कुलपति प्रोफेसर त्रिवेणी दत्त
उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के किसानों के लिए देर से बुवाई में उपयोगी होगी नई प्रजाति
मेरठ । सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के गेहूं अनुसंधान कार्यक्रम को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित गेहूं की नई प्रजाति SBWL-2202 (सरदार समृद्धि) को वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी (VIC) द्वारा केंद्रीय स्तर पर रिलीज के लिए चिन्हित किया गया है। यह विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एवं रिलीज होने वाली गेहूं की पहली प्रजाति होगी। विश्वविद्यालय के लिए इसे कृषि अनुसंधान और किसानों के हित में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
65वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ कार्यशाला में मिली पहचान
इस गेहूं प्रजाति की पहचान 65वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ शोधकर्ताओं की वार्षिक कार्यशाला के दौरान की गई। यह कार्यशाला 18 से 20 अगस्त 2026 तक राजस्थान के जयपुर स्थित श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के परिसर में आयोजित हुई। इसी कार्यशाला में वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी ने SBWL-2202 को केंद्रीय स्तर पर रिलीज के लिए चयनित किया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के अंतर्गत संचालित गेहूं अनुसंधान कार्यक्रम के निरंतर शोध प्रयासों का परिणाम है।
कुलपति के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि
विश्वविद्यालय के कुलपति डा. त्रिवेणी दत्त के मार्गदर्शन में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रसार के क्षेत्र में लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग में गेहूं की उन्नत प्रजातियों के विकास पर शोध कार्य किया जा रहा है। नई प्रजाति SBWL-2202 (सरदार समृद्धि) का विकास डा. लोकेश कुमार गंगवार, प्राध्यापक, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग द्वारा किया गया है। इस उपलब्धि पर कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त, शोध निदेशक एवं कुलसचिव डॉ. कमल खिलाड़ी, वित्त नियंत्रक, सभी अधिष्ठाताओं, निदेशकों, शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों ने डॉ. लोकेश कुमार गंगवार को बधाई दी।

वर्ष 2023-24 से चल रहे परीक्षणों में सामने आया बेहतर प्रदर्शन
‘सरदार समृद्धि’ प्रजाति का वर्ष 2023-24 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की अखिल भारतीय समन्वित गेहूं एवं जौ अनुसंधान परियोजना (AICRP) के अंतर्गत विभिन्न शोध केंद्रों पर वैरायटी परीक्षणों में मूल्यांकन किया जा रहा था। परीक्षणों के दौरान मानक प्रजातियों की तुलना में इसकी उपज, प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता और गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण मानकों का अध्ययन किया गया। विभिन्न परीक्षणों में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी ने इसे रिलीज के लिए चिन्हित किया।
उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के किसानों के लिए होगी उपयोगी
‘सरदार समृद्धि’ को उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में सिंचित दशा में देर से बुवाई के लिए उपयुक्त प्रजाति के रूप में रिलीज किया जाएगा। यह विशेषता उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनके खेतों में किसी कारणवश गेहूं की समय पर बुवाई नहीं हो पाती है। विश्वविद्यालय के अनुसार प्रजाति में बेहतर उत्पादन क्षमता के साथ प्रमुख रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोधक क्षमता और अच्छी गुणवत्ता पाई गई है।
औसत उपज 45 क्विंटल, अधिकतम 64.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
‘सरदार समृद्धि’ की औसत उपज लगभग 45.0 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जबकि इसकी अधिकतम उत्पादन क्षमता 64.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। बेहतर उत्पादन क्षमता इस प्रजाति को किसानों के लिए आकर्षक विकल्प बनाती है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार नई प्रजाति में अधिक उत्पादन के साथ-साथ प्रमुख रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोधकता, आकर्षक दाना गुणवत्ता और बेहतर प्रसंस्करण गुण मौजूद हैं।

भूरा और पीला रतुआ रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता
‘सरदार समृद्धि’ की प्रमुख विशेषताओं में भूरे एवं पीले रतुआ रोगों के प्रति उच्च स्तर की प्रतिरोधक क्षमता शामिल है। गेहूं की खेती में रतुआ रोग उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं, ऐसे में रोग प्रतिरोधी प्रजाति किसानों के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान कर सकती है। नई प्रजाति को विकसित करते समय अधिक उपज के साथ रोग प्रतिरोधकता और गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण कृषि गुणों को भी ध्यान में रखा गया है।
109 दिन में पकने वाली प्रजाति, पौधे की औसत ऊंचाई 100 सेंटीमीटर
विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार ‘सरदार समृद्धि’ के पौधों की औसत ऊंचाई लगभग 100 सेंटीमीटर है। इसकी परिपक्वता अवधि लगभग 109 दिन बताई गई है। इसकी बालियों का रंग भूरा है। प्रजाति में उत्पादन क्षमता के साथ दानों की गुणवत्ता भी अच्छी पाई गई है, जिससे इसे खाद्य प्रसंस्करण के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
चपाती और बिस्किट दोनों के लिए उपयोगी
‘सरदार समृद्धि’ की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी प्रसंस्करण गुणवत्ता है। विश्वविद्यालय के अनुसार यह गेहूं की प्रजाति चपाती और बिस्किट दोनों के लिए उपयुक्त है। इसमें प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है तथा इसके दाने आकर्षक बताए गए हैं। इस प्रकार यह प्रजाति केवल खेत में बेहतर उत्पादन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य गुणवत्ता और प्रसंस्करण के दृष्टिकोण से भी किसानों एवं उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
जीपीबी विभाग में भी चल रहा गेहूं अनुसंधान
विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के मार्गदर्शन में शोध निदेशालय के अंतर्गत जीपीबी विभाग द्वारा गेहूं सहित अन्य फसलों पर भी शोध कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य कृषि क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप नई और उन्नत फसल प्रजातियों का विकास करना है, ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन, गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधकता वाले विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।

रबी 2027-28 से किसानों को मिल सकता है बीज
विश्वविद्यालय के अनुसार ‘सरदार समृद्धि’ के रिलीज और नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके बीज को किसानों के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य शुरू होगा। योजना के अनुसार रबी वर्ष 2027-28 से किसानों को इस प्रजाति का बीज उपलब्ध होना शुरू हो सकेगा।
कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में मेरठ विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि
SBWL-2202 ‘सरदार समृद्धि’ का केंद्रीय स्तर पर रिलीज के लिए चयनित होना सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे गेहूं अनुसंधान की दिशा और गुणवत्ता को दर्शाती है।
अधिक उपज, प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता, अच्छी दाना गुणवत्ता और चपाती एवं बिस्किट दोनों के लिए उपयोगिता जैसी विशेषताओं के कारण ‘सरदार समृद्धि’ उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के किसानों के लिए एक उपयोगी और लाभकारी विकल्प बनने की संभावना रखती है