जैन आचार्य सौरभ सागर जी ने आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता, प्रति कुलाधिपति डॉ मयंक अग्रवाल व महोत्सव में आए ज्योतिष आचार्यों को आशीर्वाद प्रदान किया
मेरठ, 6 सितंबर 2026। आईआईएमटी विश्वविद्यालय में ज्योतिष पाठ्यक्रम के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं ज्योतिष विभाग के सौजन्य से आयोजित दो दिवसीय प्रथम ज्योतिष महोत्सव का रविवार शाम भव्य समापन हुआ। महोत्सव के दूसरे दिन प्राचीन भारतीय ज्योतिष परंपरा के विभिन्न पहलुओं, उसके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों तथा वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ श्रीलंका और नेपाल से भी ज्योतिषाचार्यों ने सहभागिता की। आयोजकों के अनुसार, दो दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक ज्योतिषाचार्यों एवं विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान ज्योतिष की विभिन्न विधाओं पर चर्चा के साथ आम लोगों को विशेषज्ञों से निशुल्क ज्योतिषीय परामर्श लेने का अवसर भी प्रदान किया गया।
जैनाचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज का हुआ स्वागत
प्रथम ज्योतिष महोत्सव के दूसरे दिन जैनाचार्य 108 श्री सौरभ सागर जी महाराज का विधि-विधान से स्वागत किया गया। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता, प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल, श्रीमती सौरभ जैन और श्रीमती पियांशु अग्रवाल ने महाराज श्री को नमन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की छात्राओं भूमि और आन्या ने गुरु महिमा पर आधारित नृत्य प्रस्तुति दी। प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता और प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल ने महोत्सव में शामिल ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित किया।
‘ज्योतिष व्यक्ति को परिस्थितियों को समझने में मार्गदर्शन दे सकता है’
जैनाचार्य 108 श्री सौरभ सागर जी महाराज ने महोत्सव में शामिल विद्वान ज्योतिषाचार्यों के ज्ञान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीवन में विभिन्न प्रकार की परिस्थितियां और व्यवधान आते रहते हैं। उनके अनुसार, अनुभवी और विद्वान ज्योतिषाचार्य व्यक्ति को परिस्थितियों को समझने और उनका सामना करने के लिए मार्गदर्शन दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ज्योतिष व्यक्ति को भविष्य के प्रति सजग रहने के साथ पुरुषार्थ करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने महोत्सव में आए सभी ज्योतिषाचार्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आईआईएमटी विश्वविद्यालय प्रबंधन को आयोजन के लिए आशीर्वाद प्रदान किया।
रविवार शाम विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से आयोजित गुरु भक्ति कार्यक्रम में भी महाराज श्री को नमन किया गया।
‘ज्योतिष भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा’
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता ने कहा कि ज्योतिष भारत की प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष को केवल भविष्य जानने के माध्यम के रूप में देखने के बजाय इसके विभिन्न पहलुओं को समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से ज्योतिष के क्षेत्र में ज्ञान, अनुभव और शोध का आदान-प्रदान होता है। साथ ही भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे कार्यक्रम उपयोगी हो सकते हैं।
ज्योतिष पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन की सराहना
ज्योतिषाचार्या हरि सिंह रावत ने आईआईएमटी विश्वविद्यालय में ज्योतिष पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की सराहना की। उन्होंने ज्योतिष विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए जन्म के समय की ग्रह स्थिति और ज्योतिषीय गणनाओं के संबंध में अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि जीवन को बेहतर ढंग से समझने के लिए लोग विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं। उनके संबोधन में ज्योतिषीय गणनाओं और जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बीच संबंध पर चर्चा की गई।
ज्योतिष को लेकर अंधविश्वास और व्यापारिकरण पर भी चर्चा
टोंक से आए बगलामुखी उपासक राम कुमार शर्मा ने कहा कि लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि यदि जीवन में होने वाली घटनाएं पहले से निर्धारित हैं तो ज्योतिषीय परामर्श की आवश्यकता क्यों है। उन्होंने कहा कि उनके विचार में विद्वान ज्योतिषी व्यक्ति को परिस्थितियों का सामना करने और अपने जीवन की दिशा निर्धारित करने के लिए मार्गदर्शन दे सकते हैं।
