एंटी करप्शन टीम की गिरफ्त में डेयरी प्रशिक्षण संस्था की प्रिंसिपल
कैंटीन के बिल पास करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप, शिकायत के बाद एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल
मेरठ । परतापुर स्थित सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में सोमवार को एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संस्थान की प्रिंसिपल वंदना सिंह को कथित तौर पर 1.35 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि संस्थान परिसर में संचालित कैंटीन के बिलों का भुगतान कराने के एवज में प्रिंसिपल द्वारा कैंटीन संचालक से रिश्वत की मांग की गई थी। कार्रवाई के बाद एंटी करप्शन टीम आरोपी प्रिंसिपल को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कैंटीन के बिल भुगतान को लेकर चल रहा था विवाद
जानकारी के अनुसार, सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में अमित सिवाच ठेके पर कैंटीन का संचालन करते हैं। बताया गया कि कैंटीन संचालन के दौरान उनके बिलों का भुगतान लंबे समय से लंबित था। बिल पास कराने के लिए अमित सिवाच लगातार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि काफी प्रयास के बावजूद जब बिलों का भुगतान नहीं हुआ तो अमित सिवाच ने संस्थान की प्रिंसिपल वंदना सिंह से मुलाकात कर बिल पास कराने में सहयोग की मांग की। इसी दौरान कथित रूप से उनसे बिल पास करने के बदले रिश्वत की मांग की गई।
पहले डेढ़ लाख रुपये की मांग का आरोप
कैंटीन संचालक अमित सिवाच के अनुसार, प्रिंसिपल वंदना सिंह ने उनसे पहले डेढ़ लाख रुपये की मांग की थी। अमित का कहना है कि उन्होंने यह कहते हुए रकम कम करने का अनुरोध किया कि यह उनका पहला बिल है और इतनी बड़ी रकम देना उनके लिए संभव नहीं है। बताया गया कि बातचीत के बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम 1.35 लाख रुपये पर तय हुई। आरोप यह भी है कि रकम नहीं देने की स्थिति में बिल पास नहीं करने और भविष्य में कैंटीन का ठेका रिन्यू कराने में परेशानी खड़ी करने की बात कही गई।

परेशान होकर एंटी करप्शन टीम से की शिकायत
लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने और कथित रिश्वत की मांग से परेशान होकर अमित सिवाच ने मामले की शिकायत एंटी करप्शन की मेरठ यूनिट से की। शिकायत मिलने के बाद टीम ने मामले की प्राथमिक जांच की और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए कार्रवाई की योजना तैयार की। एंटी करप्शन टीम ने शिकायतकर्ता को नियोजित कार्रवाई के तहत रिश्वत की रकम लेकर प्रिंसिपल के कार्यालय में जाने के लिए कहा। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम पर रासायनिक पदार्थ लगाए जाने की बात सामने आई है।
कार्यालय में जाल बिछाकर की गई कार्रवाई
सोमवार दोपहर करीब 3 बजे शिकायतकर्ता अमित सिवाच को 1.35 लाख रुपये की रकम लेकर प्रिंसिपल वंदना सिंह के कार्यालय भेजा गया। बताया गया कि एंटी करप्शन टीम का एक गवाह भी इस कार्रवाई के दौरान साथ मौजूद था। जैसे ही अमित सिवाच ने कथित रूप से रिश्वत की रकम वंदना सिंह को सौंपी, पहले से तैयार एंटी करप्शन टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया। टीम ने कथित रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली।
हिरासत में लेने के लिए एंटी करप्शन की महिला विंग को बुलाया गया
कार्रवाई के दौरान प्रिंसिपल वंदना सिंह को हिरासत में लेने के लिए एंटी करप्शन की महिला विंग को भी बुलाया गया था। टीम द्वारा मौके पर आवश्यक कार्रवाई पूरी किए जाने के बाद वंदना सिंह से पूछताछ शुरू कर दी गई। मामले में रिश्वत की रकम, शिकायत और कार्रवाई से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही विभाग में मची खलबली
एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई की खबर फैलते ही संस्थान परिसर में हड़कंप मच गया। बताया गया कि जिस समय टीम ने प्रिंसिपल को पकड़ा, उस दौरान कार्यालय में मौजूद उनका सहयोगी अकाउंटेंट मुकेश कथित तौर पर वहां से निकल गया। कार्रवाई के कुछ ही देर बाद संस्थान के कार्यालय परिसर में सन्नाटा दिखाई देने लगा। एंटी करप्शन टीम द्वारा मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
मार्च में मिला था कैंटीन का ठेका
शिकायतकर्ता अमित सिवाच ने बताया कि उन्हें संस्थान में कैंटीन संचालन का ठेका मार्च माह में सरकारी प्रक्रिया के तहत मिला था। ठेका मिलने के बाद उन्होंने कैंटीन का संचालन शुरू किया। अमित के अनुसार, बिलों का भुगतान कराने के लिए उन्होंने संस्थान के अकाउंटेंट मुकेश से संपर्क किया था। आरोप है कि अकाउंटेंट द्वारा लगातार आनाकानी की गई। इसके बाद कथित रूप से उसी के माध्यम से उन्हें प्रिंसिपल वंदना सिंह से संपर्क करने का संकेत मिला।
पहले बिल से ही रिश्वत मांगने का आरोप
अमित सिवाच के मुताबिक, उनका पहला बिल प्रिंसिपल के सामने पहुंचने के बाद ही उन्होंने भुगतान के संबंध में बातचीत की थी। आरोप है कि प्रिंसिपल ने बिल पास कराने के लिए सीधे तौर पर डेढ़ लाख रुपये की मांग की। अमित का कहना है कि उन्होंने रकम कम करने के लिए बातचीत की, लेकिन शुरुआत में प्रिंसिपल अपनी मांग पर कायम रहीं। बाद में बातचीत के बाद कथित रूप से यह रकम घटकर 1.35 लाख रुपये तय हुई।

एंटी करप्शन टीम कर रही पूछताछ
रिश्वत लेते कथित तौर पर पकड़े जाने के बाद एंटी करप्शन टीम ने प्रिंसिपल वंदना सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। टीम द्वारा शिकायत से जुड़े तथ्यों, रिश्वत की रकम और संस्थान के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, रिश्वतखोरी के आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच के बाद सामने आएगा पूरा मामला
एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई के बाद सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में कैंटीन के बिल भुगतान, ठेका प्रक्रिया और कथित रिश्वत मांगने से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच होने की संभावना है। फिलहाल टीम की पूछताछ और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा उनकी क्या भूमिका रही है।