वाल्मीकि समाज को आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर एसपी सिटी को ज्ञापन देती डॉ रोहिणी
कदंबा रिसोर्ट में सामाजिक बैठक, यूपी में वाल्मीकि समाज के मुख्यमंत्री की मांग; भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा से विधानसभा चुनाव में टिकट देने की अपील
मेरठ । आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की पूर्व गर्लफ्रेंड होने का दावा करने वाली डॉ. रोहिणी घावरी रविवार को मेरठ पहुंचीं। उन्होंने कदंबा रिसोर्ट में आयोजित अपनी पहली सामाजिक बैठक में वाल्मीकि समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने सहित कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि समाज को केवल चुनावी भीड़ या वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सत्ता और राजनीतिक नेतृत्व में भी उसे पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
‘उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि समाज का मुख्यमंत्री होना चाहिए’
डॉ. रोहिणी घावरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि समाज को राजनीतिक नेतृत्व में उचित अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक वाल्मीकि समाज केवल दूसरे राजनीतिक दलों और नेताओं को चुनाव जिताने के लिए वोट करता रहेगा। उनका कहना था कि समाज को अब स्वयं राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका में आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ खड़ा रहा है, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिल सकी। उन्होंने समाज के लोगों से भी राजनीतिक रूप से जागरूक होकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा से टिकट की मांग
सामाजिक बैठक के दौरान डॉ. रोहिणी ने भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी समेत प्रमुख राजनीतिक दलों से आगामी विधानसभा चुनाव में वाल्मीकि समाज के लोगों को पर्याप्त संख्या में टिकट देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल यदि समाज के लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर देते हैं तो समाज के प्रतिनिधि पूरी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ जनता के बीच जाएंगे। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज के लोगों को विधानसभा और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं में पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे अपने समाज और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकें।
दो प्रमुख मांगों पर जोर
डॉ. रोहिणी घावरी ने सामाजिक बैठक में अपनी दो प्रमुख मांगों को सामने रखा। पहली मांग उत्तर प्रदेश में आरक्षण वर्गीकरण लागू करने की रही, जबकि दूसरी मांग वाल्मीकि समाज को राजनीतिक क्षेत्र में कम से कम 30 प्रतिशत भागीदारी देने की रही।
उन्होंने कहा कि समाज की ओर से 30 प्रतिशत राजनीतिक भागीदारी की मांग रखी जा रही है। यदि राजनीतिक दल इस मांग का पूरा हिस्सा देने की स्थिति में नहीं हैं और 10 प्रतिशत भागीदारी भी सुनिश्चित करते हैं, तो समाज उस हिस्सेदारी को भी स्वीकार करेगा। उनके अनुसार, मूल उद्देश्य वाल्मीकि समाज को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी स्थान दिलाना है।
‘आबादी 20 लाख से ज्यादा, फिर भी राजनीतिक हिस्सेदारी जीरो’
डॉ. रोहिणी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि समाज की आबादी 20 लाख से अधिक है, लेकिन राजनीतिक हिस्सेदारी के मामले में समाज की स्थिति बेहद कमजोर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाज विभिन्न राजनीतिक दलों को चुनाव में समर्थन देता है और उनके कार्यक्रमों में भागीदारी करता है, तो राजनीतिक नेतृत्व में उसे पर्याप्त अवसर क्यों नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से विभिन्न दलों का समर्थन करता आया है और अब वह अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठा रहा है। उनका कहना था कि वाल्मीकि समाज को भी विधानसभा और सत्ता के अन्य स्तरों पर अपनी आवाज पहुंचाने का अवसर मिलना चाहिए।
‘वाल्मीकि समाज सिर्फ दरी बिछाने तक सीमित क्यों रहे?’
राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर डॉ. रोहिणी ने कहा कि वाल्मीकि समाज को केवल चुनावी आयोजनों में भीड़ जुटाने या दरी बिछाने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समाज के लोगों को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी और नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने समाज के युवाओं और अन्य लोगों से राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में केवल मतदान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में हिस्सेदारी भी जरूरी है।
चंद्रशेखर आजाद से जुड़े मामले पर भी दिया बयान
बैठक के दौरान डॉ. रोहिणी घावरी से चंद्रशेखर आजाद से जुड़े उनके पूर्व संबंधों और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में भी सवाल किए गए। उन्होंने कहा कि यह मामला अब न्यायालय में है और वह कोर्ट की तारीख का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय का फैसला आने के बाद वह अपनी बात सबके सामने रखेंगी। अपने द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में उन्होंने कहा कि सही और गलत का फैसला न्यायाधीश और न्यायालय को करने देना चाहिए। उनका कहना था कि प्रत्येक मामले का फैसला सड़क पर नहीं हो सकता और वास्तविक स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही सामने आनी चाहिए।
महिला आयोग से जवाब नहीं मिलने का दावा
डॉ. रोहिणी ने महिला आयोग को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि वह पिछले करीब एक वर्ष से आयोग के समक्ष अपनी बात रखने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि महिला आयोग उनकी शिकायत अथवा पक्ष को सुनेगा और आवश्यक कार्रवाई करेगा। हालांकि, इस संबंध में महिला आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया बैठक में उपलब्ध नहीं कराई गई।
आरक्षण वर्गीकरण को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
सामाजिक बैठक के बाद आरक्षण वर्गीकरण की मांग को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन एसडीएम तथा एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले को सौंपे जाने की जानकारी दी गई। ज्ञापन के माध्यम से उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि समाज के लिए आरक्षण वर्गीकरण लागू किए जाने की मांग उठाई गई। आयोजकों का कहना है कि समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सामाजिक बैठक में कई लोग रहे मौजूद
बैठक का आयोजन सामाजिक स्तर पर किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न लोगों ने भाग लिया। बैठक के संयोजक रोहित प्रधान (पावटी) रहे। इस अवसर पर राजकुमार, सिद्धार्थ, प्रवीण भगवानिया, अशोक प्रधान, किशोर प्रधान और अर्जुन करोतिया समेत अन्य लोग मौजूद रहे। बैठक में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण वर्गीकरण और समाज की सामाजिक एवं राजनीतिक स्थिति से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने समाज को संगठित होकर अपने अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।
राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई बहस की कोशिश
मेरठ में आयोजित इस सामाजिक बैठक के माध्यम से डॉ. रोहिणी घावरी ने वाल्मीकि समाज की राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राजनीतिक दलों से समाज को चुनावी प्रतिनिधित्व देने की अपील करने के साथ-साथ आरक्षण वर्गीकरण की मांग को भी सरकार के समक्ष रखा। अब देखना होगा कि राजनीतिक दल और सरकार इन मांगों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं। वहीं, न्यायालय में लंबित बताए जा रहे व्यक्तिगत मामले में आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही के बाद ही संबंधित आरोपों और दावों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।