भाजपा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी
मेरठ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राज्यसभा सांसद एवं मुख्य सचेतक डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मेरठ के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जनपद में सील किए गए कोचिंग संस्थानों के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में हुई दर्दनाक घटना के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा कोचिंग संस्थानों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई पूरी तरह उचित और आवश्यक थी, लेकिन अब छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और कोचिंग संस्थानों का नियमन भी प्रभावी ढंग से हो सके, इसके लिए संतुलित समाधान अपनाया जाना चाहिए।
डॉ. बाजपेयी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए जाते तो व्यावसायिक दृष्टिकोण से संचालित हो रहे कई कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लगाना मुश्किल होता और भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती।
कार्यालय की सील खोलकर शुरू हो पंजीकरण प्रक्रिया
सांसद ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि जिन कोचिंग संस्थानों को सील किया गया है, उनके शैक्षणिक हिस्से को फिलहाल सील ही रखा जाए, लेकिन केवल कार्यालय (ऑफिस) की सील खोलकर संचालकों को उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अध्यादेश-2002, नियमावली-2002 तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार पंजीकरण के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित होने के बाद ही कोचिंग संस्थानों को संचालन की अनुमति दी जाए।
छात्र संख्या का हो वैज्ञानिक निर्धारण
डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि प्रत्येक कोचिंग संस्थान के उपलब्ध शैक्षणिक क्षेत्र का तकनीकी मूल्यांकन कर उसकी क्षमता निर्धारित की जानी चाहिए। उसी के अनुरूप छात्रों की अधिकतम संख्या तय की जाए, ताकि भीड़भाड़ न हो और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए यदि शासन स्तर से अनुमति आवश्यक हो तो उसे शीघ्र प्राप्त कर कार्रवाई प्रारंभ की जाए। इससे एक ओर कोचिंग संस्थानों की व्यावसायिक मनमानी पर नियंत्रण रहेगा, वहीं दूसरी ओर छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।
पत्र के साथ नियमावली और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी भेजा
सांसद ने अपने पत्र के साथ उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अध्यादेश-2002, नियमावली-2002, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ द्वारा जारी पंजीकरण संबंधी दिशा-निर्देश तथा उच्चतम न्यायालय के एक महत्वपूर्ण निर्णय की प्रति भी संलग्न की है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में सुकदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में पारित आदेश के आलोक में भी कोचिंग संस्थानों के नियमन और छात्र सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
पंजीकरण के लिए बताए गए प्रमुख मानक
पत्र में सांसद ने कहा कि कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण के दौरान निम्नलिखित आवश्यक बिंदुओं का पालन अनिवार्य रूप से कराया जाना चाहिए—
- क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज।
- अग्निशमन (फायर सेफ्टी) की समुचित व्यवस्था।
- व्यवसायिक विद्युत कनेक्शन।
- भवन के व्यवसायिक उपयोग का प्रमाण-पत्र।
- भवन की क्षमता के अनुसार छात्र संख्या का निर्धारण।
- निर्धारित शुल्क संरचना का पालन।
- सभी अभिलेख एवं रजिस्टरों का विधिवत संधारण।
- नियमावली के प्रमुख प्रावधानों का भी किया उल्लेख
डॉ. बाजपेयी ने उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियम नियमावली-2002 के प्रमुख प्रावधानों का भी उल्लेख किया है। इनमें पंजीकरण आवेदन, निर्धारित शुल्क, तीन वर्ष की वैधता वाला पंजीकरण प्रमाण-पत्र, प्रत्येक शाखा के लिए अलग पंजीकरण, कर्मचारियों एवं छात्रों का रिकॉर्ड, शुल्क रजिस्टर, वेतन भुगतान रजिस्टर तथा सक्षम अधिकारी द्वारा निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी कोचिंग संस्थान को अपना पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना होगा तथा पते में परिवर्तन होने पर सक्षम अधिकारी को समय रहते सूचना देना अनिवार्य होगा।
छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों रहें प्राथमिकता
सांसद ने अपने पत्र में कहा कि सरकार और प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना होना चाहिए जिससे छात्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो और उनकी पढ़ाई भी बाधित न हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगा और आवश्यक अनुमति प्राप्त कर पंजीकरण प्रक्रिया शीघ्र शुरू करेगा।