नसों के रोग: कारण, लक्षण, जांच और उपचार की पूरी जानकारी
बच्चों, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों में तंत्रिका तथा खून की नसों की समस्याएं अलग-अलग कारणों से हो सकती हैं। सही इलाज के लिए पहले यह पता करना जरूरी है कि समस्या दिमाग, रीढ़, शरीर की तंत्रिकाओं, धमनियों या शिराओं में है।
“नस” से क्या मतलब है?
आम बोलचाल में “नस” शब्द दो अलग चीजों के लिए इस्तेमाल होता है:
- तंत्रिका या नर्व: ये दिमाग और रीढ़ की हड्डी से शरीर के अंगों तक संदेश पहुंचाती हैं। इनके रोगों का इलाज सामान्यतः न्यूरोलॉजिस्ट करते हैं; कुछ स्थितियों में न्यूरोसर्जन की जरूरत होती है।
- खून की नली: धमनियां दिल से खून शरीर तक ले जाती हैं और शिराएं खून वापस दिल तक पहुंचाती हैं। वैरिकोज वेन्स, डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) और धमनी में रुकावट इसी श्रेणी में आते हैं। इनके लिए रोग के अनुसार फिजिशियन, वैस्कुलर सर्जन या अन्य विशेषज्ञ की जरूरत पड़ सकती है।
सुन्नपन, झनझनाहट या जलन को “नसों की कमजोरी” कह देना पर्याप्त निदान नहीं है। मधुमेह, विटामिन की कमी, नस दबना, चोट और कई दूसरी स्थितियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं।
तंत्रिका तंत्र के प्रमुख रोग
- परिधीय न्यूरोपैथी
इसमें हाथ-पैरों और शरीर की अन्य परिधीय तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं। मधुमेह एक आम कारण है; विटामिन B12 की कमी, किडनी या थायरॉइड की बीमारी, शराब, कुछ संक्रमण, कैंसर की दवाएं, चोट और प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी बीमारियां भी कारण हो सकती हैं। कुछ मामलों में कारण जांच के बाद भी स्पष्ट नहीं होता।
संभावित लक्षण:
- पैरों या हथेलियों में झनझनाहट, जलन, चुभन या सुन्नपन
- छूने या गर्म-ठंडा महसूस करने की क्षमता कम होना
- मांसपेशियों में कमजोरी, पैर घसीटना या संतुलन बिगड़ना
- पैरों में घाव हो जाना और उनका पता देर से चलना
- कुछ मरीजों में पसीना, रक्तचाप, पाचन या पेशाब से जुड़ी दिक्कतें

- नस दबना और रीढ़ से जुड़ा दर्द
कमर या गर्दन की डिस्क, रीढ़ की हड्डी के आसपास जगह कम होना, चोट या लंबे समय तक एक ही मुद्रा में काम करने से नस पर दबाव पड़ सकता है। दर्द कमर से पैर तक या गर्दन से हाथ तक फैल सकता है; साथ में झनझनाहट या कमजोरी भी हो सकती है। अचानक कमजोरी, चलने में तेजी से गिरावट, या पेशाब-पाखाने पर नियंत्रण में बदलाव हो तो इसे तुरंत दिखाना चाहिए।
- कार्पल टनल सिंड्रोम
कलाई में एक तंत्रिका दबने पर अंगूठे, तर्जनी और बीच की उंगली में झनझनाहट, रात में सुन्नपन, पकड़ कमजोर होना या चीजें हाथ से छूटना हो सकता है। लगातार हाथ से दोहराव वाला काम, गर्भावस्था, मधुमेह और थायरॉइड की समस्या जोखिम बढ़ा सकते हैं।
- गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS)
यह अपेक्षाकृत दुर्लभ स्थिति है जिसमें प्रतिरक्षा तंत्र परिधीय तंत्रिकाओं पर हमला करता है। पैरों से शुरू होकर बढ़ती कमजोरी, चलने में कठिनाई और कभी-कभी हाथ, चेहरे, निगलने या सांस लेने की मांसपेशियों पर असर हो सकता है। तेजी से बढ़ती कमजोरी या सांस में दिक्कत आपात स्थिति है। इसका इलाज अस्पताल में विशेषज्ञ निगरानी, जरूरत के अनुसार IVIG या प्लाज्मा एक्सचेंज तथा श्वसन सहायता से किया जाता है।
- मिर्गी
मिर्गी में बार-बार दौरे पड़ सकते हैं; हर दौरा पूरे शरीर के झटकों जैसा नहीं होता। कुछ दौरों में व्यक्ति कुछ समय के लिए जवाब देना बंद कर सकता है, खाली निगाह से देखने लगता है, असामान्य हरकतें करता है या बाद में भ्रमित रहता है। एक बार दौरा पड़ना अपने-आप में मिर्गी की पुष्टि नहीं करता। डॉक्टर कारण और जांच के आधार पर निदान करते हैं। उचित निदान और दवा से बहुत से मरीजों में दौरे नियंत्रित हो सकते हैं।
