पूज्य आचार्य श्री आर्जर्व सागर महामुनिराज
श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में 8 से 15 अक्टूबर तक चलेगा आठ दिवसीय धार्मिक आयोजन, प्रथम दिन ध्वजारोहण, शांतिधारा, गुरु पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने लिया भाग
बड़ौत (बागपत) । जनपद बागपत के बड़ौत नगर में गुरुवार को जैन समाज की आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़े आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य शुभारंभ हुआ। श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी, मंडी बड़ौत के तत्वावधान में अजितनाथ सभागार में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रथम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूज्य आचार्य श्री आर्जवसागर महामुनिराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में प्रारंभ हुए इस आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों, मंत्रोच्चार, शांतिधारा, गुरु पूजन और भक्ति संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। आयोजकों के अनुसार, श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 8 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। आठ दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु जिनेन्द्र भगवान की आराधना, पूजन और विभिन्न धार्मिक क्रियाओं में भाग लेंगे।

ध्वजारोहण और शांतिधारा के साथ हुआ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के प्रथम दिन प्रातःकाल से ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम प्रारंभ हो गया। विधानाचार्य पंडित सनत कुमार जैन एवं पंडित विनोद कुमार जैन के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ धार्मिक क्रियाएं संपन्न कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। ध्वजारोहण करने का सौभाग्य जितेंद्र कुमार सौरभ जैन को प्राप्त हुआ। इसके बाद शांतिधारा का आयोजन किया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य सौधर्म इन्द्र राजेश जैन भारती और श्रीपाल इन्द्र संजय जैन को प्राप्त हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए मंगलकामनाएं कीं।
आचार्य श्री की पूजा के बाद सिद्धचक्र महामंडल विधान की धार्मिक क्रियाएं संपन्न
ध्वजारोहण और शांतिधारा के उपरांत श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री आर्जवसागर महामुनिराज की विधि-विधानपूर्वक पूजा की। इसके बाद विधानाचार्यों के निर्देशन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की धार्मिक क्रियाएं और पूजन संपन्न कराया गया। आयोजन में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भाग लेते हुए जिनेन्द्र भगवान की आराधना की। इस दौरान मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों से अजितनाथ सभागार का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। संतोष कुमार के मधुर भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण

धार्मिक आयोजन में भक्ति संगीत की भी विशेष प्रस्तुति हुई।
संगीतकार संतोष कुमार ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भजनों के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सहभागिता की। धार्मिक संगीत और पूजन के कारण पूरे सभागार में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक परिवारों ने सहभागिता करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ प्राप्त किया।
बड़ौत का दृश्य देखकर चतुर्थकाल की अनुभूति हो रही है : आचार्य आर्जवसागर महाराज
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के प्रथम दिन आचार्य श्री आर्जवसागर महामुनिराज ने श्रद्धालुओं को मंगल प्रवचन दिए। आचार्य श्री ने बड़ौत में श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना और आयोजन की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि बड़ौत नगरी का यह दृश्य देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो चतुर्थकाल का नजारा हो और भगवान महावीर का समवसरण लगा हो। उन्होंने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान जैन धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक आराधनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, संयम, भक्ति और आत्मकल्याण की प्रेरणा मिलती है। आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं से धार्मिक अनुष्ठानों में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ भाग लेने का आह्वान किया।

जिनेन्द्र भगवान की भक्ति से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है : आचार्य श्री
मंगल प्रवचन के दौरान आचार्य आर्जवसागर महाराज ने जिनेन्द्र भगवान की भक्ति और आत्मकल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिनेन्द्र भगवान की सच्ची भक्ति मनुष्य को दुर्गति से बचाने, पुण्य अर्जित करने और मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। आचार्य श्री ने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान आध्यात्मिक लाभ और पुण्य प्राप्ति का पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विधान की आराधना रोग, शोक और दुखों के निवारण की भावना से भी की जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि धार्मिक अनुष्ठानों का वास्तविक महत्व तभी है, जब व्यक्ति अपने जीवन में संयम, सदाचार और आत्मशुद्धि को स्थान दे।
श्रीपाल और मैना सुंदरी के प्रसंग से दिया आध्यात्मिक संदेश
आचार्य श्री आर्जवसागर महाराज ने अपने प्रवचन में जैन धार्मिक परंपरा से जुड़े श्रीपाल और मैना सुंदरी के प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रीपाल तद्भव मोक्षगामी थे और मैना सुंदरी भी मुनि बनकर मोक्ष प्राप्त करेंगी। इस धार्मिक प्रसंग के माध्यम से आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं को भक्ति, कर्म सिद्धांत और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिनेन्द्र भगवान की आराधना व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करती है। ऋषिका दीदी ने कराया गुरु पूजन, महिला संगठन ने समर्पित की पूजन सामग्री

