गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु जी का सम्मान करते राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेई
मेरठ। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के मुख्य सचेतक डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मेरठ के ऐतिहासिक काली पलटन (औघड़नाथ महादेव) मंदिर में आयोजित गुरु पूजन कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की तथा विभिन्न मंदिरों के पुजारियों का सम्मान कर भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
भाजपा के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. बाजपेयी ने औघड़नाथ महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी श्री श्रीधर जी एवं श्री चंदन जी, दुर्गा मंदिर के पुजारी श्री मनोज तिवारी जी तथा श्री राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी श्री वी. के. दीक्षित जी का गुरु स्वरूप पूजन एवं सम्मान किया। उन्होंने कहा कि गुरु भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ हैं और समाज को सही दिशा प्रदान करने का कार्य करते हैं।
औघड़नाथ मंदिर का बताया ऐतिहासिक महत्व
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि मेरठ का काली पलटन (औघड़नाथ) मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि वर्ष 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणा स्थल और उद्गम स्थान भी माना जाता है। इस ऐतिहासिक धरा पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूजन करना भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति दोनों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
भगवान शिव का जलाभिषेक और शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि
गुरु पूजन से पूर्व उन्होंने भगवान शिव पर जलाभिषेक किया तथा भगवान राधाकृष्ण एवं माँ दुर्गा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश के शहीदों की स्मृति में बने शहीद स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी।
गुरु पूर्णिमा का महत्व बताया
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का दिन भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन कर सनातन ज्ञान परंपरा को नई दिशा दी।
उन्होंने बताया कि इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपने पाँच शिष्यों को पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। वहीं जैन धर्म में भगवान महावीर के प्रथम शिष्य गौतम स्वामी को गुरु पद की प्राप्ति भी इसी दिन हुई थी।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, सम्मान, कृतज्ञता, ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास का संदेश देने वाला उत्सव है। भारतीय परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे उपस्थित
इस अवसर पर डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी की पत्नी डॉ. मधु बाजपेयी, भाजपा मेरठ महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी, महानगर उपाध्यक्ष विवेक बाजपेयी, मुकेश ठाकुर, नरेश गुप्ता, ब्रजेश चौधरी, विकास मित्तल, अखिलेश शास्त्री, अनुज सिंघल, संजीव प्रधान, कुलदीप बाल्मीकि, केशव छावड़ा, अंकित सिंघल, सुरेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
गुरु-शिष्य परंपरा को सशक्त बनाने का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. बाजपेयी ने सभी नागरिकों से अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देता है और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति की उस अमूल्य परंपरा का प्रतीक है, जो ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य करती है।