सुनील भराला
मेरठ। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद का नाम बदलकर ‘श्री परशुरामपुरी’ किए जाने के निर्णय का राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं पूर्व मंत्री सुनील भराला ने स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और भगवान श्री परशुराम के सम्मान से जुड़ा ऐतिहासिक फैसला बताया है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह निर्णय केवल किसी नगर का नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि भगवान श्री परशुराम की गौरवशाली विरासत को सम्मान देने और उनकी ऐतिहासिक पहचान को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नाम परिवर्तन के लिए वर्षों से किए जा रहे थे प्रयास
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जब सुनील भराला भारतीय जनता पार्टी के शाहजहांपुर जनपद के प्रभारी थे, तब उन्होंने स्थानीय जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जलालाबाद का नाम ‘श्री परशुरामपुरी’ किए जाने के लिए शासन और भारत सरकार के समक्ष लगातार पत्राचार किया था।
उन्होंने भगवान श्री परशुराम की जन्मस्थली से जुड़े ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को प्रमुखता से उठाते हुए इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए। उनका कहना था कि इस ऐतिहासिक स्थल को उसकी वास्तविक पहचान मिलनी चाहिए।
राष्ट्रीय परशुराम परिषद ने भी चलाया अभियान
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि राष्ट्रीय परशुराम परिषद ने भी इस विषय को समाज के बीच लगातार उठाया। परिषद ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के सहयोग से इस मांग को मजबूत स्वर देने का कार्य किया। परिषद का उद्देश्य भगवान श्री परशुराम की गौरवशाली विरासत को उचित सम्मान दिलाना और उससे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को सुदृढ़ करना रहा।
परिषद का दावा है कि सुनील भराला के निरंतर प्रयासों और संगठन द्वारा चलाए गए अभियान के परिणामस्वरूप यह विषय शासन स्तर पर आगे बढ़ा, जिसके बाद उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने जलालाबाद का नाम ‘श्री परशुरामपुरी’ किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।
‘यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान’
इस अवसर पर सुनील भराला ने कहा कि यह निर्णय करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और भगवान श्री परशुराम के सम्मान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से भगवान श्री परशुराम की जन्मस्थली को उसकी ऐतिहासिक पहचान दिलाने की मांग कर रहा था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर एक ऐतिहासिक कार्य किया है।
उन्होंने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उत्तर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा।
भविष्य में भी जारी रहेगा संरक्षण का अभियान
राष्ट्रीय परशुराम परिषद ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी भगवान श्री परशुराम से जुड़े ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण, विकास और उनकी पहचान को मजबूत करने के लिए संगठन निरंतर कार्य करता रहेगा।