योग गुरु कर्मवीर का स्वागत करती चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो संगीता शुक्ला
मेरठ। स्वस्थ, निरोग और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय योग शिविर का शुभारंभ सोमवार को योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। शिविर में बड़ी संख्या में योग साधकों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने योग, प्राणायाम और आयुर्वेद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की अधिकांश शारीरिक और मानसिक समस्याओं का समाधान योग में निहित है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण लोग अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। ऐसे समय में योग एक प्रभावी और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आया है, जो न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है बल्कि मन को भी शांत और संतुलित करता है।
योग से मिलती है मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने कहा कि नियमित प्राणायाम और योगाभ्यास से व्यक्ति तनाव, चिंता, अवसाद और क्रोध जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि क्रोधी व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता क्योंकि उसका मन हमेशा अशांत रहता है। योग और ध्यान मन को स्थिरता प्रदान करते हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
उन्होंने योग शिविर में उपस्थित लोगों को विभिन्न प्रकार के प्राणायाम और योगासनों की जानकारी देते हुए उनके स्वास्थ्य लाभ भी बताए। उन्होंने विशेष रूप से सूर्यभेदी एवं चन्द्रभेदी प्राणायाम, कपोत-उज्जायी प्राणायाम, सिद्धासन, पद्मासन और सुखासन के महत्व को समझाया।
थायरॉयड, टॉन्सिल और श्वसन रोगों में लाभकारी योग
योग गुरु ने बताया कि इन योग क्रियाओं और प्राणायामों का नियमित अभ्यास थायरॉयड, गले के रोग, टॉन्सिल और श्वसन तंत्र संबंधी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। उन्होंने कहा कि नजला, जुकाम, खांसी, साइनस और अन्य ईएनटी संबंधी रोगों में भी योग से उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
उन्होंने बताया कि योग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और नियमित अभ्यास व्यक्ति को विभिन्न मौसमी बीमारियों से बचाने में सहायक होता है।
आयुर्वेद और योग का समन्वय स्वास्थ्य की कुंजी
स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने योग के साथ-साथ आयुर्वेद के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग का समन्वय व्यक्ति को पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान कर सकता है। उन्होंने बताया कि त्रिकुटा (काली मिर्च, सौंठ और पीपली) को शहद के साथ सेवन करने से श्वसन तंत्र मजबूत होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि मोटापा, अतिरिक्त चर्बी और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों के नियंत्रण में भी योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है।
पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका
स्वामी जी ने कहा कि अधिकांश रोगों की जड़ पाचन तंत्र की गड़बड़ी होती है। कब्ज, बवासीर और पेट से जुड़ी अनेक समस्याएं आपस में संबंधित हैं। उन्होंने पवनमुक्तासन, चक्की चालन, वज्रासन और वज्रनितम्ब चालन जैसे योगाभ्यासों को पेट, घुटनों, रक्त संचार और शिराओं से संबंधित समस्याओं में लाभकारी बताया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने पशुविश्रामासन और सूक्ष्म व्यायाम को पीठ, कमर तथा जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने वाला बताया।
वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याओं से बचने के लिए अपनाएं सही जीवनशैली
स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने कहा कि लंबे समय तक खड़े रहने या गलत तरीके से बैठने के कारण शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, जिससे वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने लोगों को दैनिक जीवन में सही ढंग से बैठने, उठने और कार्य करने की आदतें विकसित करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है।
भारतीय परंपराओं के संरक्षण का भी संदेश
स्वामी जी ने कहा कि उनकी संस्था गुरुकुलीय शिक्षा, आयुर्वेद, योग और गौ-संरक्षण जैसी भारतीय परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान दें।
योग भारत की अमूल्य धरोहर : डॉ. राजेन्द्र अग्रवाल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और अमूल्य धरोहर है, जिसे आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने कहा कि योग केवल रोगों के उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीने की कला भी सिखाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे योग शिविर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को नशामुक्त और तनावमुक्त जीवन की दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
योग व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का माध्यम : कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संगीता शुक्ला ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक देन है। यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली में योग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। विश्वविद्यालय सदैव ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहेगा, जो समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने में योगदान दें।
हास्यासन, ध्यान और शांति पाठ के साथ हुआ समापन
शिविर के प्रथम दिवस का समापन हास्यासन, ध्यान और शांति पाठ के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के माध्यम से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का अनुभव किया।
इस अवसर पर प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता, प्रो. बीरपाल सिंह, प्रो. आलोक कुमार, प्रो. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. गुलाब सिंह रूहल, डॉ. दुष्यंत चौहान, प्रो. प्रदीप चौधरी, प्रो. प्रशांत कुमार, डॉ. अलका तिवारी, डॉ. वैशाली पाटिल, डॉ. जितेंद्र गोयल, डॉ. ओमपाल सिंह, डॉ. संदीप त्यागी, जगत सिंह दौसा, इंजीनियर मनीष मिश्रा, इंजीनियर मनोज कुमार, प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता, डीपी सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
सात दिवसीय यह योग शिविर आगामी दिनों में भी विभिन्न योग सत्रों, स्वास्थ्य परामर्श एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।