अनुसंधान विश्वविद्यालय की मांग को लेकर ज्ञापन देते पंडित सुनील भड़ला
लखनऊ/मेरठ। उत्तर प्रदेश में भगवान परशुराम के नाम पर एक समर्पित विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल तेज होती दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय से उनके कार्यालय में शिष्टाचार भेंट कर मेरठ में भगवान परशुराम एकलम विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अश्विनी त्यागी, विधायक तेजपाल नागर तथा वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक कटारिया भी मौजूद रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय की स्थापना, भूमि उपलब्ध कराने और प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति दिलाने सहित विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
पंडित सुनील भराला ने शिक्षा मंत्री को बताया कि 16 जुलाई को उन्होंने इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में अब उच्च शिक्षा विभाग स्तर पर प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
25 से 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध
बैठक के दौरान पंडित सुनील भराला ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि मेरठ में भगवान परशुराम एकलम विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए 25 से 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाए तथा प्रस्ताव पर प्राथमिकता के आधार पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
उन्होंने कहा कि यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शोध और वैश्विक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
भारतीय संस्कृति और वैदिक ज्ञान का बनेगा वैश्विक केंद्र
पंडित सुनील भराला ने कहा कि भगवान परशुराम भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान, न्याय, शौर्य, तप, राष्ट्रधर्म और सनातन परंपरा के महान प्रतीक हैं। उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का कार्य करेगा।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय में निम्न विषयों पर विशेष अध्ययन और शोध की व्यवस्था की जा सकती है—
- वेद एवं वेदांग
- संस्कृत भाषा एवं साहित्य
- भारतीय दर्शन
- प्राचीन भारतीय इतिहास
- संस्कृति एवं सभ्यता
- वैदिक विज्ञान
- आधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार
उन्होंने कहा कि यह संस्थान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
मेरठ को बताया सबसे उपयुक्त स्थान
पंडित सुनील भराला ने कहा कि मेरठ और उसके आसपास का क्षेत्र भगवान परशुराम से जुड़े अनेक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के कारण इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
उन्होंने कहा कि यदि यह विश्वविद्यालय मेरठ में स्थापित होता है तो देश-विदेश से विद्यार्थी, शोधार्थी और विद्वान यहां अध्ययन एवं शोध के लिए आएंगे, जिससे मेरठ को शिक्षा और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।
युवाओं को मिलेंगे शिक्षा, शोध और रोजगार के अवसर
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चिंतन और शोध को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला केंद्र बनेगा।
इसके माध्यम से युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश भारतीय संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करेगा।
शिक्षा मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने पंडित सुनील भराला द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप विभागीय स्तर पर प्रस्ताव का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा के विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा सभी प्रस्तावों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
राष्ट्रीय परशुराम परिषद लंबे समय से कर रही प्रयास
बैठक के बाद पंडित सुनील भराला ने कहा कि राष्ट्रीय परशुराम परिषद लंबे समय से भगवान परशुराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और सामाजिक समरसता के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव शीघ्र मूर्त रूप लेगा और मेरठ में भगवान परशुराम एकलम विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना का सपना साकार होगा।
- यदि विश्वविद्यालय की स्थापना होती है तो संभावित लाभ
- मेरठ को राष्ट्रीय स्तर का नया उच्च शिक्षण संस्थान मिलेगा।
- भारतीय संस्कृति, वेद और दर्शन पर उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा मिलेगा।
- देश-विदेश के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अध्ययन का नया केंद्र मिलेगा।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार, शोध और शैक्षणिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
- उत्तर प्रदेश की शिक्षा एवं सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।