कार्यक्रम में गुरु पूजन ऋषिका दीदी द्वारा संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर श्री स्यादवाद महिला संगठन, मंडी बड़ौत की सदस्यों ने भक्तिभाव के साथ पूजन सामग्री समर्पित की। महिला संगठन की सहभागिता से धार्मिक आयोजन में विशेष उत्साह दिखाई दिया। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य कुबेर इन्द्र लोकेश जैन को प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त जिनवाणी स्थापना का सौभाग्य संजय जैन तथा श्री स्यादवाद महिला संगठन, मंडी को प्राप्त हुआ।
धार्मिक पात्रों की भूमिका में श्रद्धालुओं ने निभाई सहभागिता
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में विभिन्न धार्मिक पात्रों की भूमिका निभाने वाले श्रद्धालुओं ने विशेष सहभागिता की। आयोजन में कुबेर इन्द्र के रूप में सतेंद्र जैन, चक्रवर्ती के रूप में लोकेश जैन, महायज्ञनायक के रूप में सुभाष जैन और यज्ञनायक के रूप में नीरज जैन उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त ईशान इन्द्र अनिल जैन, सानत इन्द्र गौरव जैन और महेंद्र इन्द्र प्रवीण जैन ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। विधान में श्रावक श्रेष्ठी बनने का सौभाग्य राजकुमार जैन जैनसन को प्राप्त हुआ। इन सभी श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में अपनी निर्धारित भूमिकाओं का निर्वहन किया।
मंदिर कमेटी ने संभाली आयोजन की व्यवस्थाएं
आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सफल आयोजन के लिए श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी, मंडी बड़ौत द्वारा विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध भोजन की व्यवस्था मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मुकेश कुमार जैन द्वारा कराई गई। धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन और व्यवस्थाओं में कमेटी के महामंत्री प्रदीप जैन ‘बामनौली वाले’, मीडिया प्रभारी वरदान जैन और कोषाध्यक्ष नवीन जैन ‘बूढ़पुर वाले’ का विशेष सहयोग रहा। इसके अतिरिक्त विधान संयोजक अनिल जैन और संजय जैन सहित अन्य पदाधिकारी एवं समाज के सदस्य आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं।

15 अक्टूबर तक जारी रहेगा सिद्धचक्र महामंडल विधान
श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 15 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। आयोजन के दौरान आचार्य श्री आर्जवसागर महामुनिराज ससंघ के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रथम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता से आयोजकों में उत्साह दिखाई दिया। मंदिर कमेटी ने धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए समाज के सदस्यों और श्रद्धालुओं के सहयोग की सराहना की।
धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक साधना का केंद्र बना अजितनाथ सभागार
बड़ौत के अजितनाथ सभागार में प्रारंभ हुआ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान जैन समाज की धार्मिक आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख आयोजन बन गया है। प्रथम दिन ध्वजारोहण, शांतिधारा, जिनेन्द्र भगवान की पूजा, गुरु पूजन, जिनवाणी स्थापना और आचार्य श्री के मंगल प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण से जोड़े रखा। आचार्य आर्जवसागर महामुनिराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में संयम, भक्ति, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। आयोजकों के अनुसार, आगामी दिनों में भी विधानाचार्यों के निर्देशन में निर्धारित धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। आठ दिवसीय आयोजन का समापन 15 अक्टूबर को होगा।