चर्मशोधक इकाइयों की सील हटाए जाने की मांग को लेकर दिल्ली स्थित एनसीएससी के अध्यक्ष किशोर मकवाना को ज्ञापन देते शोषित क्रांति दल के अध्यक्ष रविकांत
मेरठ। मेरठ के गांव डूंगर स्थित दलित समाज की चर्मशोधन (टेनरी) इकाइयों पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी मेरठ तथा जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) के निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है तथा समय पर जवाब न देने की स्थिति में सम्मन जारी किए जाने की चेतावनी भी दी है।
जानकारी के अनुसार, गत 21 मई को मेरठ में दलित समाज पर बढ़ते अत्याचारों और गांव डूंगर के चर्मशोधकों की समस्या को लेकर शोषित क्रांति दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत के नेतृत्व में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना से मुलाकात कर एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रशासनिक कार्रवाई के कारण सैकड़ों दलित परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है।
शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने बताया कि गांव डूंगर में दलित समाज के लोग पीढ़ियों से चर्मशोधन का कार्य करते आ रहे हैं। प्रदेश सरकार के अधीन जिला ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा इन परिवारों को चर्मशोधन इकाइयां उपलब्ध कराई गई थीं, जिनका वैध अनुबंध 17 जून 2034 तक प्रभावी है। इसके बावजूद 13 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के इन इकाइयों को सील कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने चर्मशोधकों को अपने कच्चे माल और तैयार माल को हटाने या निस्तारित करने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया। परिणामस्वरूप लाखों रुपये मूल्य का कच्चा माल खराब होकर नष्ट हो गया। इससे जुड़े लगभग डेढ़ सौ परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है और कई परिवार भुखमरी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
रविकांत ने कहा कि यह कार्रवाई अन्यायपूर्ण है और दलित समाज के लोगों के साथ अत्याचार की श्रेणी में आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन परिवारों की आजीविका पूरी तरह चर्मशोधन कार्य पर निर्भर थी, उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के रोजगार से वंचित कर दिया गया।
शोषित क्रांति दल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से मांग की थी कि मेरठ प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि चर्मशोधन इकाइयों से लगाई गई सील हटाई जाए तथा प्रभावित परिवारों को पुनः अपना व्यवसाय संचालित करने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जिलाधिकारी मेरठ और डीआरडीए निदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग की ओर से जारी नोटिस के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन के जवाब और आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि आयोग को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जा सकता है।
इस प्रकरण ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई, आजीविका के अधिकार और अनुसूचित जाति समुदाय के आर्थिक हितों की सुरक्षा को लेकर बहस को तेज कर दिया है।