दौरे के दौरान व्यक्ति को सुरक्षित करवट पर लिटाएं, आसपास की कठोर चीजें हटाएं और समय देखें। मुंह में चम्मच, उंगली या पानी न डालें और शरीर को जोर से न पकड़ें। दौरा पांच मिनट से अधिक चले, बार-बार आए, पहली बार पड़ा हो या सांस में समस्या हो तो आपात मदद लें।
- स्ट्रोक
स्ट्रोक दिमाग की किसी रक्त-नली में रुकावट या रक्तस्राव से होता है। चेहरे का एक ओर झुकना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने या समझने में दिक्कत, अचानक दृष्टि या संतुलन बिगड़ना इसके संकेत हो सकते हैं। लक्षण थोड़ी देर में ठीक हो जाएं तब भी जांच जरूरी है—यह TIA यानी अस्थायी चेतावनी संकेत हो सकता है।
अचानक शुरू हुए लक्षणों में तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं। समय नोट करें और मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल न भेजें। स्ट्रोक के कुछ इलाज सीमित समय में ही दिए जा सकते हैं; अस्पताल में CT/MRI और डॉक्टर की जांच के बाद निर्णय होता है। WHO उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वस्थ आहार को जोखिम कारकों में गिनता है।

- अन्य तंत्रिका रोग
पार्किंसन रोग में हाथ कांपना, चाल धीमी होना और शरीर अकड़ना हो सकता है। मल्टीपल स्क्लेरोसिस, मायस्थीनिया ग्रेविस, मोटर न्यूरॉन रोग, डिमेंशिया, मस्तिष्क या रीढ़ के संक्रमण और चोट भी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इनके लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए स्वयं निदान न करें।
बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में क्या अलग हो सकता है?
- बच्चों में: जन्मजात या आनुवंशिक स्थितियां, विकास में देरी, मिर्गी, संक्रमण, चोट और कुछ चयापचय संबंधी रोग कारण हो सकते हैं। अचानक कमजोरी, पहले सीखे कौशल खोना, बार-बार दौरे या चलने-बोलने में पिछड़ना बाल रोग विशेषज्ञ या बाल न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाने के संकेत हैं। बुखार के साथ दौरा पड़ने पर उम्र और परिस्थिति के अनुसार जांच जरूरी होती है।
- युवाओं में: खेल या सड़क दुर्घटना की चोट, रीढ़/कलाई पर दबाव, नींद और भोजन की गड़बड़ी, मधुमेह, विटामिन की कमी, संक्रमण या प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी बीमारी संभव कारण हैं।
- महिलाओं में: गर्भावस्था में कलाई की नस दबने से हाथ सुन्न हो सकता है; गर्भावस्था और प्रसव के बाद खून के थक्के का जोखिम भी बदलता है। अचानक एक पैर में सूजन या सांस फूलना नजरअंदाज न करें। गर्भावस्था में कोई भी दवा डॉक्टर से पूछकर लें।
- पुरुषों और महिलाओं दोनों में: मधुमेह, रक्तचाप, धूम्रपान, शराब, किडनी/थायरॉइड रोग, पोषण की कमी और कुछ दवाएं तंत्रिका समस्याओं का जोखिम बढ़ाती हैं।
- बुजुर्गों में: स्ट्रोक, मधुमेह से न्यूरोपैथी, रीढ़ की समस्या, पार्किंसन और याददाश्त से जुड़े रोग अधिक दिख सकते हैं। गिरना, अचानक भ्रम, कमजोरी या चाल में बदलाव का मूल्यांकन कराना चाहिए।
ये सामान्य जोखिम हैं, किसी व्यक्ति के लक्षणों का निश्चित कारण नहीं।
खून की नसों के आम रोग
वैरिकोज वेन्स
पैरों की सतही शिराएं उभरी, टेढ़ी या नीली दिख सकती हैं। भारीपन, दर्द, खुजली, सूजन या लंबे समय तक खड़े रहने पर परेशानी बढ़ सकती है। डॉक्टर जांच के बाद व्यायाम, पैर ऊंचा रखने, उपयुक्त मरीजों में कम्प्रेशन स्टॉकिंग और जरूरत होने पर लेजर/रेडियोफ्रीक्वेंसी या अन्य प्रक्रिया सुझा सकते हैं। स्टॉकिंग हर मरीज के लिए सही नहीं होती—विशेषकर धमनी में खून के प्रवाह की समस्या में पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT)
