राजकीय बालगृह एवं महिला शरणालय का निरीक्षण करते समिति के पदाधिकारी
समिति ने बालकों, किशोरों और संवासिनियों को मिल रही सुविधाओं का लिया जायजा, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
मेरठ । जनपद मेरठ में संबंधित समिति द्वारा विभिन्न राजकीय संरक्षण एवं देखरेख संस्थानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इस दौरान राजकीय बालगृह बालक (सूरजकुंड), राजकीय महिला शरणालय, राजकीय पाश्चात्वर्ती देखरेख संगठन, राजकीय बालगृह शिशु मेरठ तथा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर मेरठ का निरीक्षण किया गया। समिति ने संस्थानों में रह रहे बालकों, किशोरों और संवासिनियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का मौके पर जायजा लिया।
बालगृह और सम्प्रेक्षण गृह में व्यवस्थाओं की जांच
निरीक्षण के दौरान समिति द्वारा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर एवं राजकीय बालगृह बालक में रह रहे किशोरों और बालकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली गई। समिति ने भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। संबंधित अधिकारियों से संस्थानों में उपलब्ध व्यवस्थाओं और वहां रह रहे किशोरों एवं बालकों की आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। समिति ने व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
बालकों के स्वास्थ्य और भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान
निरीक्षण के दौरान बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। साथ ही संस्थानों में साफ-सफाई और सुरक्षित वातावरण बनाए रखने को लेकर भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया समिति ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बालकों और किशोरों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप निर्धारित मानकों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
महिला शरणालय और पाश्चात्वर्ती देखरेख संगठन का भी निरीक्षण
समिति ने राजकीय महिला शरणालय एवं राजकीय पाश्चात्वर्ती देखरेख संगठन, मेरठ का भी निरीक्षण किया। इस दौरान वहां रह रही संवासिनियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। निरीक्षण में भोजन, चिकित्सा सुविधा, शिक्षा, आवासीय व्यवस्था और स्वच्छता समेत अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को देखा गया। अधिकारियों से संस्थान में उपलब्ध संसाधनों और संवासिनियों के लिए संचालित व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की गई।
संवासिनियों से किया संवाद, जानी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान समिति के सदस्यों ने संवासिनियों से संवाद कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। संवासिनियों से उनकी दैनिक आवश्यकताओं तथा संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में फीडबैक लिया गया। समिति ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवासिनियों की समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जाए और उन्हें निर्धारित सुविधाएं समय से उपलब्ध कराई जाएं।
अधिकारों और निर्धारित मानकों के पालन के निर्देश
समिति ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निरुद्ध किशोरों, बालकों और संवासिनियों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाए। उन्हें शासन एवं विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। समिति ने कहा कि संस्थानों में रहने वाले बच्चों, किशोरों और संवासिनियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छता और सम्मानजनक वातावरण से संबंधित व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों को व्यवस्थाओं में लापरवाही न बरतने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि संस्थानों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी कमी को तत्काल दूर किया जाए। विशेष रूप से स्वास्थ्य, भोजन, साफ-सफाई और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाए रखने पर जोर दिया गया। समिति ने यह भी निर्देशित किया कि संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक बालक, किशोर एवं संवासिनी की आवश्यकताओं को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए नियमानुसार आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
निरीक्षण के दौरान ये अधिकारी रहे उपस्थित
निरीक्षण के दौरान श्रीमती शिवानी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम-प्रथम, श्री रमेश कुशवाहा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-19, मेरठ, सोनिका वर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ तथा श्री शिखर अग्रवाल, प्रधान मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड, मेरठ उपस्थित रहे। समिति के आकस्मिक निरीक्षण का उद्देश्य संस्थानों में रह रहे बालकों, किशोरों और संवासिनियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना तथा निर्धारित मानकों के अनुसार व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराना रहा।