महिला पत्रकारों के कथित दुर्व्यवहार के विरोध में जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे संयुक्त प्रेस क्लब के पत्रकार
मेरठ। दिल्ली में 4PM न्यूज नेटवर्क से जुड़ी महिला पत्रकारों शाहीन खान एवं नफीसा खान के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले को लेकर मेरठ में पत्रकारों ने विरोध जताया। संयुक्त प्रेस क्लब, मेरठ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने घटना पर रोष व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई।
अध्यक्ष अतुल माहेश्वरी के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन
संयुक्त प्रेस क्लब के अध्यक्ष अतुल माहेश्वरी और महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर के नेतृत्व में पत्रकार जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। पत्रकारों ने महिला पत्रकारों से जुड़े प्रकरण में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई और कहा कि समाचार संकलन एवं रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और पत्रकार समाज तथा शासन-प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करते हैं। पत्रकारों को अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन स्वतंत्र एवं निर्भीक होकर करने का अधिकार है। ऐसे में पत्रकारों के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार, धमकी अथवा दबाव के आरोप सामने आने पर मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार
ज्ञापन में कहा गया कि महिला पत्रकारों की ओर से आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के साकेत क्षेत्र में एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में पुलिस थाने में उनके साथ कथित मारपीट एवं दुर्व्यवहार किया गया।
वहीं, उपलब्ध पक्ष के अनुसार दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि दोनों महिला पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल के पास वीआईपी मार्ग से संबंधित व्यवस्था तथा पुलिसकर्मियों के साथ कथित विवाद के बाद पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया था। ऐसे में संयुक्त प्रेस क्लब ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की मांग की है।
पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं: अतुल माहेश्वरी
संयुक्त प्रेस क्लब के अध्यक्ष अतुल माहेश्वरी ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पत्रकार जनहित से जुड़े सवाल शासन-प्रशासन के समक्ष रखते हैं और समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सुरक्षित एवं स्वतंत्र वातावरण उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसी भी मामले में यदि पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराकर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास लोकतंत्र के लिए चिंताजनक: धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर
महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों को पत्रकारिता का दायित्व निभाने के दौरान रोके जाने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए हैं।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था से सीधे जुड़ा विषय है।
महिला पत्रकारों के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग: शाहीन परवीन
संयुक्त प्रेस क्लब की उपाध्यक्ष शाहीन परवीन ने महिला पत्रकारों से जुड़े मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मामला महिला सुरक्षा के साथ-साथ प्रेस की स्वतंत्रता से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि जांच के माध्यम से पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
भयमुक्त वातावरण में काम करना पत्रकारों का अधिकार: जाहिदा खान
संयुक्त प्रेस क्लब की मंत्री जाहिदा खान ने कहा कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण में अपने दायित्वों का निर्वहन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी भी पत्रकार के साथ उसकी पहचान, विचार अथवा सवाल पूछने के कारण दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज को जागरूक करने और जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए पत्रकारों की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा की रक्षा जरूरी: अविनाश कुमार सक्सेना
उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार अविनाश कुमार सक्सेना ने कहा कि पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए जनहित के मुद्दों को सामने लाते हैं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को सम्मान और सुरक्षा मिलना जरूरी है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के साथ यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में रखीं छह सूत्रीय मांगें
संयुक्त प्रेस क्लब की ओर से राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें रखी गईं। संगठन ने कहा कि पूरे प्रकरण में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए।
ज्ञापन में घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की गई।
इसके अलावा पीड़ित महिला पत्रकारों को न्याय एवं सुरक्षा उपलब्ध कराने और नियमानुसार मुआवजा प्रदान करने की मांग रखी गई। भविष्य में पत्रकारों के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने तथा पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून लागू किए जाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री और दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी भेजी प्रतिलिपि
संयुक्त प्रेस क्लब की ओर से बताया गया कि राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई है। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
पत्रकार हितों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प
संयुक्त प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पत्रकार हितों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर संगठन मजबूती के साथ आवाज उठाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकारों से संबंधित विषय नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। पत्रकारों को बिना भय और दबाव के अपना कार्य करने का अवसर मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
बड़ी संख्या में पत्रकार रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान अध्यक्ष अतुल माहेश्वरी, महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर, उपाध्यक्ष शाहीन परवीन, मंत्री जाहिदा खान, राजेंद्र प्रताप चौहान, विनोद गोस्वामी, लियाकत मंसूरी, शाहवेज खान, रमेश सोनी, गौरव गोयल, भास भारती नागर, प्रभास रस्तोगी, ठाकुर महेश चंद, एम.एच. खान, रवि ठाकुर, एहसान कुरैशी, अनु अग्रवाल, दिनेश कुमार सिंघल, कमल सिंह प्रजापति, विकास गोयल, मुकेश कुमार, जयवीर सिंह, राजेश सैनी, राहुल गौतम, सुनील कुमार पंडित, सुनील जैकब, रुक्मणी, धर्मेंद्र कुमार, मोहम्मद कादिर, मोहम्मद शहजाद, अनिल बादली, सुनील बादली, मोहम्मद आबिद तथा उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार अविनाश कुमार सक्सेना सहित संयुक्त प्रेस क्लब से जुड़े अनेक पत्रकार, संपादक, प्रकाशक, पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।