नाना पाटेकर (फाइल फोटो)
#ANN। भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी फिल्मों या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि उनके अभिनय की गहराई, संवाद अदायगी और व्यक्तित्व से बनती है। ऐसे ही कलाकारों में एक प्रमुख नाम है दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का। अपनी विशिष्ट आवाज, गंभीर चेहरे, प्रभावशाली संवादों और स्वाभाविक अभिनय के कारण नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी फिल्म जगत में एक अलग स्थान बनाया है।
नाना पाटेकर उन अभिनेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने नायक, खलनायक, पुलिस अधिकारी, सैनिक, पिता और आम आदमी जैसे विविध किरदारों को पर्दे पर जीवंत किया। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय भावनाओं और जीवन के संघर्षों की झलक भी देखने को मिलती है।
महाराष्ट्र में जन्म, संघर्षों के बीच बीता शुरुआती जीवन
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उनका पूरा नाम विश्वनाथ पाटेकर है। बचपन से ही उन्हें कला और अभिनय में रुचि थी। जीवन के शुरुआती दौर में परिवार को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कठिन परिस्थितियों ने उनके आत्मविश्वास और मेहनत करने की क्षमता को मजबूत बनाया।
उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से कला की शिक्षा प्राप्त की। अभिनय की दुनिया में प्रवेश करने से पहले उनका जुड़ाव व्यावसायिक कला से भी रहा। थिएटर ने उनके अभिनय कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रंगमंच पर काम करते हुए उन्होंने संवाद अदायगी, भावनाओं की अभिव्यक्ति और किरदार की बारीकियों को समझा।
वर्ष 1978 में फिल्मी सफर की शुरुआत
नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में फिल्म गमन से हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की। शुरुआती वर्षों में उन्हें छोटे और सहायक किरदार मिले, लेकिन उनकी अभिनय प्रतिभा ने धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया।
नाना पाटेकर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने किसी एक तरह की भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखा। गंभीर और नकारात्मक किरदारों से लेकर हास्य और संवेदनशील भूमिकाओं तक उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
उनकी फिल्मों में संवाद केवल शब्द नहीं होते, बल्कि किरदार की भावनाओं और परिस्थितियों को व्यक्त करने का माध्यम बन जाते हैं। यही कारण है कि कई दशक पुरानी फिल्मों में निभाए गए उनके किरदार आज भी दर्शकों की स्मृतियों में जीवित हैं।

8 अक्टूबर 2026: नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत में शोक
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गोवा में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद हिंदी और मराठी फिल्म जगत के लिए यह एक बड़ी क्षति मानी जा रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की है। हालांकि, मृत्यु के कारण को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में हृदयाघात का उल्लेख है, जबकि परिवार की ओर से प्राकृतिक कारण बताए गए हैं।
‘परिंदा’ ने दिलाई अभिनय की नई पहचान
वर्ष 1989 में रिलीज हुई फिल्म परिंदा नाना पाटेकर के फिल्मी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। विधु विनोद चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने अन्ना नामक अपराध सरगना का किरदार निभाया।
उनके अभिनय में आक्रामकता, मानसिक तनाव और भय का ऐसा मिश्रण देखने को मिला, जिसने दर्शकों और समीक्षकों को प्रभावित किया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘क्रांतिवीर’ के संवादों ने बनाया सुपरस्टार
वर्ष 1994 में रिलीज हुई फिल्म क्रांतिवीर नाना पाटेकर के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल है।
इस फिल्म में उन्होंने प्रताप नारायण तिलक का किरदार निभाया। सामाजिक अन्याय, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक तनाव और व्यवस्था की कमियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले इस किरदार ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
फिल्म में उनकी संवाद अदायगी इतनी प्रभावशाली रही कि प्रताप नारायण तिलक का किरदार भारतीय सिनेमा के चर्चित पात्रों में शामिल हो गया। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘तिरंगा’ से लेकर ‘अब तक छप्पन’ तक दमदार अभिनय
