प्रेस वार्ता करते वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधिकारी
चंडीगढ़। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों, उद्योग संगठनों तथा एमएसएमई इकाइयों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चंडीगढ़ में उच्च स्तरीय हितधारक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के तेजी से विस्तारित हो रहे मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नेटवर्क से मिलने वाले नए निर्यात अवसरों की जानकारी देना तथा क्षेत्रीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक रणनीति पर चर्चा करना था।
कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितिन यादव, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के चेयरमैन अभिषेक देव, मंत्रालय की निदेशक मोनिका गौर तथा एपीडा के क्षेत्रीय प्रमुख हरप्रीत सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने निर्यातकों और किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं, निर्यात प्रोत्साहन उपायों और नए व्यापार समझौतों से मिलने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का निर्यात
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के निर्यात क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में देश का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 468 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 863 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
इसी अवधि में सेवा निर्यात 158 अरब डॉलर से बढ़कर 421 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि गैर-पेट्रोलियम निर्यात भी 387.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया। अधिकारियों ने कहा कि यह वृद्धि भारत की वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और निर्यात क्षमता में हुए सुधार को दर्शाती है।
नए एफटीए से खुलेंगे वैश्विक बाजारों के द्वार
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत द्वारा हाल के वर्षों में किए गए कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने भारतीय उत्पादों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार खोल दिए हैं।
इनमें भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए), भारत-यूरोपीय संघ एफटीए, भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौता (सीईसीपीए) तथा भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) प्रमुख हैं।
अधिकारियों के अनुसार भारत के वर्तमान नौ एफटीए अब 38 देशों को कवर करते हैं, जिससे भारतीय उत्पादों को वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से वाले बाजारों तक पहुंच प्राप्त हो रही है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं और व्यापारिक विस्तार की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।
पंजाब और हरियाणा को मिलेगा विशेष लाभ
बैठक में बताया गया कि नए एफटीए के तहत वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्राप्त होगी।
पंजाब के लिए वस्त्र उद्योग, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि आधारित उद्योग तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापक निर्यात संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं हरियाणा के लिए बासमती चावल, गैर-बासमती चावल, भैंस का मांस, प्राकृतिक शहद, डेयरी उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद प्रमुख निर्यात अवसरों के रूप में उभर रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि यदि किसान, एफपीओ और उद्योग इन अवसरों का सही उपयोग करें तो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।
निर्यात अवसंरचना को किया जा रहा मजबूत
मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा में विकसित की जा रही निर्यात अवसंरचना की जानकारी भी साझा की। पंजाब में अमृतसर हवाई अड्डे पर आधुनिक पैकहाउस और गुणवत्ता अनुपालन सुविधाओं को मजबूत किया गया है, जिससे कृषि और बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं हरियाणा में बासमती.नेट और हॉर्टीनेट प्रणालियों को एकीकृत कर अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप एक मजबूत ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता निगरानी प्रणाली विकसित की गई है। इससे निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा।
क्षेत्र की उल्लेखनीय निर्यात सफलताओं का किया उल्लेख
बैठक के दौरान अधिकारियों ने पंजाब और हरियाणा की कई प्रेरणादायक निर्यात उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
इनमें पंजाब के अबोहर से सिंगापुर और रूस को किन्नू का निर्यात, डेराबस्सी से दक्षिण कोरिया को रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न का पहला निर्यात, पठानकोट से कतर और यूएई को लीची का निर्यात तथा संगरूर से कनाडा को मूल्यवर्धित बाजरा उत्पादों का निर्यात शामिल है।
इसी प्रकार हरियाणा से मेडागास्कर को फोर्टिफाइड राइस कर्नेल का निर्यात तथा सोनीपत जिले के अटेरना गांव के एफपीओ द्वारा कनाडा को सोया चाप का पहला निर्यात क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रमाण बताया गया।
25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन की जानकारी दी
कार्यक्रम में हितधारकों को केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) की भी विस्तृत जानकारी दी गई। छह वर्षों के लिए स्वीकृत इस मिशन का कुल बजट 25,060 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत एमएसएमई इकाइयों और निर्यातकों को व्यापार वित्त, निर्यात ऋण, गुणवत्ता प्रमाणन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बाजार पहुंच, लॉजिस्टिक्स सहायता तथा क्षमता निर्माण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
अधिकारियों ने कहा कि यह मिशन छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य में निभाएगा अहम योगदान
कार्यक्रम के समापन पर वाणिज्य मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा के किसानों, एफपीओ, उद्योग संगठनों और एमएसएमई इकाइयों से उत्पाद-विशिष्ट निर्यात तैयारी योजनाएं तैयार करने, एपीडा की विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठाने तथा नए एफटीए ढांचे का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।
मंत्रालय ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि क्षेत्रीय उद्योग और किसान वैश्विक बाजारों की मांग के अनुरूप अपने उत्पादों और प्रक्रियाओं को विकसित करें तो पंजाब और हरियाणा देश के निर्यात मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकते हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भारत को वैश्विक व्यापार शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।