पैर की गहरी शिरा में खून का थक्का बनने पर अक्सर एक पैर में दर्द, सूजन, गर्माहट या रंग बदलना हो सकता है। हाल में ऑपरेशन, लंबी यात्रा या बिस्तर पर रहना, कैंसर, गर्भावस्था और पहले थक्का होना जोखिम बढ़ा सकते हैं। एक पैर की अचानक सूजन-दर्द पर उसी दिन तत्काल चिकित्सा जांच कराएं। पैर की मालिश न करें और खुद से खून पतला करने की दवा न लें।
यदि साथ में अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द, खून वाली खांसी या बेहोशी हो तो फेफड़े में थक्का जाने का खतरा हो सकता है—तुरंत आपातकालीन सेवा लें। DVT की पुष्टि और उपचार चिकित्सकीय जांच से होता है।

धमनियों में संकुचन
पैरों की धमनियों में खून कम पहुंचने पर चलने में पिंडली दर्द, पैर ठंडा रहना, घाव देर से भरना या पैर की उंगली का रंग बदलना हो सकता है। मधुमेह, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल प्रमुख जोखिम हैं। अचानक तेज दर्द, पैर ठंडा/पीला होना या नाड़ी महसूस न होना आपात स्थिति है।
जांच कैसे होती है?
डॉक्टर उम्र, शुरुआत, लक्षणों की जगह, कमजोरी/सुन्नपन, पुरानी बीमारियों और दवाओं के बारे में पूछेंगे। जरूरत के अनुसार:
- शारीरिक और तंत्रिका तंत्र की जांच
- रक्त शर्करा/HbA1c, विटामिन B12, थायरॉइड, किडनी और अन्य रक्त जांच
- MRI या CT—दिमाग/रीढ़ की विशेष स्थितियों में
- EMG और nerve conduction study—तंत्रिका व मांसपेशियों के संकेत जांचने के लिए
- EEG—कुछ प्रकार के दौरों की जांच में
- अल्ट्रासाउंड/Doppler—खून की नसों में प्रवाह या थक्के की आशंका में
हर मरीज को हर जांच की जरूरत नहीं होती। जांच का चुनाव लक्षण देखकर किया जाता है।
इलाज किस तरह किया जाता है?
इलाज रोग के कारण पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए:
- मधुमेह, थायरॉइड, B12 की कमी या दूसरी मूल बीमारी का नियंत्रण
- नस पर दबाव में फिजियोथेरेपी, गतिविधि में बदलाव, स्प्लिंट या चुने हुए मामलों में सर्जरी
- नस के दर्द में डॉक्टर द्वारा चुनी गई दवाएं—जैसे कुछ मरीजों में duloxetine, gabapentin, pregabalin या amitriptyline
- स्ट्रोक में तत्काल इमेजिंग और समय-निर्भर उपचार; बाद में फिजियोथेरेपी, बोलने/निगलने की थेरेपी और पुनर्वास
- मिर्गी में कारण और दौरे के प्रकार के अनुसार नियमित दवा
- DVT में डॉक्टर की देखरेख में रक्त का थक्का रोकने/घोलने की चिकित्सा
- चोट या दबाव के कारण संरचनात्मक समस्या में कभी-कभी ऑपरेशन
ये दवाओं के उदाहरण हैं, आपके लिए पर्चा नहीं। इन्हें खुद से शुरू, बंद या किसी और की दवा देखकर न लें। नस के दर्द में साधारण दर्दनिवारक हमेशा प्रभावी नहीं होते, और नींद, चक्कर, गिरने या अन्य दवाओं से प्रतिक्रिया का जोखिम हो सकता है।
आयुर्वेद और होम्योपैथी के बारे में
आयुर्वेद: योग, हल्का व्यायाम, नींद, संतुलित भोजन और तनाव कम करने जैसी सहायक आदतें सामान्य स्वास्थ्य व पुनर्वास में मदद कर सकती हैं। लेकिन स्ट्रोक, GBS, मिर्गी, DVT, नस दबने या मधुमेहजनित न्यूरोपैथी को केवल घरेलू या आयुर्वेदिक उपायों से ठीक करने का दावा प्रमाणित इलाज का विकल्प नहीं है। कुछ आयुर्वेदिक उत्पादों की गुणवत्ता और दवाओं के साथ उनकी प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है; डॉक्टर को अपने सभी उत्पादों की जानकारी दें। भारी धातुओं से दूषित कुछ उत्पादों के नुकसान की रिपोर्ट भी हुई है।
होम्योपैथी: तंत्रिका रोगों को ठीक करने के लिए होम्योपैथी की प्रभावशीलता का भरोसेमंद वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसे आजमाने के कारण स्ट्रोक, दौरे, बढ़ती कमजोरी या खून के थक्के के इलाज में देर न करें।
भारत में सरकारी इलाज कहां मिल सकता है?
