आबादी वाले क्षेत्रों में बंदरों के आतंक से मिलेगी सुरक्षा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बंदरों और लोगों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए राज्य सरकार ने कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बंदरों की आबादी का सर्वे कराया जाएगा, उनके पुनर्वास के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित होंगे और उन्हें पकड़ने, ले जाने तथा छोड़ने की प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई जाएगी। सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों को भोजन देने और खुले में कचरा रखने पर रोक लगाने के लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
यह निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका संख्या 1030/2025—विनीत शर्मा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य—के संबंध में 30 सितंबर 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बैठक की कार्यवाही के अनुसार, बंदर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के दायरे में आते हैं और उनके प्रबंधन में वन विभाग की प्रमुख भूमिका होगी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को इस मामले में नोडल विभाग बनाया गया है।
विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से होगा आबादी का आकलन
बैठक में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से बंदरों की आबादी का सर्वे कराने का अनुरोध करने का निर्णय लिया गया। आबादी प्रबंधन की पद्धति तय करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड जैसे विशेषज्ञ संस्थानों से सलाह ली जाएगी। कार्यवाही में कहा गया है कि बंदरों से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिक आकलन और विशेषज्ञों की राय के आधार पर कदम उठाए जाएं।
पुनर्वास स्थलों की पहचान और फलदार पौधों पर जोर
वन विभाग को जरूरत के अनुसार बंदरों के पुनर्वास के लिए स्थान चुनने और वहां उनके अनुकूल प्राकृतिक पर्यावास विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। शहरी क्षेत्रों में फलदार वृक्षारोपण और ‘कृत्रिम वन’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बंदरों को भोजन और रहने का अनुकूल वातावरण मिल सके। बैठक में बंदरों को पकड़ने, परिवहन करने और छोड़ने के लिए एसओपी तैयार करने का भी निर्णय लिया गया।
कचरा प्रबंधन और बंदरों को भोजन देने पर रोक
नगर विकास विभाग को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मजबूत करने और हॉटस्पॉट पर बंदर-रोधी कूड़ेदान लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों को भोजन देने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई और जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, बाजारों, होटलों और अन्य संस्थानों को भी शामिल करने की बात कही गई है।
जिला स्तर पर बनेगी समन्वय समिति
जिला प्रशासन के सहयोग से जिला स्तर पर अंतरविभागीय समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों के माध्यम से बंदरों के प्रबंधन से जुड़ी कार्रवाई का समन्वय किया जाएगा और संबंधित टीमों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। वन विभाग की टीमों को मौके तक पहुंचने के लिए वाहन, स्थान तक पहुंच और मानवशक्ति सहित आवश्यक लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश भी कार्यवाही में शामिल हैं।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत वन विभाग की जिम्मेदारी
बैठक में बताया गया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में संशोधन के बाद रीसस मकाक (बंदर) को अनुसूची-IV में रखा गया है। अधिनियम के तहत वन्यजीव से संबंधित तलाशी, जब्ती और अभियोजन की कार्रवाई वन्यजीव प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आती है। बैठक की कार्यवाही में यह भी उल्लेख है कि नगर निकायों के कानूनों में किसी वन्यजीव प्रजाति को पकड़ने, बंध्याकरण करने या स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं दिया गया है। इसलिए बंदरों के प्रबंधन में वन विभाग की भूमिका प्रमुख रहेगी।
अदालत के निर्देशों के अनुपालन के लिए विभागों को समन्वय के आदेश
बैठक में मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर ठोस कार्रवाई करने और कार्रवाई की स्थिति से हाईकोर्ट को अवगत कराने के निर्देश दिए। कार्यवाही उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास अनुभाग-8 की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी की गई।