मेरठ अन्दोलनकरी दस्तावेज लेखक संघ व अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर थाली बजाते
मेरठ। ई-रजिस्ट्री एवं पेपरलेस व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखक, अधिवक्तागण और स्टाम्प विक्रेताओं ने संयुक्त रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान ई-रजिस्ट्री प्रणाली में कई गंभीर खामियां हैं, जिनके कारण आम जनता की संपत्तियां, बैंक खाते और निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती हैं। हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “हमारी मांगें पूरी करो”, “ई-रजिस्ट्री बंद करो” और “पेपरलेस व्यवस्था समाप्त करो” जैसे नारे लगाकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया।
हड़ताल कर रहे दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता एवं स्टाम्प विक्रेताओं का कहना है कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को जनता के हित में लागू बताया जा रहा है, लेकिन व्यवहारिक रूप से यह व्यवस्था फर्जीवाड़े और साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकती है। उनका आरोप है कि इस प्रणाली के कारण आम लोगों की वर्षों की मेहनत से अर्जित संपत्तियां भी असुरक्षित हो सकती हैं।
फर्जी रजिस्ट्री के जरिए संपत्ति पर कब्जे का खतरा
प्रदर्शनकारियों के अनुसार ई-रजिस्ट्री प्रणाली में सबसे बड़ा खतरा फर्जी रजिस्ट्री का है। उनका कहना है कि शातिर जालसाज किसी व्यक्ति की पहचान बदलकर या फर्जी दस्तावेज तैयार करके जमीन अथवा मकान की रजिस्ट्री अपने नाम या किसी अन्य व्यक्ति के नाम करा सकते हैं। ऐसी स्थिति में असली मालिक को अपनी संपत्ति बचाने के लिए वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
बायोमेट्रिक और आधार डाटा के दुरुपयोग की आशंका
हड़ताल कर रहे लोगों ने यह भी आशंका जताई कि ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, आधार विवरण और बायोमेट्रिक डाटा के दुरुपयोग की संभावना बढ़ सकती है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लग जाती है तो उसका उपयोग आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के माध्यम से बैंक खातों से धन निकासी के लिए किया जा सकता है, जिससे आम जनता को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कम मूल्यांकन दिखाकर हो सकता है राजस्व नुकसान
विरोध कर रहे अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का कहना है कि ई-रजिस्ट्री प्रणाली में संपत्तियों का वास्तविक मूल्य छिपाकर कम कीमत दर्शाने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ भविष्य में आयकर विभाग अथवा राजस्व विभाग की जांच के दौरान खरीदार और विक्रेता दोनों कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माने का सामना कर सकते हैं।
एक ही संपत्ति कई लोगों को बेचने का खतरा
हड़तालकारियों ने दावा किया कि तकनीकी खामियों और फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक ही संपत्ति को कई व्यक्तियों के नाम बेचे जाने की आशंका भी बढ़ जाती है। उनके अनुसार यदि ऐसे मामलों में समय रहते जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आ सकते हैं और आम लोग अपनी जमा पूंजी गंवा सकते हैं।
सरकार से व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग
दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता और स्टाम्प विक्रेताओं ने सरकार से मांग की है कि ई-रजिस्ट्री एवं पेपरलेस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर इसकी कमियों की विस्तृत समीक्षा कराई जाए। उनका कहना है कि जब तक जनता के हितों और संपत्तियों की सुरक्षा की पूर्ण गारंटी नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी तकनीकी सुधार के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था के खिलाफ है जो आम जनता को आर्थिक और कानूनी जोखिम में डाल सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।