महापंचायत की तैयारी को लेकर बैठक करते किसान
मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) मेरठ इकाई ने किसान समस्याओं के समाधान को लेकर एक सितम्बर को कमिश्नरी चौराहे पर मंडलायुक्त कार्यालय के घेराव तथा विशाल किसान-मजदूर महापंचायत का ऐलान किया है। भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर जिला स्तर पर कई बार अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी गई, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने से किसानों में भारी आक्रोश है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब किसानों का धैर्य जवाब दे चुका है और एक सितम्बर का आंदोलन निर्णायक होगा।
40 दिन का समय बीतने के बाद भी समाधान नहीं
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में गत 21 जुलाई को किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी वी.के. सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए जिला मुख्यालय का घेराव किया गया था। उस दौरान किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन को लगभग 40 दिन का समय दिया गया था। संगठन का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद अनेक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
इसी के बाद किसानों ने अब मंडल स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने किसानों के निर्णय का समर्थन करते हुए एक सितम्बर को कमिश्नरी चौराहे पर मंडलायुक्त का घेराव और किसान-मजदूर महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की है।
गांव-गांव पहुंचकर किसानों से किया जा रहा संपर्क
महापंचायत को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए भाकियू कार्यकर्ताओं ने गांवों में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने पहाड़पुर, भैंसा, मवाना, बहसूमा, कोल समेत करीब एक दर्जन गांवों में पहुंचकर किसानों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना।
जनसंपर्क के दौरान किसानों ने बिजली, गन्ना, खाद, राजस्व, स्वास्थ्य, नगर निगम तथा विकास कार्यों से जुड़ी अनेक समस्याएं संगठन के सामने रखीं। किसानों ने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है।
बिजली के बढ़े लोड और अधिक बिल को लेकर किसानों में नाराजगी
किसानों ने बिजली व्यवस्था से संबंधित कई समस्याएं उठाईं। किसानों का कहना है कि ट्यूबवेलों और अन्य कृषि कनेक्शनों पर लोड बढ़ाए जाने के बाद अतिरिक्त पेनल्टी और अधिक बिल लगाए जा रहे हैं। कई किसानों ने बिजली बिल अधिक आने की शिकायत भी की।
किसानों ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने, ट्यूबवेलों के लिए रात में बिजली आपूर्ति किए जाने तथा ट्यूबवेलों पर लगातार चोरी की घटनाओं को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि कृषि कार्यों के लिए निर्बाध और उचित बिजली आपूर्ति आवश्यक है, लेकिन उन्हें विभिन्न स्तरों पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गन्ना भुगतान, गन्ना मूल्य और चीनी के दाम का मुद्दा भी प्रमुख
किसानों ने गन्ना भुगतान में देरी, गन्ना मूल्य और चीनी के बढ़ते दामों के बावजूद किसानों को उचित लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। किसानों का कहना है कि गन्ने की खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उन्हें अपनी उपज का अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भाकियू ने गन्ना किसानों से जुड़े इन मुद्दों को भी एक सितम्बर की महापंचायत में प्रमुखता से उठाने की बात कही है।
खाद समितियों में खाद की उपलब्धता और ब्याज वसूली पर सवाल
जनसंपर्क के दौरान किसानों ने सहकारी खाद समितियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी होती है और कई जगह किसानों को निर्धारित मात्रा से अधिक खाद नहीं मिल पा रही है।
किसानों ने समितियों में ऋण पर ब्याज वसूली को लेकर भी शिकायतें कीं। भाकियू जिलाध्यक्ष के अनुसार किसानों ने खाद की कथित कालाबाजारी और ब्याज वसूली से संबंधित दस्तावेज एवं अन्य साक्ष्य संगठन को उपलब्ध कराए हैं। संगठन ने इन मामलों की जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
नगर निगम सीमा में शामिल गांवों की बदहाली का मुद्दा
किसानों और ग्रामीणों ने नगर निगम सीमा में शामिल गांवों में विकास कार्यों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम सीमा में शामिल होने के बावजूद कई गांवों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
सड़कों, सफाई, तालाबों तथा अन्य स्थानीय समस्याओं का समाधान नहीं होने की शिकायत भी किसानों ने की। भाकियू ने इन समस्याओं को जिला स्तरीय मुद्दों में शामिल करते हुए प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और राजस्व मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप
किसानों ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में देरी और कथित भ्रष्टाचार की शिकायत भी की। भाकियू जिलाध्यक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रमाण पत्र बनवाने में कई महीने लग जाते हैं और बिना कथित अवैध भुगतान के काम कराने में कठिनाई होती है।
इसके अलावा तहसीलों में विरासत, जमीन के नामांतरण और अंश निर्धारण से जुड़े मामलों में भी किसानों ने कथित अवैध वसूली तथा लेखपालों द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायतें की हैं। संगठन ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर किसानों को राहत दिलाने की मांग की है।
तालाबों की सफाई नहीं होने से ग्रामीण परेशान
किसानों ने गांवों में तालाबों की सफाई नहीं होने की समस्या भी उठाई। भाकियू का कहना है कि तालाबों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों में परेशानी बढ़ रही है।
कुछ किसानों ने तालाबों को मछली पालन के लिए टेंडर के माध्यम से दिए जाने से संबंधित समस्याओं का भी उल्लेख किया। संगठन ने तालाबों की स्थिति और उनके उपयोग से जुड़े मामलों की जांच तथा ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की मांग की है।
सरकारी अस्पतालों में इलाज और चिकित्सकों की कमी का मुद्दा
किसानों ने जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में इलाज मिलने में कठिनाई की शिकायत की। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों एवं आवश्यक सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया गया।
पशुपालन विभाग से जुड़ी समस्याओं में अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी और समय पर पशुओं का टीकाकरण नहीं होने की शिकायतें भी किसानों ने संगठन के सामने रखीं।
जिलाध्यक्ष ने अधिकारियों पर सुनवाई नहीं करने का लगाया आरोप
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों के सरकारी नंबरों पर संपर्क करने पर उनके सहायक फोन उठाते हैं और अधिकारी के व्यस्त होने की बात कहते हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर यदि प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी संवाद और समाधान नहीं होगा तो किसानों के सामने आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि किसान अब अपनी समस्याओं की अनदेखी को स्वीकार नहीं करेगा।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि एक सितम्बर को कमिश्नरी चौराहे पर मंडलायुक्त का घेराव और किसान-मजदूर महापंचायत आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि महापंचायत में किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर उनके समाधान की मांग की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा और किसान घर वापस नहीं लौटेंगे। ऐसी स्थिति में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर जेल भरो आंदोलन भी किया जाएगा।
महापंचायत को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी
भाकियू ने एक सितम्बर की महापंचायत को व्यापक बनाने के लिए गांव-गांव जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। संगठन के पदाधिकारी किसानों से संपर्क कर उन्हें स्थानीय समस्याओं के साथ महापंचायत में पहुंचने का आह्वान कर रहे हैं।
जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाता रहेगा।
जनसंपर्क अभियान के दौरान सतेंद्र तालियान, डॉ. टीटू, मनोज खत्री, राजकुमार चपराना, सुनील पिलौना, जय बहादुर, मुनिश त्यागी सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।