मेरठ नौचंदी स्थित पटेल मंडप में अंतर्राष्ट्रीय सर्वधर्म साधु महासंघ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों का हुआ सम्मान
मेरठ। नौचंदी स्थित पटेल मंडल में अंतर्राष्ट्रीय सर्व धर्म साधु महासंघ द्वारा भव्य सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “राष्ट्रीय एकता में साधु समाज का योगदान” रहा, जिस पर विभिन्न धर्मों के संत-महात्माओं, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि साधु समाज के पास समाज को सही दिशा देने और राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने की अद्भुत क्षमता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर साधु-संतों के साथ-साथ समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। दीप प्रज्ज्वलन में एम.एस. जैन, अहलकार सिंह नागर, सरबजीत कपूर, नरेन्द्र कुमार गुप्ता (गाजियाबाद), गौरव जैन (हापुड़), मुकुल जैन (मेरठ), कुलदीप चौहान, शालिनी अग्रवाल, मंजू शर्मा, अंजू शर्मा तथा नेहा वत्स कक्कड़ सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे।
इसके पश्चात उपस्थित महिलाओं एवं पुरुषों ने मंच पर विराजमान संत-महात्माओं की आरती उतारकर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को और अधिक सजीव बनाते हुए आराध्या डांस एकेडमी की निदेशक विदूषी वशिष्ठ एवं उनकी टीम ने सरस्वती वंदना और भक्ति स्तुति की सुंदर प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।
साधु समाज देश को एकता के सूत्र में बांध सकता है
कार्यक्रम में जैन विद्वान कपिल जैन ने अपने संबोधन में कहा कि यदि समाज साधु-संतों की शिक्षाओं और प्रेरणाओं को आत्मसात करे तो देश को एकता के मजबूत सूत्र में बांधा जा सकता है। उन्होंने कहा कि संतों का प्रभाव समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचता है और वे सामाजिक समरसता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सिख समाज के प्रतिनिधि एवं राष्ट्रपति पदक से सम्मानित सरबजीत कपूर ने कहा कि सिख समुदाय सदैव राष्ट्र की एकता, अखंडता और सेवा भावना के लिए कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी धर्मों के अनुयायियों और संतों को मिलकर कार्य करना चाहिए ताकि समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का वातावरण मजबूत हो सके।
संत-महात्माओं ने रखे राष्ट्रीय एकता पर विचार
सम्मेलन में हरिद्वार से पधारे आचार्य मदन महाराज, प्रोफेसर देवेश चंद शर्मा, नंगलामल शंकरताल आश्रम की महंत मीरानंद माताजी तथा ब्रह्मकुमारी सुनीता दीदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिकता और धार्मिक समन्वय को राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बताते हुए समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा कि यदि सभी धर्मों के साधु-संत एक मंच पर आकर समाज को मार्गदर्शन दें तो केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में एकता, शांति और बंधुत्व की भावना का विस्तार हो सकता है।
साधु समाज देश को विश्वगुरु बनाने में निभा सकता है महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हरिद्वार से आए ब्रह्मचारी विवेकानंद जी महाराज, जो अंतर्राष्ट्रीय सर्व धर्म साधु महासंघ के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक भी हैं, ने संगठन के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए, क्योंकि साधु समाज समाज और राष्ट्र को सही दिशा देने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत विश्व में अद्वितीय है तथा यदि संत समाज संगठित होकर कार्य करे तो भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में अपनी गौरवशाली पहचान स्थापित कर सकता है।
विभिन्न वक्ताओं ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम में अहलकार सिंह नागर, नरेन्द्र कुमार गुप्ता, अभिषेक अग्रवाल, अश्विन काम्बोज, महेन्द्र उपाध्याय सहित अनेक वक्ताओं ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और धार्मिक सद्भाव पर अपने विचार रखे।
मुख्य संयोजक एडवोकेट विनीत जैन ने कहा कि राष्ट्रीय एकता का यह विषय वर्तमान समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के प्रति समाज का स्वाभाविक सम्मान होता है और यदि संत समाज लोगों को एकजुट करने का संकल्प ले तो देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकती हैं।
कार्यक्रम की सह-संयोजिका आभा जैन ने बताया कि सम्मेलन में दिल्ली, नोएडा, हापुड़ तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। दिल्ली से चांदनी जैन, नोएडा से अजय भाटी एवं वीरेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ पहुंचे। हापुड़ से फिल्म निर्देशक बृजेश जी, दिल्ली से वरिष्ठ समाजसेवी विक्की मट्टू चौधरी तथा रेखा जी सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
इन लोगों का रहा विशेष सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में शालू चौधरी, राजेश सिरोही, ऋषि शर्मा, अमित जैन (गायक), निपुण चौधरी, कुलदीप तोमर, सौरभ तोमर, नरेन्द्र सिंह, वीना ठाकुर, बॉबी शर्मा, सुन्दर तोमर, प्रमोद तोमर, योगेन्द्र राणा, इन्द्र कुमार गोयल, शशांक चौपड़ा सहित अनेक लोगों का विशेष योगदान रहा।
सम्मेलन के अंत में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और धार्मिक समन्वय को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया गया तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए संत समाज की सक्रिय भूमिका पर बल दिया गया।