अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देते किसान
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले गन्ना कार्यालय पर धरना शुरू
मेरठ/मवाना । राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले किसानों ने वर्ष 1996-97 से लेकर वर्ष 2026 तक गन्ना किसानों को किए गए भुगतान में देरी पर देय ब्याज से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है। संगठन का कहना है कि किसानों द्वारा चीनी मिलों को आपूर्ति किए गए गन्ने के भुगतान में विभिन्न अवधियों में हुई देरी के एवज में देय ब्याज का पूरा रिकॉर्ड किसानों के सामने रखा जाना चाहिए।
संगठन के मेरठ मंडल अध्यक्ष चौधरी समबीर सिंह के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में भी प्रशासन के समक्ष मांग रखी जा चुकी है। संगठन का आरोप है कि संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग करने के बावजूद अभिलेख उपलब्ध कराने में आनाकानी की जा रही है। इसी के विरोध में किसानों ने गन्ना विभाग के कार्यालय पर शांतिपूर्वक अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का निर्णय लिया है।
हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला
किसान संगठन ने अपनी मांग के समर्थन में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश का भी हवाला दिया है। संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वी.एम. सिंह की याचिका पर 16 जुलाई 2016 को माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ द्वारा आदेश पारित किया गया था। संगठन का कहना है कि उक्त आदेश की भावना के अनुरूप किसानों को गन्ना भुगतान में हुए विलंब तथा उससे संबंधित ब्याज का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं है, बल्कि वर्षों से लंबित रिकॉर्ड को सार्वजनिक कर किसानों को उनके अधिकारों से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराना है।
30 वर्षों के रिकॉर्ड की मांग
धरने पर बैठे किसानों की प्रमुख मांग वर्ष 1996-97 से वर्ष 2026 तक का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की है। संगठन चाहता है कि इस अवधि में किसानों द्वारा चीनी मिलों को आपूर्ति किए गए गन्ने के भुगतान में जहां-जहां विलंब हुआ, उसका विवरण और उस विलंब के कारण देय ब्याज का रिकॉर्ड किसानों को उपलब्ध कराया जाए। किसान नेताओं का कहना है कि लगभग तीन दशक की अवधि से संबंधित यह रिकॉर्ड किसानों के हित में महत्वपूर्ण है। रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन किसानों को कितना भुगतान हुआ, भुगतान में कितनी देरी हुई और देरी की स्थिति में ब्याज के रूप में कितनी राशि देय थी।
17 अगस्त को जिलाधिकारी को दिया था ज्ञापन
संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, इसी मांग को लेकर 17 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी मेरठ को भी ज्ञापन दिया गया था। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने और किसानों की समस्या का समाधान कराने की मांग की गई थी। संगठन का कहना है कि ज्ञापन देने के बाद भी जब रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया तो किसानों ने धरना शुरू करने का फैसला लिया। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग
धरने के माध्यम से किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी से मांग की है कि गन्ना भुगतान में विलंब और उस पर देय ब्याज से संबंधित सभी आवश्यक अभिलेख संगठन एवं किसानों को उपलब्ध कराए जाएं। संगठन ने कहा है कि रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद किसान तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने कहा है कि धरना शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा। संगठन की ओर से प्रशासन से किसी टकराव के बजाय वार्ता और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के माध्यम से समस्या का समाधान करने की अपेक्षा जताई गई है। संगठन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया तो धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
किसान नेताओं ने प्रशासन से समाधान की अपील की
मंडल अध्यक्ष चौधरी समबीर सिंह, मंडल सचिव मनोज बहार सकौती सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि वर्षों पुराने गन्ना भुगतान और ब्याज से जुड़े रिकॉर्ड को उपलब्ध कराना किसानों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि जिला गन्ना विभाग को आवश्यक रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं, ताकि किसानों का आंदोलन समाप्त हो सके और मामले का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से किया जा सके।