविर लगाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सामाजिक सेवा समिति, पंचशील की ओर से सोहराब गेट बस डिपो पर 23वें कांवड़ सेवा शिविर का शुभारंभ रविवार को सुबह 11 बजे किया गया। शिविर का उद्घाटन भारतीय जनता पार्टी की पूर्व विधान परिषद सदस्य डॉ. सरोजनी अग्रवाल ने किया।
उद्घाटन अवसर पर मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल, प्रबंध तंत्र के वरिष्ठतम सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. रामकुमार गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य जयवीर सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। जयवीर सिंह ने विधिवत पूजा-अर्चना कर शिविर के सफल एवं निर्विघ्न आयोजन की कामना की।
23 वर्षों से निरंतर चल रही सेवा
कांवड़ सेवा शिविर का आयोजन मेरठ कॉलेज प्रबंधन कमेटी के कार्यकारी सदस्य संजीवेश्वर प्रकाश के नेतृत्व में सामाजिक सेवा समिति, पंचशील द्वारा किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम का संचालन भी संजीवेश्वर प्रकाश ने किया।
इस अवसर पर मेरठ कॉलेज, इस्माइल कॉलेज और डीएन डिग्री कॉलेज के अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. विष्णु गोयल, डॉ. विश्रुत चौधरी, डॉ. बी.के. यादव सहित अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
आयोजकों ने बताया कि सामाजिक सेवा समिति पंचशील द्वारा लगातार 23 वर्षों से कांवड़ सेवा शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस सेवा परंपरा की शुरुआत करीब 23 वर्ष पूर्व स्वर्गीय सेठ दयानंद जी के मार्गदर्शन में हुई थी। तब से समिति द्वारा प्रत्येक कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सेवा का सिलसिला निरंतर जारी है।
कांवड़ियों के लिए 24 घंटे चिकित्सा और भोजन की व्यवस्था
संजीवेश्वर प्रकाश ने बताया कि इस वर्ष भी शिविर में शिवभक्त कांवड़ियों की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। शिविर में 24 घंटे चिकित्सा सेवा, जलपान, सादा भोजन और पक्का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। शिवभक्तों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सेवा कार्य शिवरात्रि तक निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान लंबी दूरी तय करने वाले श्रद्धालुओं को रास्ते में आराम, भोजन, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से समिति के कार्यकर्ता पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से शिविर में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
सेवा, आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है कांवड़ यात्रा: डॉ. सरोजनी अग्रवाल
शिविर का उद्घाटन करते हुए डॉ. सरोजनी अग्रवाल ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह सेवा, आस्था, अनुशासन और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। लाखों शिवभक्त कठिन यात्रा करते हुए भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करते हैं। ऐसे में कांवड़ियों की सेवा करना पुण्य के साथ-साथ मानव सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस प्रकार के सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा भावना समाज को जोड़ने का काम करती है और कांवड़ सेवा शिविर इसी भावना को मजबूत करते हैं।
23 वर्षों की सेवा सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण: डॉ. ओपी अग्रवाल
मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल ने सामाजिक सेवा समिति पंचशील के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि लगातार 23 वर्षों से कांवड़ सेवा शिविर का आयोजन करना समिति की सेवा भावना और सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि लंबी दूरी की कांवड़ यात्रा करने वाले शिवभक्तों के लिए चिकित्सा, भोजन, पेयजल और विश्राम जैसी सुविधाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। समिति द्वारा इन व्यवस्थाओं को निरंतर उपलब्ध कराना सराहनीय कार्य है। उन्होंने शिविर के आयोजन में जुटे सभी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं।
युवाओं को नशे से दूर रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी: डॉ. रामकुमार गुप्ता
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रामकुमार गुप्ता ने समाज के जागरूक लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और समाज के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देकर ही स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण किया जा सकता है।
आस्था के साथ आत्मअनुशासन का संदेश देती है कांवड़ यात्रा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कांवड़ यात्रा की परंपरा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के प्रति भारतीय आस्था से जुड़ी हुई है। श्रावण मास में शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने की परंपरा भक्तों को आत्मसंयम, भक्ति, अनुशासन और सेवा का संदेश देती है।
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु पैदल लंबी दूरी तय करते हैं और अनेक नियमों का पालन करते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं। इसे आत्मअनुशासन और आस्था की साधना के रूप में भी देखा जाता है। वहीं भगवान शिव को भारतीय परंपरा में त्याग, तप, करुणा और लोककल्याण का प्रतीक माना गया है।
शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी लिया सेवा कार्य में हिस्सा
शिविर के उद्घाटन कार्यक्रम में मेरठ कॉलेज, इस्माइल कॉलेज और डीएन डिग्री कॉलेज के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी शामिल हुए। शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने सेवा और सामाजिक सहभागिता के संदेश को और मजबूत किया।
मेरठ कॉलेज के प्रेस प्रवक्ता एवं सामाजिक सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज ने शिविर के आयोजकों, स्वयंसेवकों और सभी शिवभक्तों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सेवा और आध्यात्मिकता का यह संगम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सेवा करना केवल धार्मिक दायित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता और सामाजिक सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है।
शिवरात्रि तक जारी रहेगा सेवा का सिलसिला
सामाजिक सेवा समिति पंचशील के इस 23वें कांवड़ सेवा शिविर में शिवभक्तों के लिए भोजन, जलपान और चिकित्सा सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयोजकों के अनुसार शिवरात्रि तक शिविर में सेवा कार्य निरंतर जारी रहेगा।
23 वर्षों से चली आ रही यह सेवा परंपरा मेरठ में आस्था के साथ सामाजिक सेवा और मानवता के समन्वय की मिसाल के रूप में सामने आई है।