मुजफ्फरनगर अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाई जाने वाले आरोपी
भभीसा गांव में घर में घुसकर हुई थी अंधाधुंध फायरिंग, पवन कुमार की मौके पर मौत और भाई अशोक घायल; अदालत ने मामले को गंभीरतम अपराध मानते हुए सुनाया मृत्युदंड
मुजफ्फरनगर/शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के भभीसा गांव में करीब 12 वर्ष पहले हुए बहुचर्चित पवन कुमार हत्याकांड में गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश एवं त्वरित न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने मामले में दोषी ठहराए गए चार अभियुक्तों को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने दोषियों पर कुल 1.70 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह मामला वर्ष 2014 में हुई उस सनसनीखेज वारदात से जुड़ा है, जिसमें हमलावर दिनदहाड़े एक घर में घुसे और गोलियां बरसा दीं। गोलीबारी में पवन कुमार की मौत हो गई, जबकि उनके भाई अशोक कुमार घायल हुए। घटना के बाद शुरू हुई पुलिस जांच, आरोपपत्र, गवाहों की गवाही और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने चार आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें मृत्युदंड सुनाया है।
14 जुलाई 2014 की सुबह क्या हुआ था?
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 14 जुलाई 2014 की सुबह करीब 10:45 बजे भभीसा गांव में हुई। मुकदमे के वादी और मृतक पवन कुमार के भाई अशोक कुमार अपने घर पर मौजूद थे। इसी दौरान सफेद रंग की कार से कुछ हथियारबंद लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि हमलावर सीधे अशोक कुमार के घर में घुस गए और वहां पहुंचते ही फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से घर में अफरातफरी मच गई। अशोक कुमार को गोली लगी और वह घायल हो गए। गोलीबारी की आवाज सुनकर उनके छोटे भाई पवन कुमार भी मौके पर पहुंचे। हमलावरों ने पवन कुमार को भी गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। घायल अशोक कुमार को उपचार के लिए ले जाया गया और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल की जांच शुरू की।
हमलावरों ने घर में पहुंचकर किसे तलाशा था?
मामले की सुनवाई के दौरान वादी अशोक कुमार की ओर से दिए गए बयान में घटना के पीछे पुरानी रंजिश की बात सामने आई। अभियोजन के अनुसार पवन कुमार के बेटे आशु का नाम एक पुराने हत्या के मामले में दर्ज कराया गया था। बताया गया कि उस मामले में नामजदगी को लेकर आशु और दूसरे पक्ष के बीच विवाद पैदा हुआ। अभियोजन के अनुसार इसी विवाद के बाद पवन कुमार के परिवार के प्रति रंजिश बढ़ी। अदालत में अशोक कुमार ने बताया कि हमलावर घर में घुसने के बाद आशु के बारे में पूछ रहे थे। अभियोजन का आरोप था कि आशु से जुड़ी पुरानी रंजिश के कारण पवन कुमार का परिवार हमलावरों के निशाने पर आया। यह बात मुकदमे के घटनाक्रम में इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि अभियोजन ने इसी रंजिश को हत्या की पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए अदालत के सामने रखा।
पुलिस जांच में सामने आए कई नाम
घटना के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की। पुलिस ने अलग-अलग साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आरोपियों को नामजद किया और मामले में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। मुकदमे की आगे की कार्यवाही में सभी आरोपियों की स्थिति एक जैसी नहीं रही। कुछ के संबंध में अलग-अलग स्तर पर न्यायिक कार्रवाई चली, जबकि कुछ आरोपियों की स्थिति समय के साथ बदलती रही। मामले में अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के सामने नौ गवाह पेश किए। इनमें वादी अशोक कुमार और मृतक की पत्नी सोहनवीरी की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल से संबंधित साक्ष्यों को अदालत में प्रस्तुत किया।
घटनास्थल से मिले साक्ष्य भी बने महत्वपूर्ण कड़ी
अभियोजन के अनुसार पुलिस ने घटनास्थल से खोखा कारतूस, खून लगी मिट्टी और अन्य साक्ष्य बरामद किए थे। इसके अतिरिक्त एक आरोपी के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा 315 बोर का अवैध तमंचा और कारतूस बरामद किए जाने की बात भी मुकदमे की सुनवाई में सामने आई। इन साक्ष्यों को पुलिस अधिकारियों और संबंधित गवाहों के माध्यम से अदालत में साबित कराने का प्रयास किया गया। अदालत ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद चार आरोपियों के खिलाफ अपराध सिद्ध माना।
अदालत में किन चार आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ?
