एसटीएफ की गिरफ्त में पीलीभीत में फर्जी फर्मों और ई वे बिल के जरिए करोड़ों की कर चोरी करने वाला आरोपी
पीलीभीत। थाना कोतवाली में दर्ज वर्ष 2023 के एक मुकदमे में वांछित आरोपी अंकुर कांडा को उत्तर प्रदेश एसटीएफ की मेरठ यूनिट ने जयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर फर्जी फर्में बनाकर ई-वे बिल जारी करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित लाभ लेने के लिए कथित तौर पर एक संगठित गिरोह के साथ काम करने का आरोप है। इससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचने की आशंका जताई गई है।
एसटीएफ के प्रेस नोट के मुताबिक, आरोपी की गिरफ्तारी 18 अक्टूबर 2026 को जयपुर के अशोक नगर थाना क्षेत्र स्थित सी-स्कीम इलाके में एक अपार्टमेंट से की गई। कार्रवाई के लिए एसटीएफ टीम ने राजस्थान पुलिस से संपर्क और समन्वय किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पीलीभीत में दर्ज मुकदमे की विवेचना के सिलसिले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित पुलिस के सुपुर्द किया गया।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के अनुसार, पीलीभीत निवासी मोहम्मद फरमान ने 3 जनवरी 2023 को थाना कोतवाली में शिकायत दी थी। फरमान ने बताया था कि पीलीभीत की नवीन मंडी स्थल में ‘फरमान एंड संस’ नाम से उनकी फर्म है, जिसका संचालन वह और उनका परिवार करते हैं। शिकायत के मुताबिक, आयकर विभाग से उन्हें नोटिस प्राप्त हुए, जिनमें उनके पैन से करोड़ों रुपये के कारोबार और लेन-देन का उल्लेख था। फरमान ने ऐसे कारोबार से इनकार किया और आशंका जताई कि उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके फर्जी जीएसटी फर्में बनाई गई हैं।
प्रेस नोट के अनुसार, शिकायत में ‘रायन इंटरनेशनल’ और ‘फुटनेक्स्ट इंटरनेशनल’ नाम की फर्मों का उल्लेख किया गया था। आरोप है कि इन फर्मों को फर्जी या कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत कराया गया और इनके जरिए कारोबार दिखाया गया। बताया गया कि इन फर्मों के जीएसटीआईएन पर दर्ज टर्नओवर का विवरण आयकर विभाग के रिकॉर्ड में भी दिखाई दे रहा था।
जांच स्थानीय पुलिस से एसटीएफ को सौंपी गई
मोहम्मद फरमान की शिकायत के आधार पर पीलीभीत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की थी। एसटीएफ के मुताबिक, घटना का खुलासा न होने पर पुलिस महानिदेशक के आदेश से विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित की गई। एसटीएफ मेरठ यूनिट ने जांच के दौरान दस्तावेजों, फर्मों के पंजीकरण और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। इसी क्रम में आरोपी अंकुर कांडा की तलाश जयपुर तक पहुंची।
बिटुमिन ट्रेडिंग की आड़ में फर्जी बिलिंग का आरोप
एसटीएफ के प्रेस नोट में दावा किया गया है कि आरोपी और उसके साथी पिछले कई वर्षों से ‘एशिया बिटुमिन’ नाम से फर्म बनाकर बिटुमिन ट्रेडिंग का काम करते थे। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह वर्ष 2017-18 में अपने एक साथी के साथ दिल्ली गया था, जहां बिटुमिन ट्रेडिंग से जुड़े कुछ लोगों से उसकी मुलाकात हुई। पुलिस के अनुसार, वहां उसे बताया गया कि कुछ व्यक्तियों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी फर्में बनाई गई हैं।
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि मोहम्मद फरमान के अलावा जौनपुर निवासी आशीष और दिल्ली निवासी मदन के दस्तावेजों के आधार पर भी कथित तौर पर फर्में बनाई गई थीं। आरोप है कि इन फर्मों के नाम पर आईडीबीआई बैंक, यस बैंक और अन्य बैंकों में खाते खोले गए। पुलिस का कहना है कि फर्मों के पंजीकरण का उपयोग बिटुमिन ट्रेडिंग और लेन-देन दिखाने के लिए किया गया।
फर्जी ई-वे बिल से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने का आरोप
एसटीएफ के अनुसार, जांच में सामने आया कि कुछ कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के लिए बिलों की जरूरत होती थी। आरोप है कि आरोपी और उसके साथी फर्जी फर्मों के नाम से ई-वे बिल उपलब्ध कराते थे और उनसे संबंधित रकम बैंक खातों में मंगाते थे। इसके बाद कथित तौर पर कमीशन काटकर शेष धनराशि कारोबारियों को वापस कर दी जाती थी। पुलिस का दावा है कि फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित लाभ लिया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा।
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी ने यह भी बताया कि फर्जी फर्मों से जुड़े बैंक खातों और बिलिंग का इस्तेमाल कथित तौर पर कमीशन के आधार पर किया जाता था। इन आरोपों की पुष्टि और लेन-देन की वास्तविक स्थिति विवेचना में जुटाए जा रहे दस्तावेजों तथा संबंधित विभागों के रिकॉर्ड से तय होगी।
आरोपी पर दर्ज हैं धोखाधड़ी और कूटरचना से जुड़े आरोप
अंकुर कांडा के खिलाफ पीलीभीत कोतवाली में दर्ज मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 467, 468, 471 और 120बी लगाई गई हैं। ये धाराएं धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना, कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित हैं। एसटीएफ के प्रेस नोट के अनुसार, मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।