मंगल प्रवचन करते आचार्य सौरभ सागर जी महाराज
वर्षा योग के दौरान प्रतिदिन हो रहे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति में लिया हिस्सा
मेरठ । गुरुवर परम पूज्य आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज का वर्षा योग धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच निरंतर आगे बढ़ रहा है। वर्षा योग के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में धर्मानुरागी श्रद्धालु शामिल होकर आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर परिसर में लगातार संस्कारों और धर्म के संदेश का उद्घोष हो रहा है।
प्रातः मंगल प्रवचन में उमड़े श्रद्धालु
श्री दिगंबर जैन मंदिर, गंगानगर, मेरठ में गुरुवार को प्रातः 9 बजे परम पूज्य आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज का मंगल प्रवचन हुआ। प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं को जीवन में सुख-दुख के प्रति समभाव बनाए रखने और हर परिस्थिति में धर्म के मार्ग पर दृढ़ रहने का संदेश दिया। आचार्य श्री ने अपने संबोधन में कहा कि “सुख में फूलो नहीं, दुख में कूलो नहीं, कैसी भी स्थिति आ जाए, अपने धर्म को भूलो नहीं।” उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां निरंतर बदलती रहती हैं। इसलिए व्यक्ति को परिस्थितियों के साथ अपने मन को विचलित करने के बजाय धर्म और संयम को अपना आधार बनाना चाहिए।
सुख-दुख में समभाव बनाए रखने का संदेश
आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में आने वाली प्रत्येक परिस्थिति को लेकर अत्यधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति को यह विचार रखना चाहिए कि जीवन में बहुत सी चीजें आती-जाती रहती हैं, लेकिन धर्म और संस्कार ही स्थायी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से एकतरफा बैर की स्थिति भी बन जाए तो हमारा जीवन ऐसा होना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति भी हमें देखकर शांत हो जाए। मन में वैर और विरोध रखने के बजाय शांति, क्षमा और समता का भाव विकसित करना ही आध्यात्मिक जीवन की पहचान है।
कर्मों के उदय को समझने की जरूरत
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने जैन दर्शन में वर्णित कर्मोदय की अवधारणा को भी समझाया। उन्होंने बताया कि पूर्व में बांधे गए कर्म जब अपने निश्चित समय, क्षेत्र और परिस्थितियों के अनुसार परिपक्व होकर अपना फल देना शुरू करते हैं, तो उसे कर्मों का उदय कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में मिलने वाला सुख-दुख किसी बाहरी शक्ति की इच्छा मात्र का परिणाम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के अपने पूर्व संचित कर्मों के उदय से भी जुड़ा होता है। जैन दर्शन व्यक्ति को कर्मों के उदय को समस्या मानकर विचलित होने के बजाय समभाव के साथ परिस्थितियों को स्वीकार करने की प्रेरणा देता है।

नए कर्मों के बंधन को रोकना और पुराने कर्मों की निर्जरा ही मार्ग
आचार्य श्री ने कहा कि जैन धर्म के अनुसार जीवन में कर्मों के उदय के दौरान व्यक्ति को समता का भाव बनाए रखते हुए नए कर्मों के बंधन को रोकने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही पुराने कर्मों की निर्जरा की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यही आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष मार्ग की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जो कर्म उदय में आ चुके हैं अथवा जिनका उदय होना निश्चित है, उन्हें टाला नहीं जा सकता। ज्ञानी पुरुष उन परिस्थितियों को शांतिपूर्वक स्वीकार करते हुए कर्मों का क्षय करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
शंका समाधान और गुरु भक्ति में भी श्रद्धालुओं की सहभागिता
वर्षा योग के अंतर्गत दोपहर 3 बजे शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें धर्मानुरागियों ने अपनी जिज्ञासाएं एवं शंकाएं रखीं और आचार्य श्री के मार्गदर्शन से उनका समाधान प्राप्त किया। इसके बाद शाम 6:30 बजे आयोजित सायंकालीन गुरु भक्ति कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्तों ने गुरुवर के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए उनकी वंदना और भक्ति की। मंदिर परिसर में इस दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा।
5 सितंबर को IIMT गंगानगर के लिए होगा मंगल विहार
श्री पुष्प वर्षा योग समिति मेरठ महानगर के चेयरमैन श्री सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि परम पूज्य आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज का मंगल विहार 5 सितंबर 2026 को प्रातः 6:15 बजे श्री दिगंबर जैन मंदिर, गंगानगर से IIMT गंगानगर के लिए होगा। समिति की ओर से श्रद्धालुओं से मंगल विहार में सहभागिता करने और आचार्य श्री के दर्शन एवं आशीर्वाद का लाभ लेने का आह्वान किया गया है।
कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारी एवं श्रद्धालु रहे मौजूद
आज के धार्मिक कार्यक्रमों में श्री पुष्प वर्षा योग समिति मेरठ महानगर के सुरेंद्र जैन, अनिल जैन कक्कू, रितेश जैन, प्रेम चंद जैन, अक्षय जैन, अनिल जैन, राकेश जैन, अनिल जैन दास, हंस कुमार जैन, विपिन जैन, प्रभाष जैन, प्रवीन जैन, वीरेंद्र जैन सहित अन्य श्रेष्ठीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए धर्म, संयम और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।