अमित कुमार घोष (अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश)
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में दिए सख्त निर्देश, अस्पतालों में चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति और रात्रिकालीन राउंड सुनिश्चित करने को कहा
लखनऊ। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा मरीजों को समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी अपर निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा संस्थानों के प्रधानाचार्यों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में हर घर तिरंगा, STEMI Care Network, iGOT कर्मयोगी, फायर सेफ्टी और संचारी रोग नियंत्रण अभियान समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों की विस्तार से समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सक निर्धारित समय पर अस्पतालों में उपस्थित रहकर मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएं। अस्पतालों में रात्रिकालीन राउंड भी नियमित रूप से किए जाएं और इस दौरान मरीजों को मिल रही चिकित्सा सुविधाओं, चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति तथा अस्पताल की व्यवस्थाओं का प्रभावी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
बढ़ते किडनी रोगियों को देखते हुए डायलिसिस बेड बढ़ाने के निर्देश
अपर मुख्य सचिव ने प्रदेश में किडनी रोगियों की बढ़ती संख्या और डायलिसिस यूनिटों में मरीजों की बढ़ती प्रतीक्षा सूची को गंभीरता से लेते हुए डायलिसिस बेड की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन चिकित्सालयों से डायलिसिस बेड बढ़ाने के संबंध में प्रस्ताव या सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, उनका परीक्षण कराकर आवश्यक कार्रवाई तेजी से पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि डायलिसिस की आवश्यकता वाले मरीजों को लंबी प्रतीक्षा का सामना न करना पड़े और उन्हें समयबद्ध उपचार मिल सके, इसके लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के साथ आवश्यकता के अनुसार डायलिसिस सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
STEMI Care Network की नियमित मॉनीटरिंग के निर्देश
STEMI Care Network की समीक्षा के दौरान बैठक में बताया गया कि कार्यक्रम के प्रथम चरण के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्थित 464 सहायक स्वास्थ्य केंद्रों के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अपर मुख्य सचिव ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को कार्यक्रम की नियमित मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संदिग्ध हृदयघात के मरीजों की ECG के माध्यम से समय रहते पहचान की जाए और आवश्यकता के अनुसार उन्हें निर्धारित केंद्रों पर तत्काल भेजा जाए, जिससे मरीजों को गोल्डन ऑवर में उपचार उपलब्ध कराया जा सके। बैठक में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 2 अगस्त 2026 तक 2,54,384 संदिग्ध हृदयघात रोगियों की ECG की गई। इनमें 3,631 मरीजों में STEMI की पहचान हुई, जबकि 2,179 मरीजों को थ्रोम्बोलिसिस प्रदान कर निर्धारित केंद्रों पर भेजा गया।
iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण को प्राथमिकता
iGOT कर्मयोगी पोर्टल की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी पोर्टल पर पंजीकृत हों तथा अधिकतम अनिवार्य पाठ्यक्रम पूरे करें। उन्होंने अपर निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को इसकी नियमित मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक माह की 15 और 30 तारीख को दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक Learning Drives आयोजित कराने को कहा, ताकि अधिक से अधिक कर्मचारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ सकें और अपनी कार्यकुशलता एवं ज्ञान में वृद्धि कर सकें।
फायर सेफ्टी और लंबित फायर एनओसी का शीघ्र निस्तारण
अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अमित कुमार घोष ने निर्देश दिए कि जिन चिकित्सालयों में फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थापना का काम चल रहा है, उसे तेजी से पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी एनओसी प्राप्त करने में किसी स्तर पर समस्या आ रही है तो उसका तत्काल समाधान कराया जाए। प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होने के बाद जिन चिकित्सालयों में फायर सेफ्टी उपकरण स्थापित किए जाने बाकी हैं, वहां काम बिना विलंब शुरू कराया जाए। उन्होंने अग्निशमन विभाग के साथ समन्वय कर समय-समय पर फायर मॉक ड्रिल आयोजित कराने के निर्देश दिए। साथ ही जिला अग्निशमन अधिकारी के साथ निकट समन्वय स्थापित कर लंबित फायर सेफ्टी एनओसी समय से प्राप्त करने पर जोर दिया।
13 से 15 अगस्त तक स्वास्थ्य संस्थानों में होगा ध्वजारोहण
