साइबर अपराध की रोकथाम को लेकर बैठक करते मुख्य सचिव एसपी गोयल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने साइबर अपराधों की रोकथाम और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साइबर अपराध नियंत्रण, साइबर जागरूकता, पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में स्पष्ट किया गया कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सभी विभागों को समन्वित और सुनियोजित तरीके से कार्य करना होगा।
बैठक में प्रधानमंत्री की ‘प्रगति (PRAGATI)’ समीक्षा के अंतर्गत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर उत्तर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जाए।
हर विभाग में नियुक्त होगा साइबर नोडल अधिकारी
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि अब प्रत्येक सरकारी विभाग में एक साइबर नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। यह अधिकारी साइबर अपराध मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित करेगा और मुख्यालय से प्राप्त साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता सामग्री को अपने विभाग के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करेगा।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस संबंध में सभी विभागों को औपचारिक पत्र जारी किया जाए, ताकि साइबर जागरूकता अभियान को पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
साइबर अपराध रोकने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय
मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों को “समग्र शासन” (Whole of Government Approach) के तहत आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर सुरक्षा से जुड़े सभी प्रयासों को एकीकृत कर आम नागरिकों तक पहुंचाया जाए।
जल्द लागू होगा उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C)
बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की स्थापना को लेकर भी महत्वपूर्ण समीक्षा हुई। पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार है और इसे जल्द जारी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि S4C के आठ प्रस्तावित घटकों में से छह पहले ही कार्यरत हैं, जबकि शेष दो की स्थापना की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
ई-जीरो एफआईआर प्रणाली अंतिम चरण में
साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विकसित की जा रही ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) प्रणाली भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इसके लागू होने के बाद साइबर अपराध के मामलों में स्थान की बाध्यता समाप्त होगी और पीड़ितों को तेजी से प्राथमिकी दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी।
‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ को मिलेगा और विस्तार
बैठक में उत्तर प्रदेश पुलिस के राज्यव्यापी साइबर अभियान “ऑपरेशन साइबर वज्र (CyVajra)” की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जा सके।
साइट्रेन प्लेटफॉर्म पर उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1
बैठक में बताया गया कि साइबर अपराधों की जांच के लिए पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में CyTrain (साइट्रेन) प्लेटफॉर्म के उपयोग के मामले में उत्तर प्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। इसे प्रदेश की बड़ी उपलब्धि माना गया।
डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी से बचाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अन्य संचार माध्यमों के जरिए लोगों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, निवेश धोखाधड़ी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लगातार जागरूक किया जाए।
उन्होंने साइबर हेल्पलाइन और शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए, ताकि साइबर ठगी के पीड़ितों को समयबद्ध सहायता और धनराशि वापसी की सुविधा मिल सके।
उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी
बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि शिकायत निवारण, धनराशि वापसी, सहयोग पोर्टल, समन्वय पोर्टल, साइबर जागरूकता अभियान और साइबर अन्वेषण जैसे विभिन्न मापदंडों पर उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि अब लक्ष्य केवल अग्रणी बनना नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में स्थायी रूप से प्रथम स्थान बनाए रखना होना चाहिए।
वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह, साइबर अपराध मुख्यालय के पुलिस उपमहानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक (साइबर ऑपरेशंस) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सारांश
उत्तर प्रदेश सरकार साइबर अपराधों के खिलाफ अपनी रणनीति को और अधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय, हर विभाग में साइबर नोडल अधिकारी की नियुक्ति, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली, UPS4C की स्थापना, ऑपरेशन साइबर वज्र और व्यापक जन-जागरूकता अभियान जैसे कदम प्रदेश में साइबर सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।