ख़ुशबू अग्रवाल
पहले जहाँ औरतों को दया की मूरत समझा जाता था, वहीं आज उनका एक अलग स्वरूप सामने आ रहा है। मेरठ के खौफनाक आपराधिक मामले जैसे नीले ड्रम और साँप से कटवाकर मारने वाली वारदातों ने पुरुष समाज में डर का माहौल पैदा कर दिया है। पुरुष वर्ग अब शादी के नाम से काँपने लगा है। ये दोनों वारदातें भारत की सबसे चर्चित वारदातों में से एक हैं। ये आपराधिक वारदातें समाज में हो रहे नैतिक पतन और गंभीर रूप से विकृत होती मानसिकता को दर्शाती हैं। मेरठ की दामिनी का अपने पति को साँप से कटवाने वाला प्रकरण और मुस्कान रस्तोगी का नीले ड्रम वाला किस्सा काफी समय तक चर्चा में रहा है।
कुत्सित विचारधारा सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्रियों और विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी विकृत और हिंसक मानसिकता होने के पीछे बहुत सारे मानसिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं, जिन्हें विस्तार में जानना बहुत आवश्यक है।
1) आपराधिक कहानियाँ और सोशल मीडिया का प्रभाव:
आजकल इंटरनेट पर आपराधिक फिल्मों और वेब सीरीज की भरमार है। कुत्सित विचारों वाले और मानसिक रूप से कमजोर लोग इन फिल्मों की चपेट में आराम से आ जाते हैं और उनसे प्रभावित होकर गुनाह कर बैठते हैं और सोचते हैं कि वो भी इन फिल्मों की तरह आसानी से बचकर निकल जाएंगे।
2) संवेदनशीलता और पश्चाताप का अभाव*
आजकल लोगों में संवेदनशीलता और इंसानियत खत्म होती जा रही है। वह अपने कर्मों के प्रति असंवेदनशील हो रहे हैं। ऐसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले लोग मनोविकृति, आत्म-केंद्रित और असामाजिक विकृति से ग्रसित हो गए हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इन लोगों में दया पूरी तरह से खत्म हो जाती है इसलिए ऐसे लोग अपने करीबी की जान लेते हुए बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाते और ना ही उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा होता है।
3) लोगों में धैर्य की कमी और उससे होता सामाजिक और धार्मिक पतन
आज के दौर में सब क्षणिक सुख के पीछे भाग रहे हैं। लोगों का धैर्य खत्म हो चुका है। किसी को भी अपने जीवन में अगर कोई परेशानी दिखाई देती है तो वह कानूनी सलाह लेने की जगह सीधा हिंसक प्रवृत्ति अपनाता है। चाहे वह वैवाहिक अनबन हो या जीवन से जुड़ी कोई और परेशानी। धार्मिक और सामाजिक पतन का सबसे बड़ा कारण आज यह है की लोग दुष्कर्म करने से पहले उसके दुष्परिणाम क्या होंगे यह भूल जाते है। वह बुरे कर्म करने से जरा भी नहीं सकुचाते!
4) वैवाहिक जीवन में कड़वाहट और अनबन
सोशल मीडिया की वजह से लोगों के पास चयन की कमी नहीं है। व्हाट्सएप और अनेक ऐसे सोशल प्लेटफॉर्म हैं जहाँ एक को छोड़ दूसरे पर लपकने को लोग ललायित रहते हैं। उन्हें पता है आज नहीं तो कल कोई ना कोई उन्हें मिल ही जाएगा। इसीलिए वैवाहिक जीवन में कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं है। वैवाहिक जीवन की आपसी अनबन बड़ा क्लेश और मनमुटाव का मुख्य कारण बन जाती है जिससे पति-पत्नी दोनों बाहर अपना-अपना दूसरा ठिकाना ढूंढने लगते हैं और तलाक जैसे रास्ते को अपनाने की बजाय हिंसक रास्ता अपनाना उन्हें ज्यादा आसान लगता है।
यह भटकाव किसी एक वर्ग का नहीं है बल्कि महिलाएँ और पुरुष दोनों ही अनियंत्रित महत्वाकांक्षा, घोर असंवेदनशीलता और मानसिक भटकाव के शिकार हैं। दोनों ही इस तरह के अपराधों में बराबरी के हिस्सेदार हैं। हालांकि, गुनाह करते हुए गुनहगार अक्सर यह भूल जाता है कि वह कितना भी शातिर क्यों ना हो एक ना एक दिन जरूर पकड़ा जाएगा।
लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या हम समाज में बढ़ रहे नैतिक पतन को रोकने में सफल हो सकेंगे?