आयोजित एक प्रेस वार्ता में शिक्षक नेता दुष्यंत त्यागी
मेरठ। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मूल भावना, गरिमा और शिक्षक समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए चलाए जा रहे जनसमर्थन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अभियान के तहत अब तक 5000 से अधिक शिक्षकों, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, विद्यालय प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षा हितैषियों ने अपना समर्थन दर्ज कराया है। इस अभूतपूर्व जनसमर्थन ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वास्तविक शिक्षक प्रतिनिधित्व की मांग को और अधिक मजबूत कर दिया है।
मंगलवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में शिक्षक नेता एवं “शिक्षा पर चर्चा” कार्यक्रम के संस्थापक डॉ. कुलदीप मलिक तथा North India Self Defense Federation (NISDF) के निदेशक दुष्यंत त्यागी ने अभियान की प्रगति और प्राप्त जनसमर्थन की जानकारी साझा की।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मूल अवधारणा को बचाने की मांग
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. कुलदीप मलिक ने कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का गठन शिक्षकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना प्रतिनिधि चुनने का विशेष अधिकार देने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि जब मतदाता बनने के लिए शिक्षक होना अनिवार्य है, तो उम्मीदवार बनने के लिए भी शिक्षक होना आवश्यक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह केवल चुनावी राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि शिक्षक समाज के सम्मान, अधिकारों और वास्तविक प्रतिनिधित्व का प्रश्न है। यदि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से गैर-शिक्षक उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं, तो इससे क्षेत्र की मूल भावना प्रभावित होती है और शिक्षकों के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता।
शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों का मिल रहा व्यापक समर्थन
दुष्यंत त्यागी ने बताया कि अभियान को लगातार विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक प्राप्त 5000 से अधिक समर्थन पत्र इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि शिक्षक समाज चाहता है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर वास्तविक रूप से शिक्षक समुदाय का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान प्राप्त हस्ताक्षर, समर्थन पत्र और अन्य दस्तावेजों को कानूनी विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो इस मुद्दे को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की जाएगी, ताकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मूल भावना की रक्षा की जा सके।
- शिक्षक समाज की प्रमुख मांगें
- अभियान के माध्यम से शिक्षक समाज ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई हैं—
- शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए शिक्षक होना अनिवार्य किया जाए।
- शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मूल भावना और उद्देश्य की संवैधानिक एवं कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- शिक्षक समाज को उसका वास्तविक और प्रभावी प्रतिनिधित्व प्राप्त हो।
- निर्वाचन प्रक्रिया में ऐसे प्रावधान किए जाएं जिससे शिक्षक समुदाय के हितों की रक्षा हो सके।
- जनसमर्थन अभियान को बताया ऐतिहासिक
अभियान से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि 5000 से अधिक शिक्षकों का लिखित समर्थन मिलना इस बात का प्रमाण है कि शिक्षक समाज अपने अधिकारों और प्रतिनिधित्व के प्रति जागरूक है। उनका मानना है कि यह जनसमर्थन भविष्य में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े नीतिगत और कानूनी निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा तथा प्रदेशभर के शिक्षकों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना अभियान
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षक उम्मीदवार की अनिवार्यता को लेकर चल रहा यह अभियान शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है। बड़ी संख्या में शिक्षकों के समर्थन के बाद अब यह मुद्दा केवल एक संगठन या समूह तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षक समाज के व्यापक हितों से जुड़ा आंदोलन बनता जा रहा है।
- “5000 शिक्षकों का समर्थन, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से गैर-शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर उठे सवाल”
- “शिक्षक की सीट पर शिक्षक का अधिकार: 5000 से अधिक शिक्षकों ने दिया लिखित समर्थन”
- 5000 शिक्षकों का समर्थन, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षक उम्मीदवार की मांग तेज
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मूल भावना को बचाने के लिए चलाए जा रहे अभियान को 5000 से अधिक शिक्षकों का समर्थन मिला। शिक्षक नेताओं ने गैर-शिक्षक उम्मीदवारों पर सवाल उठाते हुए कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी।