मेरठ की सत्ता परिवर्तन रैली से पहले गरमाई राजनीति, चंद्रशेखर आजाद समेत कई नेताओं को घरों में रोके जाने का आरोप
मेरठ/बिजनौर। मेरठ में 5 जून को प्रस्तावित सत्ता परिवर्तन रैली से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा उनके घरों में ही रोके जाने के आरोपों के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रशासन द्वारा रैली और सत्ता परिवर्तन यात्रा को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जानकारी के अनुसार, आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर आजाद को भी बिजनौर स्थित उनके आवास पर पुलिस निगरानी में रखा गया है। पार्टी के अनुसार 4 जून से सत्ता परिवर्तन यात्रा की शुरुआत होनी थी, जो बिजनौर से विभिन्न जनपदों से गुजरते हुए 5 जून को मेरठ पहुंचने वाली थी। यात्रा को लेकर संगठन की ओर से पिछले कई दिनों से व्यापक तैयारियां की जा रही थीं।
पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि करीब 15 दिनों से यात्रा को सफल बनाने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा था। मेरठ के शेरगढ़ी समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ता लगातार लोगों से संपर्क कर रैली में भागीदारी सुनिश्चित करने में जुटे थे। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संगठनात्मक बैठकें और प्रचार अभियान भी चलाए जा रहे थे।
इसी बीच यात्रा शुरू होने से ठीक पहले कई पदाधिकारियों और समर्थकों को उनके घरों में रोक दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को बाहर निकलने से मना कर दिया, जिससे संगठन में नाराजगी का माहौल है। समर्थकों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित कार्यक्रमों को रोकना उचित नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सांसद चंद्रशेखर आजाद का एक वीडियो संदेश भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने प्रशासन और सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो दिन पहले मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान ही यात्रा को रोकने के निर्देश दिए गए थे और उसी के आधार पर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।
वीडियो संदेश में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि उन्हें अपने समर्थकों और आम जनता के बीच जाने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो वह इस पूरे मामले पर बड़ा निर्णय लेने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल करते हुए कहा कि यदि एक निर्वाचित सांसद को जनता से मिलने और लोकतांत्रिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका जा रहा है, तो उन्हें प्रदान की गई सुरक्षा का औचित्य क्या रह जाता है।
चंद्रशेखर आजाद ने यह भी कहा कि यदि परिस्थितियां इसी प्रकार बनी रहती हैं तो वह अपनी सरकारी सुरक्षा छोड़ने तक का फैसला कर सकते हैं। उनके इस बयान के बाद समर्थकों और कार्यकर्ताओं में भी आक्रोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में समर्थक उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दे रहे हैं और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मेरठ में प्रस्तावित सत्ता परिवर्तन रैली और उससे पहले उत्पन्न हुए इस विवाद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और 5 जून को प्रस्तावित रैली की स्थिति पर टिकी हुई है।
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।