ए आई तकनीकी के बारे में जानकारी देते अधिकारी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा विभाग एवं सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी (CIET), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का बुधवार को शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 12 से 14 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का विषय “शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ” रखा गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों और छात्र-अध्यापकों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR) और मेघ संगणन (Cloud Computing) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभावी एवं व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना तथा उनकी डिजिटल दक्षताओं को विकसित करना है।
140 से अधिक प्रतिभागियों ने कराया पंजीकरण
संकाय विकास कार्यक्रम में विश्वविद्यालय सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक-प्रशिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के लिए 140 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जबकि प्रथम दिवस 90 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रुचिकर, प्रौद्योगिकी-सक्षम एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा नवीन तकनीकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
तकनीक आधारित शिक्षण को समय की आवश्यकता बताया
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रो. टागरम कोंडाला राव, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी, NCERT, नई दिल्ली ने शिक्षा के क्षेत्र में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय डिजिटल पहलों एवं नवाचारों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण वर्तमान समय की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने शिक्षकों को डिजिटल संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रेरित किया और बताया कि डिजिटल माध्यमों का उचित उपयोग शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण बनाने में मददगार हो सकता है।
ई-सामग्री के पांच प्रमुख आयामों पर चर्चा
इसके बाद प्रो. शिरीष पाल सिंह, कार्यक्रम समन्वयक, CIET-NCERT, नई दिल्ली ने ई-सामग्री विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया में विकास, संग्रहण, वितरण, पहुंच एवं मूल्यांकन जैसे पांच प्रमुख आयामों की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि प्रभावी डिजिटल शिक्षण के लिए केवल तकनीक का उपयोग पर्याप्त नहीं है, बल्कि विषयवस्तु, शिक्षण-विधि और प्रौद्योगिकी का उचित समन्वय आवश्यक है। इन तीनों के संतुलित एवं समन्वित उपयोग को प्रभावी शिक्षण की आधारशिला बताया गया।
AI शिक्षकों का स्थान नहीं लेती, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाती है
कार्यक्रम में डॉ. रुचि द्विवेदी, CIET-NCERT, नई दिल्ली ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संवर्धित बुद्धिमत्ता के बीच अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में AI की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि भविष्य की शिक्षा में प्रौद्योगिकी का उद्देश्य मानवीय क्षमताओं का स्थान लेना नहीं, बल्कि उन्हें और अधिक सशक्त बनाना है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षकों का स्थान नहीं लेती, बल्कि उनके कार्यों को अधिक दक्षता, सटीकता और प्रभावशीलता के साथ पूरा करने में सहयोग प्रदान करती है।
डॉ. द्विवेदी के व्याख्यान में AI के उत्तरदायी एवं रचनात्मक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। उनके विचारों ने प्रतिभागियों को शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर नई दृष्टि प्रदान की।
प्रमुख शिक्षाविदों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. भूपेंद्र सिंह, कुलसचिव, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. बीरपाल सिंह, निदेशक, शोध निदेशालय, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रो. शिरीष पाल सिंह, कार्यक्रम समन्वयक, CIET-NCERT, नई दिल्ली, प्रो. राकेश कुमार शर्मा, विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, प्रो. अरुण कुमार, डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल एवं डॉ. वैभव शर्मा सहित अनेक शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
शिक्षकों की डिजिटल दक्षता बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों एवं शिक्षक-प्रशिक्षकों को आधुनिक शैक्षिक तकनीकों के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल तकनीकों का उद्देश्य केवल शिक्षण सामग्री को ऑनलाइन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवादात्मक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना भी है।
कार्यक्रम में AI, डिजिटल संसाधनों और अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में संभावित बदलावों पर भी चर्चा की गई।
डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल ने व्यक्त किया आभार
उद्घाटन सत्र के समापन अवसर पर डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल, शिक्षा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विशेषज्ञ वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों और छात्र-अध्यापकों की व्यावसायिक दक्षताओं को मजबूत करने के साथ उन्हें नवीन शैक्षिक प्रौद्योगिकियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के बदलते स्वरूप के अनुरूप शिक्षकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना आवश्यक है, ताकि वे आधुनिक संसाधनों का उपयोग करते हुए विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण तैयार कर सकें।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों की ओर से सभी अतिथियों, विशेषज्ञ वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के प्रथम दिवस का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम के आगामी सत्रों में भी शिक्षण क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा उभरती हुई तकनीकों के विभिन्न व्यावहारिक एवं शैक्षिक पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी साझा की जाएगी।