प्राचार्य डॉ युद्धवीर सिंह
मेरठ। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2026 के अवसर पर मेरठ कॉलेज ने पिछले करीब डेढ़ वर्ष की अपनी शैक्षणिक, शोध एवं अन्य गतिविधियों की उपलब्धियों को सामने रखा। इस अवधि में कॉलेज के शिक्षकों ने 650 शोधपत्र प्रकाशित किए, जिनमें 101 शोधपत्र Scopus और Web of Science इंडेक्स्ड जर्नल में प्रकाशित हुए। करीब तीन करोड़ रुपये के 46 शोध प्रोजेक्ट प्राप्त हुए। इसके साथ ही 374 शैक्षणिक, सह-पाठ्यक्रम एवं विस्तार गतिविधियां आयोजित की गईं। शिक्षकों के प्रोफाइल में 171 PPT प्रस्तुतियां दर्ज हुईं तथा विभिन्न परीक्षाओं में फैकल्टी ने लगभग 7500 परीक्षा ड्यूटियां निभाईं।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रो. मंजू खोखर के निर्देशन में कराए गए ऑक्सफोर्ड हैप्पीनेस इंडेक्स सर्वे में विद्यार्थियों के परिणाम उत्साहजनक रहे। ये उपलब्धियां शिक्षा, शोध, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और विद्यार्थी विकास के क्षेत्र में कॉलेज के निरंतर प्रयासों को दर्शाती हैं।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. युधवीर सिंह ने कहा कि मेरठ कॉलेज का अतीत गौरवशाली है, वर्तमान उपलब्धियों से भरा है और उम्मीद है कि भविष्य इससे भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त हमें स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है। मेरठ की धरती 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण भूमि रही है। आज की पीढ़ी को इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए सत्य, अनुशासन और जिम्मेदारी को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल ने कहा कि युवा आज का भारत हैं और भविष्य के भारत की दिशा भी तय करेंगे। स्वतंत्रता का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब युवा अच्छे, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनें। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के वीरों और दिवंगत विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रबंध समिति के सचिव विवेक कुमार गर्ग ने कहा कि युवा अतीत की विरासत को वर्तमान की ऊर्जा और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने जनरेशन जी (Generation Z) के साथ संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में इस पीढ़ी के साथ नम्रता और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार अपनाना होगा, लेकिन अपनी बात को दृढ़ता और तार्किक ढंग से उनके सामने रखना भी जरूरी है। संवाद में सम्मान, तर्क और स्पष्टता का संतुलन बनाकर ही युवाओं को सही दिशा दी जा सकती है और देश के विकास को गति मिल सकती है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के मार्गदर्शक की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
डॉ. रामकुमार गुप्ता ने बशीर बद्र की शायरी के माध्यम से संघर्ष और उम्मीद का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां व्यक्ति को आगे बढ़ने और लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा देती हैं।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. अर्चना सिंह एवं डॉ. अनीता मोरल ने किया। वक्ताओं ने स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को याद करने और युवा पीढ़ी को बेहतर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करने का अवसर बताया।