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने जिन चार आरोपियों को दोषी ठहराकर मृत्युदंड सुनाया, उनके नाम हैं—
- रामवीर — निवासी पीरखेड़ा, थाना झिंझाना, जनपद शामली
- राजीव उर्फ छोटू — निवासी रामनगर, बड़ौत क्षेत्र
- राहुल उर्फ बोसी — निवासी भभीसा
- हरेंद्र कुमार — निवासी कांजरहेड़ी, थाना बाबरी क्षेत्र
इन चारों को पहले अदालत ने हत्या के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 13 अगस्त 2026 को अदालत में सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने चारों को मृत्युदंड सुनाया।
मुख्य आरोपी विपुल उर्फ खूनी की पहले ही हो चुकी थी मौत
इस मामले में विपुल उर्फ खूनी का नाम भी प्रमुख आरोपियों में सामने आया था। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उसकी मौत हो गई। विपुल उर्फ खूनी बाद में बागपत में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। इस कारण उसके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया उसी रूप में आगे नहीं बढ़ सकी। इस तरह पवन हत्याकांड के सभी नामजद आरोपियों की स्थिति एक जैसी नहीं रही। कुछ आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया जारी रही, एक आरोपी की पत्रावली अलग कर दी गई और एक प्रमुख आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु हो गई।
आरोपी अमित की पत्रावली अलग की गई
मामले में आरोपी अमित की न्यायिक स्थिति भी अलग रही। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार फरार रहने के कारण उसकी पत्रावली को न्यायालय ने 1 मार्च 2024 को अलग कर दिया था। इसका अर्थ यह है कि उसके संबंध में कार्यवाही चार दोषियों के साथ उसी स्तर पर समाप्त नहीं हुई। उसके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया अलग से आगे बढ़ सकती है। इस तथ्य से यह भी स्पष्ट होता है कि 12 वर्ष पुराने इस मामले में सभी आरोपियों के संबंध में एक ही समय पर अंतिम फैसला नहीं आया।
नौ गवाहों की गवाही रही अहम
मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाह पेश किए गए। इनमें वादी अशोक कुमार स्वयं घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताए गए। गोली लगने के बावजूद अशोक कुमार ने मामले में गवाही दी। इसके अलावा मृतक पवन कुमार की पत्नी सोहनवीरी की गवाही भी अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण रही। अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के साथ पुलिस अधिकारियों और घटनास्थल से बरामद साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा। लंबी सुनवाई के दौरान इन गवाहियों और साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। अंततः अदालत ने चार आरोपियों को दोषी माना।
12 साल बाद आया फैसला
पवन कुमार की हत्या 14 जुलाई 2014 को हुई थी। इसके बाद मामले की पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली। करीब 12 वर्ष बाद 13 अगस्त 2026 को इस मामले में मृत्युदंड का फैसला सुनाया गया। इतने लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद आया यह फैसला मृतक के परिवार के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव माना जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा और दोष सिद्ध होने के बाद सजा के प्रश्न पर बहस हुई। अदालत ने अपराध की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए चारों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
अदालत ने क्यों सुनाई फांसी की सजा?
अदालत के फैसले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ यानी ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी से जोड़ा गया है। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने हत्या की प्रकृति, घर में घुसकर गोलीबारी और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोरतम दंड दिया। मृत्युदंड भारतीय न्याय व्यवस्था में असाधारण परिस्थितियों में दिया जाने वाला दंड है। इसलिए अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि चारों आरोपियों को तत्काल फांसी दे दी गई है।
चारों दोषियों पर 1.70 लाख रुपये का अर्थदंड
मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चारों दोषियों को मृत्युदंड देने के साथ कुल 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों के सामने उच्च न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता उपलब्ध रहता है। इसलिए 13 अगस्त का फैसला इस मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है, लेकिन इसे अंतिम रूप से फांसी दिए जाने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
क्या अब चारों को फांसी दे दी जाएगी ?
