आईबीएस संवाद कार्यक्रम में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, मुख्य वक्ता सिद्धार्थ चौहान और संस्थान के पदाधिकारी
मेरठ, 28 अक्टूबर 2026। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज (आईबीएस) में ‘आईबीएस संवाद’ श्रृंखला के तहत विद्यार्थियों के लिए विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सफलता, कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता और निरंतर सीखने के महत्व से परिचित कराना था। मुख्य वक्ता के रूप में बिकाजी फूड्स इंटरनेशनल लिमिटेड, गुरुग्राम के जनरल मैनेजर (इमर्जिंग मार्केट्स) सिद्धार्थ चौहान ने विद्यार्थियों के साथ अपने व्यावसायिक अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने किया। इसके संयोजक आईबीएस के सहायक आचार्य डॉ. नीरज चौधरी रहे।
सीखना जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया: कुलपति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने और समय के साथ स्वयं को विकसित करने के लिए निरंतर सीखते रहना जरूरी है। ज्ञान प्राप्ति किसी एक कक्षा, पाठ्यक्रम या डिग्री तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ नया सीखने, अपनी कमियों को पहचानने और अपने ज्ञान एवं क्षमताओं को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “सीखना जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है और मैं आज भी सीख रही हूँ।” उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि व्यक्ति किसी भी पद या मुकाम पर पहुंच जाए, सीखने की जिज्ञासा और स्वयं को बेहतर बनाने की ललक हमेशा बनी रहनी चाहिए।
प्रो. शुक्ला ने विद्यार्थियों से अकादमिक उपलब्धियों के साथ अपने व्यक्तित्व, संवाद कौशल, व्यावहारिक समझ और निर्णय क्षमता को भी विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में वही युवा आगे बढ़ेंगे, जो नए विचारों को स्वीकार करेंगे, परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालेंगे और अपने ज्ञान को व्यवहार में लागू कर सकेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और हर अनुभव को सीखने के अवसर के रूप में देखने की प्रेरणा दी।
सफल करियर के छह प्रमुख स्तंभ बताए
मुख्य वक्ता सिद्धार्थ चौहान ने कहा कि करियर का सफर हमेशा सीधी राह पर आगे नहीं बढ़ता। इसमें चुनौतियां, अप्रत्याशित बदलाव, असफलताएं और नए अवसर आते रहते हैं। ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना, परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालना और लगातार प्रयास करते रहना व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि सफलता केवल लक्ष्य तय करने से नहीं मिलती; इसके लिए स्पष्ट सोच, सही निर्णय, निरंतर मेहनत और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।
चौहान ने सफल प्रबंधन और करियर निर्माण के छह प्रमुख स्तंभों पर विस्तार से चर्चा की। इनमें विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता बनाए रखना (Resilience), निरंतर सीखना (Learning), अपने करियर की जिम्मेदारी स्वयं लेना (Ownership of Your Career), योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना (Execution), मजबूत व्यावसायिक संबंध विकसित करना (Relationships) और अपने प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध रहना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन गुणों से युवाओं को रोजगार हासिल करने के साथ-साथ कार्यक्षेत्र में अपनी पहचान बनाने और दीर्घकालिक सफलता पाने में मदद मिलती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि करियर की दिशा तय करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमताओं, रुचियों और उपलब्ध अवसरों को पहचानकर स्वयं पहल करें। केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है; विचारों को कार्यरूप में बदलना और परिणाम मिलने तक निरंतर प्रयास करना भी जरूरी है।
संवाद, अनुकूलनशीलता और आत्मविश्वास पर जोर
सिद्धार्थ चौहान ने विद्यार्थियों को प्रभावी संवाद, उपलब्धि-उन्मुख सोच, प्रामाणिकता और अनुकूलनशीलता विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने विचार आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना सीखना चाहिए। भाषा को सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए; अपनी बात स्पष्टता और आत्मविश्वास से रखना अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रबंधन के व्यावहारिक स्वरूप को समझाते हुए उन्होंने कहा, “मैनेजमेंट केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास और व्यवहार में उतारने की प्रक्रिया है।” उन्होंने बताया कि प्रबंधन की शिक्षा का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि नेतृत्व, समस्या समाधान, टीमवर्क, निर्णय क्षमता और कार्य निष्पादन जैसे गुणों को व्यवहार में अपनाना है। उनके अनुसार, सफलता के लिए व्यक्ति को अपने प्रयासों के प्रति ईमानदार, लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध और बदलती परिस्थितियों के प्रति सजग रहना चाहिए।
उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करें युवा: डॉ. अंशु चौधरी
आईबीएस की उपनिदेशक डॉ. अंशु चौधरी ने कहा कि रोजगार से जुड़ी चुनौतियों को केवल बेरोजगारी के नजरिये से देखना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि उद्योगों की अपेक्षाओं और युवाओं के पास उपलब्ध कौशल के बीच कितना अंतर है। आज उद्योग जगत को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जिनके पास अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ, प्रभावी संवाद क्षमता, समस्या समाधान का कौशल और जिम्मेदारी से काम करने की योग्यता हो।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यावहारिक दक्षताएं मजबूत करने और उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. चौधरी ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने समय और अवसरों का सदुपयोग करते हुए ऐसी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए, जिनसे वे कार्यक्षेत्र में प्रभावी योगदान दे सकें। उन्होंने जोर दिया कि आज किया गया परिश्रम और कौशल विकास भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की तैयारी है।
अकादमिक ज्ञान और उद्योग के अनुभवों के बीच सेतु है ‘आईबीएस संवाद’
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग जगत के अनुभवी पेशेवरों के अनुभवों से जोड़ना, उनकी प्रबंधकीय दक्षताओं को विकसित करना और भविष्य की व्यावसायिक चुनौतियों के लिए तैयार करना था। ‘आईबीएस संवाद’ श्रृंखला अकादमिक ज्ञान और उद्योग जगत के व्यावहारिक अनुभवों के बीच सेतु स्थापित करने की पहल है।
ऐसे संवाद विद्यार्थियों को करियर की वास्तविक चुनौतियों को समझने, उद्योगों की अपेक्षाओं से परिचित होने और अपने व्यावसायिक लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से तय करने का अवसर देते हैं। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि सफलता के लिए निरंतर सीखना, समय के अनुरूप कौशल विकसित करना, चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करना और अपने करियर की जिम्मेदारी स्वयं लेना आवश्यक है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को ज्ञान को व्यवहार में बदलने, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और अपने भविष्य के निर्माण के लिए लगातार प्रयास करने की प्रेरणा दी।