आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज
मेरठ । गुरुवर परम पूज्य आचार्य श्री सौरभ सागर जी महामुनिराज के वर्षा योग के दौरान चल रही प्रवचनमाला से धर्मानुरागियों में उत्साह के साथ संस्कारों और धार्मिक चेतना का संचार हो रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुवर के दर्शन, चरण वंदना और प्रवचनों का लाभ लेने पहुंच रहे हैं। वर्षा योग के अंतर्गत आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिल रहा है। रविवार को प्रातःकालीन एवं सायंकालीन गुरु भक्ति कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की चरण वंदना कर भक्ति भाव से उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।
जिनवाणी मोक्ष मार्ग का मार्गदर्शन करती है: आचार्य श्री
आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में जिनवाणी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के अनुसार जिनवाणी अर्थात जिनेन्द्र परमात्मा की वाणी अत्यंत पावन, सत्य और मोक्ष मार्ग को दर्शाने वाली है। उन्होंने कहा कि जिनवाणी वीतराग भगवान की दिव्य ध्वनि अथवा आचार्यों द्वारा रचित ऐसे शास्त्रों का स्वरूप है, जो जीव को दुखों से दूर करने और आत्मा के वास्तविक स्वभाव का ज्ञान कराने का मार्ग दिखाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि ‘जिन’ का अर्थ राग और द्वेष पर विजय प्राप्त करने वाले जिनेन्द्र भगवान से है। अरहंत परमात्मा की वाणी एवं उनके उपदेश को जिनवाणी कहा जाता है। समवशरण में भगवान के मुख से निकलने वाली ॐकार ध्वनि को भी जिनवाणी के रूप में बताया गया है।
जिनवाणी में अनेकांत और स्याद्वाद का सिद्धांत
आचार्य श्री ने कहा कि भगवान की दिव्य ध्वनि को द्वादशांग अर्थात 12 अंगों में रचित किया गया है। जिनवाणी में जो कहा गया है, वह त्रिकाल सत्य है और संसार के समस्त जीवों के लिए हितकारी एवं कल्याणकारी है। उन्होंने बताया कि जिनवाणी किसी एक पक्ष का आग्रह नहीं करती, बल्कि वस्तु को अनेकांत और स्याद्वाद के सिद्धांत के माध्यम से समझाती है। इसका मूल संदेश अहिंसा, संयम और तप है। आचार्य श्री ने कहा कि जिनवाणी मन, वचन और काय से किसी भी जीव को किसी भी प्रकार का दुख पहुंचाने की प्रेरणा नहीं देती। इसके माध्यम से जीव और अजीव के स्वरूप का ज्ञान प्राप्त होता है तथा कर्म सिद्धांत को समझने का अवसर मिलता है।
‘जैसे कर्म करोगे, वैसा ही फल मिलेगा’
प्रवचन में आचार्य श्री ने कर्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए। जैसे कर्म किए जाते हैं, उसी के अनुरूप फल प्राप्त होता है। जिनवाणी जीव को अपने कर्मों को समझने और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जिनवाणी के माध्यम से जीव सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन जिनवाणी का स्वाध्याय करना चाहिए। आचार्य श्री ने धर्मानुरागियों से आह्वान किया कि वे नियमित रूप से धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें और जिनवाणी में बताए गए अहिंसा, संयम एवं तप के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करें।
19 अगस्त के निर्वाण महामहोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में
मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष एवं श्री पुष्प वर्षा योग समिति के चेयरमैन श्री सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि 19 अगस्त को जैन धर्मशाला, रेलवे रोड, मेरठ में आयोजित होने वाले श्री 1008 पार्श्वनाथ निर्वाण महामहोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उन्होंने बताया कि आगामी दशलक्षण महापर्व के अवसर पर 16 से 26 सितंबर तक आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में श्री दस लक्षण महामंडल विधान का आयोजन श्री महावीर जयंती भवन, शारदा रोड, मेरठ में किया जाएगा। उन्होंने धर्मानुरागियों से इन धार्मिक आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया।
ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
आज के कार्यक्रम में समिति के मुख्य संयोजक श्री सुरेंद्र जैन, संयोजक श्री प्रवीन जैन, श्री संजय जैन, श्री रितेश जैन, श्री विजय जैन एडवोकेट, श्री अनिल जैन दास, श्री प्रमोद जैन एडवोकेट, श्री रामेंद्र जैन, श्री राजीव जैन सहित अन्य श्रेष्ठीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति और धार्मिक वातावरण का लाभ लिया। आयोजन समिति के अनुसार आचार्य श्री के वर्षा योग के दौरान धर्मानुरागियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और श्रद्धालुओं में धार्मिक आयोजनों को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।