हर घर तिरंगा अभियान की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 13 से 15 अगस्त 2026 तक प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विधिवत ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में तिरंगे की आकर्षक रोशनी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा आमजन को भी राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेल्फी लेकर उसे हर घर तिरंगा पोर्टल पर अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सरकारी और निजी क्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारी अपने-अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएं। स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, शहीदों और पूर्व सैनिकों के परिजनों को स्वास्थ्य संस्थानों में आमंत्रित कर सम्मानित करने के निर्देश भी दिए गए।
डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान तेज होगा
संचारी रोग नियंत्रण अभियान की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अभियान की शेष अवधि में सभी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी एवं तेज किया जाए। प्रत्येक जिले में लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराने पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम के लिए अभियान समाप्त होने के बाद भी अंतर-विभागीय समन्वय से स्वच्छता, साफ-सफाई, जलभराव की रोकथाम, एंटी-लार्वा और फॉगिंग जैसी गतिविधियां लगातार जारी रहनी चाहिए। डेंगू और मलेरिया की प्रभावी निगरानी के लिए मुख्यालय स्तर पर कंट्रोल रूम संचालित करने तथा विशेष रूप से एंटी-लार्वा और फॉगिंग अभियान को गति देने के निर्देश दिए गए।
लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत विभिन्न विभागों को जो जिम्मेदारियां दी गई हैं, उनमें जिन विभागों के कार्य अभी लंबित हैं, उन्हें पत्र भेजकर कार्य जल्द पूरा कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों को अंतर-विभागीय समन्वय को और प्रभावी बनाने तथा रोग नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
डेंगू-मलेरिया को लेकर अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश
डेंगू, मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों की संभावित स्थिति को देखते हुए सभी स्वास्थ्य संस्थानों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए गए। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि अस्पतालों में आवश्यक लॉजिस्टिक्स और चिकित्सा सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि डायग्नोस्टिक किट और प्रयोगशाला उपकरण कार्यशील स्थिति में रहें। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बेड और मच्छरदानी युक्त वार्ड तैयार रखे जाएं। बुखार की दवाओं, ORS पैकेट और IV Fluids का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को सुचारु रूप से संचालित रखने और अस्पतालों में ऑक्सीजन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
डेंगू वार्ड और इमरजेंसी में उपचार प्रोटोकॉल का पालन जरूरी
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अस्पतालों की इमरजेंसी और डेंगू वार्ड में उपचार प्रोटोकॉल उपलब्ध रहें और उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह कार्यशील रखने को भी कहा गया। उन्होंने मलेरिया और डेंगू के केस मैनेजमेंट को लेकर चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित कराने के निर्देश दिए।
आमजन को भी किया जाएगा जागरूक
अस्पतालों में संचारी रोगों की रोकथाम और समय पर उपचार से संबंधित IEC सामग्री प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आमजन को डेंगू, मलेरिया और अन्य संचारी रोगों से बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें की जानकारी व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने को कहा गया।
अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुविधा में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और जनहित से जुड़े स्वास्थ्य अभियानों को प्रभावी तरीके से लागू करना है।
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
समीक्षा बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने स्पष्ट किया कि विभागीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने दायित्वों का पूरी गंभीरता और तत्परता से निर्वहन करें। उन्होंने अस्पतालों में चिकित्सकों की निर्धारित समय पर उपस्थिति, नियमित रात्रिकालीन निरीक्षण, मरीजों को समयबद्ध उपचार, फायर सेफ्टी, डेंगू-मलेरिया की रोकथाम और विभिन्न विभागीय अभियानों की प्रभावी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए बैठक में दिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार एक ओर गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम तथा अस्पतालों की आपातकालीन तैयारियों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।