मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम को लेकर आयोजित जागरूकता शिविर में शामिल लोग
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के जंतु विज्ञान विभाग में विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, सीसीएसयू मेरठ तथा मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया, मेरठ के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना तथा आवश्यकता पड़ने पर समय रहते उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करना रहा।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता वर्तमान समय की आवश्यकता
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुश्री प्रिया पाल, परामर्श मनोवैज्ञानिक, मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया ने युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, उनके शुरुआती संकेतों और उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी होना आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पूर्वाग्रह और संकोच को कम करने से विद्यार्थी अपनी परेशानियों को समय रहते साझा करने और आवश्यक सहायता लेने के लिए आगे आ सकते हैं।
मानसिक परेशानी के संकेतों को नजरअंदाज न करने की अपील
इस अवसर पर मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने आत्महत्या की गंभीर समस्या पर प्रकाश डालते हुए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों की समय पर पहचान और सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि लगातार उदासी, असहायता की भावना, चिड़चिड़ापन, ऊर्जा में कमी, सामाजिक दूरी बनाने की प्रवृत्ति या अकेले रहने की इच्छा जैसे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में व्यक्ति से संवेदनशीलता के साथ संवाद करना और जरूरत के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी परेशान व्यक्ति की बात को ध्यानपूर्वक सुनना, उसके साथ संवेदनशीलता से खड़ा होना और उसे उचित सहायता तक पहुंचाना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंता दिखाई देने पर समस्या को अकेले संभालने के बजाय परिवार, शिक्षक, परामर्शदाता या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेना उचित है।
वर्ष 2018 से संचालित है मानसिक स्वास्थ्य एवं वेल बीइंग सेंटर
प्रो. संजय कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में मानसिक स्वास्थ्य एवं वेल बीइंग सेंटर वर्ष 2018 से संचालित है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि तनाव, भावनात्मक कठिनाइयों अथवा किसी अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या की स्थिति में वे केंद्र से संपर्क कर अपनी समस्या साझा कर सकते हैं और उपलब्ध परामर्श एवं सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
लघु नाटिका के माध्यम से दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय मनोवैज्ञानिक शिवानी शर्मा एवं सागर तोमर द्वारा किया गया। इस अवसर पर एम.ए. मनोविज्ञान के विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम पर आधारित एक प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझने, दूसरों की भावनाओं और परेशानियों को गंभीरता से लेने तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए आगे आने का संदेश दिया गया।
विद्यार्थियों ने रखे सवाल, मानसिक स्वास्थ्य पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में जंतु विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों के साथ-साथ मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। सत्र के दौरान मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, भावनात्मक कठिनाइयों और सहायता प्राप्त करने के तरीकों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने अपने प्रश्न भी रखे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन के माध्यम से समाधान किया गया।
मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना जागरूकता और जिम्मेदारी का प्रतीक
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना कमजोरी नहीं, बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मानसिक परेशानी के संकेतों को समय रहते पहचानना, संवेदनशील संवाद करना और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा जरूरत के समय सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।