नाना पाटेकर ने वर्ष 1993 में रिलीज हुई फिल्म तिरंगा में ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह का किरदार निभाया। राजकुमार के साथ उनकी अभिनय जुगलबंदी दर्शकों को काफी पसंद आई।
वर्ष 2004 की फिल्म अब तक छप्पन में उन्होंने पुलिस अधिकारी साधु अगाशे का किरदार निभाया। इस फिल्म में उनका संयमित और गंभीर अभिनय विशेष रूप से सराहा गया।
इसके अतिरिक्त अंगार, अग्निसाक्षी, खामोशी: द म्यूजिकल, अपहरण और राजनीति जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी बहुमुखी अभिनय क्षमता का परिचय दिया।
‘वेलकम’ में हास्य अभिनय से जीता दर्शकों का दिल
गंभीर किरदारों के लिए प्रसिद्ध नाना पाटेकर ने वर्ष 2007 में रिलीज हुई फिल्म वेलकम में उदय शेट्टी का किरदार निभाकर अपनी कॉमेडी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
इस फिल्म में अनिल कपूर के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई। दोनों कलाकारों की कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी ने फिल्म को यादगार बना दिया।
वर्ष 2015 में रिलीज हुई वेलकम बैक में भी उन्होंने उदय शेट्टी की भूमिका निभाई।
मराठी सिनेमा में ‘नटसम्राट’ से रचा इतिहास
नाना पाटेकर ने हिंदी फिल्मों के साथ मराठी सिनेमा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वर्ष 2016 में रिलीज हुई फिल्म नटसम्राट में उन्होंने एक बुजुर्ग रंगमंच कलाकार की भूमिका निभाई। यह फिल्म एक ऐसे कलाकार के जीवन की कहानी प्रस्तुत करती है, जो अभिनय की दुनिया में सफलता हासिल करने के बाद पारिवारिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करता है।
इस फिल्म में नाना पाटेकर के भावनात्मक अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से विशेष प्रशंसा मिली।

तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित
नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले।
| वर्ष | पुरस्कार और उपलब्धि |
|---|---|
| 1990 | परिंदा के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार |
| 1995 | क्रांतिवीर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार |
| 1997 | अग्निसाक्षी के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार |
| 2013 | भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान |
इसके अलावा उन्हें कई फिल्मफेयर और अन्य फिल्म पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।
किसानों की सहायता के लिए आगे आए नाना पाटेकर
अभिनय के अतिरिक्त नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे।
वर्ष 2015 में उन्होंने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य महाराष्ट्र में सूखे और आर्थिक संकट से प्रभावित किसानों तथा उनके परिवारों की सहायता करना था।
किसानों की समस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें फिल्मी दुनिया से बाहर भी पहचान दिलाई। उन्होंने कृषि और ग्रामीण जीवन से अपना जुड़ाव बनाए रखा।
2026 तक फिल्मों में सक्रिय रहे नाना पाटेकर
बढ़ती उम्र के बावजूद नाना पाटेकर ने अभिनय से अपना जुड़ाव बनाए रखा। वर्ष 2023 में द वैक्सीन वॉर, वर्ष 2024 में वनवास और वर्ष 2026 में ओ रोमियो तथा सूबेदार जैसी फिल्मों से उनका नाम जुड़ा रहा।
विशाल भारद्वाज निर्देशित ओ रोमियो में भी उनके अभिनय की चर्चा हुई।
भारतीय सिनेमा में हमेशा याद रहेगा योगदान
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर यह दर्शाता है कि एक कलाकार अपनी मेहनत, अनुशासन और अभिनय प्रतिभा के बल पर दर्शकों के बीच स्थायी पहचान बना सकता है।
उन्होंने अपने करियर में ऐसे अनेक किरदार निभाए, जिनमें समाज की वास्तविकता, मानवीय संघर्ष, भावनाएं और जीवन के विभिन्न पहलू दिखाई देते हैं।
उनकी खास संवाद अदायगी, प्रभावशाली आवाज और स्वाभाविक अभिनय शैली ने उन्हें अपने समकालीन कलाकारों से अलग पहचान दिलाई।
नाना पाटेकर का निधन भारतीय फिल्म जगत के लिए एक युग के अंत जैसा है। हालांकि उनकी फिल्मों, किरदारों और अभिनय की विरासत के माध्यम से आने वाली पीढ़ियां भी उनकी कला से परिचित होती रहेंगी।
नाना पाटेकर केवल एक सफल फिल्म अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा में अभिनय की एक विशिष्ट पहचान थे।