शुरुआत के लिए अपने जिले के जिला अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज या नजदीकी सरकारी अस्पताल के मेडिसिन/न्यूरोलॉजी OPD में जाएं। वहां न्यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध न हो तो फिजिशियन प्रारंभिक जांच कर उच्च केंद्र को रेफर कर सकता है। सभी जिला अस्पतालों में न्यूरोलॉजिस्ट, MRI, EMG या स्ट्रोक यूनिट उपलब्ध हो—यह मानकर न चलें। OPD दिन, रेफरल नियम, जांच और बेड की उपलब्धता फोन या अस्पताल की आधिकारिक वेबसाइट से पहले जांचें।
उदाहरण के लिए, सरकारी/सार्वजनिक तृतीयक केंद्रों में:
- दिल्ली: AIIMS, नई दिल्ली—न्यूरोलॉजी, स्ट्रोक, मिर्गी और न्यूरो-मस्कुलर रोगों की सेवाएं।
- बेंगलुरु: NIMHANS—न्यूरोलॉजी OPD, 24 घंटे की न्यूरोलॉजी इमरजेंसी और न्यूरोपैथी, स्ट्रोक, बाल-न्यूरोलॉजी सहित विशेष क्लीनिक।
- चंडीगढ़: PGIMER—न्यूरोलॉजी OPD और उन्नत न्यूरोसाइंस सेवाएं।
- पुडुचेरी: JIPMER—स्ट्रोक, मिर्गी और न्यूरो-मस्कुलर क्लीनिक तथा न्यूरो-इंटेंसिव केयर।
- अन्य क्षेत्रीय उदाहरण: AIIMS ऋषिकेश और PMSSY के तहत AIIMS भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना और रायपुर जैसे केंद्र। उपलब्ध सेवाएं और OPD प्रक्रिया अस्पताल से पुष्टि करें।
सरकार के मार्च 2026 के विवरण के अनुसार, NP-NCD कार्यक्रम के अंतर्गत 770 जिला NCD क्लीनिक, 479 जिला डे-केयर केंद्र और 6,410 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में NCD क्लीनिक स्थापित किए गए थे। इस कार्यक्रम में स्ट्रोक समेत कई गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, जांच, रेफरल और उपचार सहायता शामिल है। ये आंकड़े न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ वाले अस्पतालों की संख्या नहीं बताते; हर केंद्र में स्ट्रोक का विशेषज्ञ इलाज या सभी जांच उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं।
तुरंत अस्पताल कब जाएं?
- चेहरा टेढ़ा होना, अचानक हाथ-पैर कमजोर होना या बोलने में दिक्कत
- सांस लेने/निगलने में परेशानी या तेजी से बढ़ती कमजोरी
- दौरा पांच मिनट से अधिक चलना या बार-बार दौरे पड़ना
- अचानक अत्यंत तेज सिरदर्द, बेहोशी या भ्रम
- एक पैर में अचानक सूजन-दर्द के साथ सांस फूलना या सीने में दर्द
- चोट के बाद हाथ-पैर में कमजोरी या पेशाब-पाखाने पर नियंत्रण घटना
ऐसी स्थिति में स्थानीय एम्बुलेंस/आपात सेवा से संपर्क करें—भारत में 112 या उपलब्ध 108 सेवा का उपयोग किया जा सकता है। मरीज को घरेलू उपचार, मालिश या वैकल्पिक दवा के इंतजार में न रखें।
बचाव और रोजमर्रा की सावधानी
मधुमेह और रक्तचाप की नियमित जांच कराएं, धूम्रपान से बचें, डॉक्टर की सलाह से नियमित गतिविधि करें, संतुलित भोजन लें और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में न बैठें। मधुमेह या सुन्न पैरों में रोज पैर और तलवे देखें, आरामदायक जूते पहनें और घाव दिखे तो जल्दी उपचार लें। अचानक लक्षण शुरू हों तो समय नोट करें—स्ट्रोक में यह जानकारी इलाज के फैसले के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है