उन्होंने ज्योतिष के नाम पर होने वाले वशीकरण और तंत्र-मंत्र जैसे दावों तथा इसके व्यापारिकरण पर भी चिंता जताई। उन्होंने लोगों को परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने तथा अपने जीवन की समस्याओं को व्यावहारिक तरीके से समझने की सलाह दी।
मेडिकल एस्ट्रोलॉजी पर भी विशेषज्ञ ने रखे विचार
आईएएफ ज्योतिषाचार्य डॉ. लखन दहिया ने मेडिकल एस्ट्रोलॉजी के विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस पद्धति के माध्यम से जन्मकुंडली के अध्ययन के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी संभावित समस्याओं और रोगों की प्रवृत्तियों का आकलन किए जाने का दावा किया जाता है।
उन्होंने कहा कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाने पर चर्चा की जा सकती है। स्वास्थ्य संबंधी वास्तविक समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
ज्योतिष को निर्णय और गणना का विज्ञान बताया
उत्तराखंड के पूर्व मंत्री एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. नंदकिशोर पुरोहित ने ज्योतिष को निर्णय और गणना से जुड़ा विज्ञान बताते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने हनुमान जी को विद्या और सफलता से जोड़ते हुए धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदर्भों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में आने वाली परिस्थितियों के प्रति धैर्य रखना चाहिए और लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उनके संबोधन में ज्योतिषीय गणनाओं और मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर चर्चा की गई।
आम लोगों को मिला निशुल्क परामर्श का अवसर
दो दिवसीय ज्योतिष महोत्सव की एक प्रमुख विशेषता आम लोगों के लिए निशुल्क ज्योतिषीय परामर्श की व्यवस्था रही। आयोजकों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग विश्वविद्यालय पहुंचे और देश-विदेश से आए ज्योतिषाचार्यों से अपने सवालों और जीवन से जुड़े विषयों पर परामर्श लिया।
महोत्सव में वैदिक ज्योतिष के अलावा वास्तु शास्त्र, टैरो रीडिंग, हीलिंग, अंक विज्ञान और हस्तरेखा विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों ने भी लोगों से संवाद किया।
देश-विदेश से पहुंचे ज्योतिषाचार्य
महोत्सव में उत्तराखंड के पूर्व मंत्री डॉ. नंदकिशोर पुरोहित, श्रीलंका से आए आचार्य सुनेथ बडुला, टोंक के बगलामुखी उपासक राम कुमार शर्मा, धर्मगुरु एवं वैदिक ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ. एसएस रावत, आईएएफ के डॉ. लखन दहिया, ज्योतिष विज्ञानी एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक आचार्य सागर और दिल्ली स्टेट कमेटी के प्रेसिडेंट राघव स्वरूप भट्ट सहित अनेक ज्योतिष विशेषज्ञ शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने अंक ज्योतिष, फलित ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु, टैरो, न्यूमरोलॉजी, एस्ट्रोलॉजी और हीलिंग सहित ज्योतिष से जुड़ी विभिन्न विधाओं के बारे में जानकारी साझा की।
भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल
महोत्सव के दौरान गायिका अनन्या सिंह ने भजनों की प्रस्तुति दी। उनके भजनों ने कार्यक्रम के माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने भी आयोजन में सांस्कृतिक रंग भर दिया।
आयोजकों ने जताया आभार
ज्योतिष विभाग की डीन आशा त्यागी ने जैनाचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज, देश-विदेश से आए सभी ज्योतिषाचार्यों, विशेषज्ञों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन एकता शर्मा ने किया।
आयोजन में डीन एक्टिविटीज डॉ. लखविंदर सिंह, निदेशक प्रशासन डॉ. संदीप कुमार, मीडिया प्रभारी सुनील शर्मा, ज्योतिष विभाग के शिक्षक एवं कर्मचारी सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के डीन, एचओडी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
धार्मिक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई
महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए आयोजकों की ओर से कुछ धार्मिक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। इनमें ‘रोग एवं शत्रु निवारण तथा न्यायालयीन मामलों में सफलता की कामना’ से संबंधित सिद्ध बगलामुखी यंत्र और ‘सुख-समृद्धि एवं नकारात्मक ऊर्जा के निवारण’ के उद्देश्य से नलखेड़ा सिद्ध पीठ से अभिमंत्रित बताई गई विशेष सिद्ध पीली सरसों युक्त धूप शामिल रही।
दो दिवसीय ज्योतिष महोत्सव के समापन के साथ विश्वविद्यालय में संचालित ज्योतिष पाठ्यक्रम के एक वर्ष पूरे होने का आयोजन भी संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिष की विभिन्न विधाओं और उनसे जुड़े समकालीन विमर्श को लेकर विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों के बीच संवाद का अवसर मिला।