स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मनमोहक प्रस्तुति देते विश्वविद्यालय के छात्र छात्राएं
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को भव्य एवं गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण और विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान से पूरा विश्वविद्यालय परिसर देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से ओत-प्रोत हो गया। समारोह में विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने स्वतंत्रता आंदोलन के अमर सेनानियों को नमन करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने देशभक्ति से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
‘तिरंगा भारत के विश्वास, गौरव और राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान’
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष से की। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत के विश्वास, गौरव, एकता और राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करने का पावन अवसर है। उनके अदम्य साहस और बलिदान के कारण आज देशवासी स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। कुलपति ने कहा कि आजादी का यह महापर्व देशवासियों के सामूहिक संकल्प, उपलब्धियों और राष्ट्रीय गौरव का पर्व है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने में संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
संविधान लोकतंत्र के लिए प्रकाश स्तंभ
प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का मार्ग दिखाते हुए लोकतंत्र के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह कार्य कर रहा है। उन्होंने संविधान निर्माण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सहित अनेक राष्ट्रनिर्माताओं के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है।
अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी बोध कराती है स्वतंत्रता
कुलपति ने कहा कि स्वतंत्रता केवल हमें अधिकार ही प्रदान नहीं करती, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों और उत्तरदायित्व का भी बोध कराती है। प्रत्येक नागरिक को अपने ज्ञान, प्रतिभा, कौशल और कर्म को राष्ट्रहित से जोड़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘विकसित भारत@2047’ के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत आज ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और मानवता के कल्याण के क्षेत्र में विश्व के सामने नई संभावनाएं प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सतत विकास जैसी चुनौतियों को पूरी मानवता की साझा चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान में भारत की भूमिका एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
‘युवा वैश्विक समस्याओं के समाधान का हिस्सा बनें’
कुलपति ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल वैश्विक अवसरों के लिए तैयार न हों, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान का हिस्सा भी बनें। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थी अपनी स्थानीय जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक दृष्टि विकसित करें और ज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार को मानवता के व्यापक कल्याण से जोड़ें। उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि विचारों को संकल्प में, संकल्प को परिश्रम में और परिश्रम को उपलब्धि में बदलना ही सफलता का वास्तविक मार्ग है। विद्यार्थियों को जीवन के लक्ष्य निर्धारित कर ईमानदारी, अनुशासन, निरंतरता और कठोर परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विवेक का विस्तार और जिज्ञासा का जागरण भी है।
रोजगार लेने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा
कुलपति ने कौशल आधारित शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने और राष्ट्र की समस्याओं के समाधान में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ कौशल, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
NAAC A++ उपलब्धि का किया उल्लेख
अपने संबोधन में कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के ग्रामीण विकास, किसान कल्याण, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भरता के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान दे रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा A++ ग्रेड प्राप्त होने को गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट अनुसंधान और नवाचार की संस्थागत संस्कृति का प्रमाण है। कुलपति ने 38वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को ‘उत्तर प्रदेश का प्रथम विश्वविद्यालय’ कहकर व्यक्त किए गए विश्वास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह विश्वास विश्वविद्यालय परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता कोई अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर साधना है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता का प्रतीक बनना है।
मानवता के कल्याण में हो AI और तकनीक का उपयोग
कुलपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही समाज और राष्ट्र अग्रणी होंगे, जो प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए करेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदनशीलता, नैतिक मूल्य, सृजनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग का विस्तार
प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसकी इमारतों से नहीं होती, बल्कि उसके अनुसंधान, नवाचार और समाज के प्रति योगदान से होती है। विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ अपने शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग का लगातार विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये सहयोग केवल संस्थागत साझेदारी नहीं हैं, बल्कि विचारों, संस्कृतियों और ज्ञान के वैश्विक आदान-प्रदान का माध्यम हैं। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक अवसर, शोध सहयोग और वैश्विक ज्ञान तक पहुंच प्राप्त हो। ‘विकसित भारत@2047 प्रत्येक भारतीय का राष्ट्रीय संकल्प’ कुलपति ने कहा कि ‘विकसित भारत@2047 केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का राष्ट्रीय संकल्प है।’ उन्होंने विद्यार्थियों से सपने देखने, संकल्प लेने और अपने ज्ञान एवं कर्म के माध्यम से भारत के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं तो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को गति दी जा सकती है।
देशभक्ति प्रस्तुतियों ने जीता दिल
स्वतंत्रता दिवस समारोह में विश्वविद्यालय की छात्राओं और विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। लॉ की छात्रा ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। वहीं फाइन आर्ट्स के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत पर शानदार नृत्य प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान पूरा विश्वविद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति की भावना से सराबोर नजर आया।
ज्ञान से अनुसंधान और अनुसंधान से नवाचार तक का संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने विश्वविद्यालय परिवार से शैक्षणिक स्तर, अनुसंधान की गुणवत्ता, नवाचार और प्रशासनिक व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा—
“हम ज्ञान को अनुसंधान से जोड़ेंगे,
अनुसंधान को नवाचार से जोड़ेंगे,
नवाचार को समाज से जोड़ेंगे
और समाज को विकसित भारत के महान राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ेंगे।”
कुलपति ने कहा कि यही चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की पहचान, राष्ट्रीय प्रतिबद्धता और स्वतंत्र भारत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय गौरव की भावना के साथ ‘जय हिंद! जय भारत! भारत माता की जय!’ के उद्घोष से हुआ। स्वतंत्रता दिवस समारोह ने विश्वविद्यालय परिवार में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, युवा शक्ति के महत्व और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को और मजबूत किया।