अतिक्रमण हटाता बुल्डोजर
उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित शास्त्री नगर (सेंट्रल मार्केट) प्रकरण में आज यानी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर मेरठ के दर्जनों व्यापारियों और प्रभावित परिवारों की निगाहें टिकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) अदालत में प्रस्तुत करनी है।
सुनवाई की तैयारी में रविवार को भी खुला रहा परिषद का कार्यालय
अदालत में सोमवार को होने वाली सुनवाई की गंभीरता को देखते हुए रविवार के साप्ताहिक अवकाश के बावजूद आवास एवं विकास परिषद का मेरठ कार्यालय खुला रहा। दिनभर अधिकारियों और अभियंताओं की हलचल बनी रही। अधिकारियों ने मामले से जुड़ी संबंधित फाइलें, नक्शे और ध्वस्तीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार करवाए। परिषद के वरिष्ठ अधिकारी और विधिक टीम पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं ताकि समय पर कोर्ट के समक्ष सभी तथ्य और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।
14 जुलाई के आदेश के बाद 6 अवैध भवनों पर चला था बुलडोजर
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 जुलाई को दिए गए आदेश के अनुपालन में आवास एवं विकास परिषद ने सील की गई 44 संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। परिषद के अनुसार, इन सभी संपत्तियों का आवंटन मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए किया गया था, लेकिन वहां बिना अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। कोर्ट के निर्देश पर परिषद ने नोटिस जारी कर आवंटियों को 15 दिनों के भीतर स्वयं अनधिकृत निर्माण हटाने का अवसर दिया था। तय समयावधि में निर्माण न हटाए जाने पर परिषद ने 16 सितंबर को बड़ी कार्रवाई करते हुए छह भवनों को ध्वस्त कर दिया था, जिनमें पांच व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और एक बैंक्वेट हॉल शामिल था। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जिन भवनों को गिराया गया है, उनके नक्शे स्वीकृत नहीं थे और निर्माण पूरी तरह से अनधिकृत था।
सेक्टर-2 में 171वें दिन भी जारी रहा महिलाओं का धरना
एक तरफ जहां विधिक प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों का विरोध भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। सेक्टर-2 में कार्रवाई के विरोध में महिलाओं का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को 171वें दिन में प्रवेश कर गया। धरने पर बैठीं शीतल पुजानी, राधा गुप्ता, जगरोशनी, रजनी और ऊषा सहित अन्य महिलाओं ने एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत से राहत की पूरी उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि उनके आशियानों और रोजगार पर कार्रवाई जारी रहती है, तो वे इसका पुरजोर विरोध करती रहेंगी।
नेताओं से मुलाकात की कोशिश पर संघर्ष समिति ने उठाए सवाल
सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के संभावित मेरठ दौरे को देखते हुए कुछ स्थानीय व्यापारियों ने उनसे मिलकर अपना पक्ष रखने का समय मांगा है। हालांकि, ‘मेरठ बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति’ के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने व्यापारियों के इस कदम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए राजनीतिक स्तर पर मुलाकात का प्रयास करना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर लामबंदी और आगे के आंदोलन की चेतावनी सुनवाई से ठीक पहले प्रभावित व्यापारी सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और अपनी समस्याओं को उजागर कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलती है या फैसला उनके अनुकूल नहीं आता है, तो वे बाध्य होकर बड़े स्तर पर जन-आंदोलन करेंगे। फिलहाल, आज होने वाली सुनवाई में आवास विकास परिषद की अनुपालन रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहता है, इसी पर पूरे सेंट्रल मार्केट का भविष्य टिका हुआ है।