कृषि विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करती उत्तर प्रदेश राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में सोमवार को 19वें दीक्षांत समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष एवं बनास डेयरी के चेयरमैन शंकरभाई चौधरी उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रपौत्र अतुल धीरजलाल पटेल शामिल हुए।
दीक्षांत समारोह में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कृषि विकास और किसान हितों को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। समारोह में 450 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं तथा मेधावी छात्रों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया।

‘डिग्री केवल प्रमाणपत्र नहीं, जिम्मेदारी भी है’ : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
अपने अध्यक्षीय संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं के संकल्प का अवसर है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हाथों में मिली उपाधि केवल एक प्रमाणपत्र नहीं बल्कि उनके परिश्रम, माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा, पशुपालन, ग्रामीण उद्यमिता, खाद्य प्रसंस्करण, नवाचार तथा किसान कल्याण का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां विकसित होने वाली तकनीक और शोध का लाभ सीधे किसानों और ग्रामीण समाज तक पहुंचना चाहिए।
‘कड़ी मेहनत से करोड़ों कमा रहीं अनपढ़ महिलाएं, उनसे सीखें’
राज्यपाल ने अपने संबोधन में प्रेरणादायक उदाहरण देते हुए कहा कि देश में अनेक महिलाएं अशिक्षित होने के बावजूद कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर करोड़ों रुपये का कारोबार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण युवाओं को यह सिखाते हैं कि सफलता केवल डिग्री पर निर्भर नहीं होती, बल्कि मेहनत, लगन और सही दिशा में कार्य करने से हासिल होती है।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का लक्ष्य अलग हो सकता है, लेकिन सहयोग और समन्वय के साथ कार्य करने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

‘दीक्षांत नहीं, दीक्षोत्सव बने’
राज्यपाल ने सुझाव दिया कि भविष्य में विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह केवल एक दिन का कार्यक्रम न होकर 15 दिनों का “दीक्षोत्सव” बनाया जाए। इस दौरान किसानों, ग्रामीण महिलाओं, बच्चों और युवाओं को जोड़कर कृषि, स्वास्थ्य, नवाचार और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिससे विश्वविद्यालय और समाज के बीच सीधा संवाद स्थापित हो।
फसल विविधीकरण पर दिया विशेष जोर
राज्यपाल ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल गन्ना और आलू जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय अन्य लाभकारी फसलों को भी अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और डिजिटल तकनीक का उपयोग भविष्य की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री के विजन का किया उल्लेख
मुख्य अतिथि शंकरभाई चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट लक्ष्य है कि आधुनिक डिजिटल तकनीक का लाभ देश के प्रत्येक किसान तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का उपयोग खेती को अधिक लाभकारी, सुरक्षित और टिकाऊ बनाएगा।
उन्होंने कहा कि एआई आधारित कृषि प्रणाली किसानों को मौसम, उत्पादन, बाजार और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता करेगी तथा जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान भी प्रस्तुत करेगी।
बड़े सपने देखने का संदेश
सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रपौत्र अतुल धीरजलाल पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री प्राप्त करने के बाद उनके सामने अवसरों की नई दुनिया खुल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, नवाचार अपनाने तथा किसानों और समाज के उत्थान के लिए अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का आह्वान किया।
रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : सूर्य प्रताप शाही
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में आज अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा स्टार्टअप के असीम अवसर उपलब्ध हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल नौकरी प्राप्त करने की सोच तक सीमित न रहें बल्कि स्वयं उद्यमी बनकर रोजगार सृजित करें और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।
समाज हित में ज्ञान का उपयोग करने का संदेश
राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो समाज और राष्ट्र के विकास में उपयोगी सिद्ध हो। उन्होंने सभी पदक विजेताओं और उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने का आह्वान किया।
450 विद्यार्थियों को मिली डिग्री
दीक्षांत समारोह में कुल 450 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
स्नातक स्तर पर—
बीएससी (कृषि) ऑनर्स – 114
बीएससी (हॉर्टिकल्चर) ऑनर्स – 39
बीटेक (बायोटेक्नोलॉजी) – 62
बीटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) – 19
बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) – 24
बीटेक (डेयरी टेक्नोलॉजी) – 16
बीवीएससी एवं एनिमल हस्बैंड्री – 53
इसके अतिरिक्त 65 स्नातकोत्तर तथा 58 पीएचडी शोधार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं।
आशुतोष शर्मा को मिला चांसलर गोल्ड मेडल
बीवीएससी एवं एनिमल हस्बैंड्री के छात्र आशुतोष शर्मा को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित चांसलर गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।
इन विद्यार्थियों ने जीते स्वर्ण पदक
विभिन्न संकायों में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में—
शिवम यादव – बीएससी कृषि
मान्या सिंह – बीएससी हॉर्टिकल्चर
आशुतोष शर्मा – बीवीएससी एवं एनिमल हस्बैंड्री
हर्ष शर्मा – बीटेक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग
खुशी गुप्ता – बीटेक बायोटेक्नोलॉजी
निधि – बीटेक फूड टेक्नोलॉजी
अमन वर्मा – बीटेक डेयरी टेक्नोलॉजी
शामिल रहे।
चार विशेष स्मृति पदक भी प्रदान किए गए
समारोह में चार प्रायोजित स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए—
मान्या सिंह – जावित्री देवी मेमोरियल गोल्ड मेडल
हर्ष शर्मा – शशिपाल सिंह मेमोरियल गोल्ड मेडल
निधि – प्रो. शमशेर गोल्ड मेडल
खुशी गुप्ता – सरिता मेमोरियल गोल्ड मेडल
डॉ. एल.के. गंगवार बने बेस्ट टीचर
विश्वविद्यालय के डॉ. एल.के. गंगवार को बेस्ट टीचर अवार्ड तथा प्रो. वैशाली (कृषि जैव प्रौद्योगिकी) को आउटस्टैंडिंग वुमन टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय में 133 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि लगभग 133 करोड़ रुपये की लागत से विश्वविद्यालय में आधारभूत संरचना के विकास कार्य चल रहे हैं। इनमें—
10 छात्रावासों का नवीनीकरण
तीन नए छात्रावासों का निर्माण
आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
20 बेड का अस्पताल
इनक्यूबेशन सेंटर
ऑडिटोरियम
खेल स्टेडियम
विद्युत अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण
जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
पतंजलि संस्थान के साथ हुआ एमओयू
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय और पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत कृषि, आयुर्वेद, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में संयुक्त कार्य किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नई संभावनाएं मिलेंगी।
ये रहे कार्यक्रम में मौजूद
समारोह में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री सोमेन्द्र तोमर, राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, एमएलसी धर्मेन्द्र भारद्वाज, पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी, सुनील भराला, विश्वविद्यालय की प्रबंध परिषद के सदस्य, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
समारोह का संचालन
कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वी.पी. सिंह एवं श्रीमती प्रमिला उमराव ने किया। पूरे समारोह में शिक्षा, कृषि नवाचार, अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।