यह सवाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण है। नहीं। 13 अगस्त 2026 को केवल मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। फांसी अभी नहीं दी गई है। मृत्युदंड के मामलों में निचली अदालत का आदेश आगे की न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहता है। ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय की पुष्टि की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। इसके अतिरिक्त दोषियों को कानून के अनुसार अपील एवं अन्य उपलब्ध न्यायिक उपायों का अधिकार रहता है।
पवन हत्याकांड की टाइमलाइन
14 जुलाई 2014:
भभीसा गांव में सुबह करीब 10:45 बजे हथियारबंद हमलावरों ने एक घर में घुसकर फायरिंग की। अशोक कुमार घायल हुए और उनके भाई पवन कुमार की मौत हो गई।
2014 के बाद:
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले में कुल आठ आरोपियों का उल्लेख सामने आया।
जांच एवं सुनवाई के दौरान:
अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए। घटनास्थल से मिले साक्ष्य और हथियार बरामदगी से संबंधित साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए।
बाद की अवधि:
मुख्य आरोपी बताए गए विपुल उर्फ खूनी की बागपत में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई।
1 मार्च 2024:
फरार आरोपी अमित की पत्रावली अलग किए जाने की जानकारी सामने आई।
अगस्त 2026:
मामले में चार आरोपियों—रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ बोसी और हरेंद्र कुमार—के खिलाफ अपराध सिद्ध हुआ।
13 अगस्त 2026:
मुजफ्फरनगर की अपर सत्र न्यायालय/त्वरित न्यायालय संख्या-3 ने चारों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया और कुल 1.70 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।
फैसले के बाद क्या होगा?
13 अगस्त 2026 का फैसला पवन हत्याकांड की सुनवाई में एक बड़ा पड़ाव है। अब मृत्युदंड से संबंधित आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। दोषियों को उपलब्ध कानूनी अधिकारों के तहत ऊपरी अदालत में चुनौती देने का अवसर रहेगा और मृत्युदंड के मामले में उच्च न्यायालय की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। इसलिए फिलहाल यह कहना अधिक सटीक है कि मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि मृत्युदंड का आदेश अंतिम रूप से किस स्थिति में पहुंचता है। भभीसा गांव का पवन कुमार हत्याकांड वर्ष 2014 से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे एक परिवार और करीब 12 वर्ष लंबी न्यायिक प्रक्रिया की कहानी है। दिनदहाड़े घर में घुसकर की गई गोलीबारी में पवन कुमार की जान चली गई और उनके भाई अशोक कुमार घायल हुए। पुलिस जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां वर्षों तक गवाहियों और साक्ष्यों की जांच होती रही। अब 13 अगस्त 2026 को मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ बोसी और हरेंद्र कुमार को मृत्युदंड सुनाकर मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोरतम दंड निर्धारित किया और चारों पर कुल 1.70 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। हालांकि, इस फैसले के बाद भी कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं मानी जाएगी। मृत्युदंड की पुष्टि और दोषियों की संभावित अपील जैसे कानूनी चरण आगे महत्वपूर्ण रहेंगे। इसलिए इस मामले की अगली सुनवाई और उच्च न्यायालय में होने वाली कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
घटना: 14 जुलाई 2014
स्थान: भभीसा गांव, जनपद शामली
मृतक: पवन कुमार
घायल: अशोक कुमार
फैसले की तारीख: 13 अगस्त 2026
अदालत: अपर सत्र न्यायालय/त्वरित न्यायालय संख्या-3, मुजफ्फरनगर
पीठासीन अधिकारी: रवि कुमार दिवाकर
दोषी: रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ बोसी और हरेंद्र कुमार
सजा: मृत्युदंड
अर्थदंड: कुल 1.70 लाख रुपये
मुख्य आरोपी विपुल उर्फ खूनी: पुलिस मुठभेड़ में पहले ही मारा गया
अन्य आरोपी अमित: पत्रावली 1 मार्च 2024 को अलग की गई
वर्तमान स्थिति: चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया है; फांसी अभी नहीं दी गई है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया शेष है।