शिक्षक दिवस पर गुरुओं को किया गया सम्मानित
मवाना के मदर इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस समारोह, शिक्षकों को शॉल, दुपट्टा, पगड़ी और तुलसी का पौधा देकर किया सम्मानित
मेरठ/मवाना | शिक्षक दिवस के अवसर पर मवाना में मेरठ रोड स्थित मदर इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षकों के योगदान को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की 17 अध्यापिकाओं को शॉल, दुपट्टा एवं पगड़ी पहनाकर तथा तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि गुरु का सम्मान केवल एक शिक्षक का सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव, चारित्रिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का प्रतीक है।
शिक्षक देश के भविष्य के निर्माता
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं। शिक्षक स्वयं कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हुए विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान और संस्कार का प्रकाश फैलाता है। जिस प्रकार दीपक स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी देता है, उसी प्रकार शिक्षक भी अपने ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वक्ताओं ने कहा कि किसी विद्यार्थी को जीवन में ऊंचे मुकाम पर पहुंचते देख शिक्षक को जो आत्मिक संतोष और खुशी मिलती है, उसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा प्रदान करता है और उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
‘गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर’ का किया गया उच्चारण
कार्यक्रम के दौरान गुरु की महिमा का उल्लेख करते हुए ‘गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात परब्रह्म’ मंत्र का उच्चारण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव सर्वोच्च सम्मान प्राप्त रहा है। उन्होंने कहा कि माता किसी भी बच्चे की पहली शिक्षिका होती हैं और बच्चे के प्रारंभिक संस्कारों में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन विद्यालय और समाज के स्तर पर बच्चे के चारित्रिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को केवल किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी देता है।
कुंभकार के समान होता है शिक्षक का कार्य
वक्ताओं ने शिक्षक की भूमिका की तुलना कुंभकार से करते हुए कहा कि जिस प्रकार कुंभकार मिट्टी को आकार देकर एक सुंदर और उपयोगी घड़े का निर्माण करता है, उसी प्रकार शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व को ज्ञान, अनुशासन और संस्कारों से आकार देता है। उन्होंने कहा कि कुंभकार मिट्टी को बार-बार परखकर उसमें मौजूद कमियों को दूर करता है और उसे सही रूप प्रदान करता है। उसी तरह शिक्षक भी विद्यार्थी की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है और उसकी प्रतिभा को निखारता है। विद्यार्थी के सफल होने पर शिक्षक को जो संतुष्टि मिलती है, वह उसके पूरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होती है।
शिक्षा समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत माध्यम
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और देश के निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है। शिक्षक विद्यार्थियों के ज्ञान को विकसित करने के साथ-साथ उनमें समरसता, भाईचारा, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षक समाज में व्याप्त अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान और जागरूकता का प्रकाश फैलाता है। एक शिक्षित और संस्कारित पीढ़ी ही देश को विकास के नए आयामों तक ले जाने में सक्षम होती है।
सोशल मीडिया भी ज्ञान के प्रसार का प्रभावी माध्यम
कार्यक्रम में सोशल मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया ज्ञान और जागरूकता के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। बच्चों और युवाओं तक विभिन्न विषयों की जानकारी तेजी से पहुंचाने में डिजिटल माध्यमों की अहम भूमिका है। वक्ताओं ने सोशल मीडिया को एक ऐसे माध्यम के रूप में बताया, जिसके जरिए विद्यार्थी और आमजन विभिन्न विषयों से जुड़ी जानकारी तत्काल प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने इसके सकारात्मक और ज्ञानवर्धक उपयोग पर जोर दिया।
17 शिक्षिकाओं को किया गया सम्मानित
शिक्षक दिवस समारोह के दौरान मदर इंटरनेशनल कॉलेज की शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली शिक्षिकाओं में श्रीमती राजकुमारी, श्रीमती अतिथि शर्मा, श्रीमती अंशुल शर्मा, रीना कुमारी, अनामिका कुमारी, स्वाति कुमारी, राकेश्वरी कुमारी, जोहा कुमारी, निधि कुमारी, वैशाली शर्मा, कुमारी माधुरी, श्रीमती सरिता और कुमारी खुशी सहित अन्य शिक्षिकाएं शामिल रहीं। सभी को सम्मान स्वरूप शॉल, दुपट्टा एवं पगड़ी पहनाई गई तथा तुलसी का पौधा भेंट किया गया। इसके साथ ही विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती प्रियंका सिंह को भी अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। विद्यालय की अध्यक्ष श्रीमती सर्वजीत सिंह घुम्मन को संस्थान के बेहतर संचालन और मार्गदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
समारोह में विद्यालय के विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षक के महत्व की झलक दिखाई दी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे समारोह को भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में डॉ. एमके बंसल को उनकी उपलब्धियों के लिए दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री श्री शीशपाल ने की।
कई गणमान्य लोगों ने रखे विचार
समारोह को डॉ. एमके बंसल, चौधरी यशपाल सिंह, कोमल सिंह, श्रीमती प्रिया रस्तोगी, मौलाना शाहीन जमाली चतुर्वेदी, रवि कुमार बिश्नोई और सुरेंद्र कुमार शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने शिक्षक दिवस के महत्व और गुरु-शिष्य परंपरा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन रवि कुमार बिश्नोई और श्री सुरेंद्र शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। विद्यालय की ओर से श्रीमती सर्वजीत सिंह घुम्मन ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह के समापन पर शिक्षकों और विद्यार्थियों को उनके योगदान के लिए शुभकामनाएं दी गईं तथा शिक्षा और संस्कार के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण का संकल्प दोहराया गया।