एच.एल.ई.सी की बैठक करते मुख्य सचिव एस.पी गोयल
लखनऊ, 24 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य सचिव श्री एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में कुल ₹4,104.82 करोड़ के निवेश वाली 8 औद्योगिक परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
8 बड़ी परियोजनाओं को मिली मंजूरी
बैठक में जिन परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने की स्वीकृति दी गई, उनमें मेगा और सुपर मेगा श्रेणी की औद्योगिक परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के प्रस्तावों को ऑनलाइन इन्सेन्टिव मैनेजमेंट सिस्टम (ओआईएमएस) पोर्टल के माध्यम से लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए जाने के लिए मूल्यांकन समिति की अनुशंसा पहले ही प्राप्त हो चुकी थी।
स्वीकृति के बाद अब इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद है। साथ ही विनिर्माण, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, सीमेंट, वायर एवं इलेक्ट्रिकल उत्पाद और डेयरी जैसे क्षेत्रों में निवेश को गति मिलने की संभावना है।
गोरखपुर में एपीएल अपोलो ट्यूब्स की ₹320 करोड़ की परियोजना
स्वीकृत परियोजनाओं में एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड की गोरखपुर स्थित ₹320 करोड़ की परियोजना शामिल है। इस परियोजना से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने तथा संबंधित विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार की उम्मीद है।
अमरोहा में टेरेस्ट्रियल फूड प्रोसेसर की परियोजना
टेरेस्ट्रियल फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड की अमरोहा स्थित ₹277.30 करोड़ की परियोजना को भी लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने की मंजूरी मिली है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़ी यह परियोजना स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ललितपुर में अल्ट्राटेक सीमेंट का ₹738 करोड़ का निवेश
अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की ललितपुर स्थित ₹738 करोड़ की परियोजना को भी समिति ने मंजूरी दी है। सीमेंट क्षेत्र में प्रस्तावित यह बड़ा निवेश प्रदेश के औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान देने वाला माना जा रहा है।
गौतम बुद्ध नगर में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र को बढ़ावा
शुक्र फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की गौतम बुद्ध नगर स्थित ₹587.50 करोड़ की परियोजना को भी स्वीकृति मिली है। फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में प्रस्तावित इस निवेश से प्रदेश में औद्योगिक विविधीकरण को बढ़ावा मिलने और इस क्षेत्र से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
बुलंदशहर में गुडलक इंडिया की ₹268.67 करोड़ की परियोजना
गुडलक इंडिया लिमिटेड की बुलंदशहर स्थित ₹268.67 करोड़ की परियोजना भी स्वीकृत परियोजनाओं में शामिल है। यह परियोजना विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के साथ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने में सहायक होगी।
हाथरस में जी.के. वाइंडिंग्स वायर्स का निवेश
जी.के. वाइंडिंग्स वायर्स लिमिटेड की हाथरस स्थित ₹381.14 करोड़ की परियोजना को भी एचएलईसी की मंजूरी मिली है। वायर एवं इलेक्ट्रिकल उत्पाद क्षेत्र में प्रस्तावित इस निवेश से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावना है।
बागपत में डेयरी क्षेत्र की ₹539.83 करोड़ की परियोजना
बनासकांठा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स लिमिटेड की बागपत स्थित ₹539.83 करोड़ की परियोजना को भी स्वीकृति दी गई है। डेयरी क्षेत्र में इस निवेश से संबंधित औद्योगिक एवं प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मथुरा में एल्पेक्स सोलर की ₹992.38 करोड़ की परियोजना
स्वीकृत परियोजनाओं में सबसे बड़े निवेशों में एल्पेक्स सोलर लिमिटेड की मथुरा स्थित ₹992.38 करोड़ की परियोजना शामिल है। सौर ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित यह निवेश उत्तर प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा आधारित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी गति
एचएलईसी की स्वीकृति के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्वीकृत परियोजनाओं में विनिर्माण, सीमेंट, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, वायर एवं इलेक्ट्रिकल उत्पाद, डेयरी तथा सौर ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
राज्य सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से न केवल औद्योगिक उत्पादन और निवेश बढ़ेगा, बल्कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है। इससे संबंधित जिलों की अर्थव्यवस्था को गति मिलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने पर सरकार का जोर
मुख्य सचिव द्वारा परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान किए जाने के साथ ही राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण तैयार करने, परियोजनाओं का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा पात्र औद्योगिक इकाइयों को नीति के अनुरूप प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को बड़े औद्योगिक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करना है। इसके तहत निवेश प्रस्तावों के मूल्यांकन, प्रोत्साहन की प्रक्रिया और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
औद्योगिक बुनियादी ढांचे और रोजगार को मिलेगा बल
कुल ₹4,104.82 करोड़ के निवेश वाली इन आठ परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से प्रदेश के औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। नई परियोजनाओं के स्थापित होने से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ सहायक उद्योगों, आपूर्ति श्रृंखला और सेवा क्षेत्र में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
राज्य सरकार के अनुसार बड़े औद्योगिक निवेश का लाभ केवल परियोजना क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सेवा, आपूर्ति और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
एचएलईसी की बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास श्री आलोक कुमार, प्रमुख सचिव राज्य कर श्रीमती कामिनी रत्न चौहान, प्रमुख सचिव स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन श्री अमित गुप्ता, सीईओ इन्वेस्ट यूपी श्री विजय किरन आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश में निवेश को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
एचएलईसी द्वारा आठ औद्योगिक परियोजनाओं को एलओसी जारी करने की स्वीकृति प्रदेश में निवेश आकर्षित करने की सरकार की नीति के अनुरूप महत्वपूर्ण कदम है। ₹4,104.82 करोड़ के इन निवेश प्रस्तावों से विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार सृजन की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
राज्य सरकार का फोकस अब स्वीकृत परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन, निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और औद्योगिक इकाइयों को नीति के अनुरूप प्रोत्साहन देने पर है, ताकि उत्तर प्रदेश में निवेश का माहौल और मजबूत हो तथा औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के नए अवसरों का विस्तार हो सके।