कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ ने अपनी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक पहचान को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व में विश्वविद्यालय का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों पोलैंड के दौरे पर है। इस दौरे का उद्देश्य भारत और पोलैंड के बीच उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
प्रतिनिधिमंडल में विश्वविद्यालय के शोध एवं विकास निदेशक प्रो. बीर पाल सिंह तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रकोष्ठ के उपनिदेशक प्रो. जितेंद्र सिंह भी शामिल हैं। यह दौरा पोलैंड के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विशेष आमंत्रण पर आयोजित किया जा रहा है, जिसके दौरान दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते होने हैं।
भारतीय दूतावास में राजदूत से की शिष्टाचार भेंट
पोलैंड पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी वारसॉ स्थित भारतीय दूतावास में भारत की राजदूत सुश्री नीता भूषण से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान भारत और पोलैंड के बीच उच्च शिक्षा, संयुक्त शोध परियोजनाओं, छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों, नवाचार और संस्थागत सहयोग को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने राजदूत को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों, वैश्विक साझेदारियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी दी। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ने से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
कुलपति देंगी अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान
दौरे के प्रमुख कार्यक्रम के अंतर्गत 3 जुलाई को कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला पोलैंड के प्रतिष्ठित Poznań University of Life Sciences में “Building Indo-Polish Collaborations for Sustainable Environment” विषय पर मुख्य व्याख्यान देंगी।
यह विश्वविद्यालय कृषि, पर्यावरण, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य विज्ञान तथा प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में पोलैंड के अग्रणी शिक्षण एवं शोध संस्थानों में शामिल है। कुलपति का यह व्याख्यान विश्वविद्यालय के PREIDUB कार्यक्रम के वित्तीय सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
दो विश्वविद्यालयों के साथ होंगे महत्वपूर्ण एमओयू
पोलैंड दौरे के दौरान चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और Poznań University of Life Sciences के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के माध्यम से संयुक्त शोध परियोजनाएं, छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रम, वैज्ञानिक सहयोग तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
दौरे के अगले चरण में प्रतिनिधिमंडल Nowy Sącz स्थित Wyższa Szkoła Biznesu – National Louis University (WSB-NLU) का भी दौरा करेगा। यह विश्वविद्यालय प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल नवाचार और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
यहां भी दोनों विश्वविद्यालयों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत संयुक्त शोध, अकादमिक आदान-प्रदान, कौशल विकास, स्टार्टअप, नवाचार तथा आधुनिक तकनीकों पर आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिलेंगे वैश्विक अवसर
विश्वविद्यालय के शोध एवं विकास निदेशक प्रो. बीर पाल सिंह ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक दौरे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलते हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग से संयुक्त शोध परियोजनाओं, अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशनों, छात्र एवं शिक्षक विनिमय, इंटर्नशिप, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तक पहुंच और वैश्विक रैंकिंग में विश्वविद्यालय की स्थिति मजबूत करने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की साझेदारियों से विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य अधिक सशक्त बनेगा।
अंतरराष्ट्रीय पहचान होगी और मजबूत
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित कर विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि पोलैंड का यह दौरा विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे भविष्य में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी। साथ ही, विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान और प्रतिष्ठा को भी नई मजबूती मिलेगी।
यह दौरा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे भविष्य में भारत और पोलैंड के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग के नए आयाम स्थापित होने की उम्मीद है।