साक्षरता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में व्याख्यान देते मुख्य वक्ता प्रो वाचस्पति मिश्रा
विश्व साक्षरता दिवस पर मेरठ कॉलेज के मुख्य पुस्तकालय में हुआ कार्यक्रम, शिक्षा को सामाजिक एवं आर्थिक विकास की आधारशिला बताया
मेरठ । विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर मंगलवार को मेरठ कॉलेज के मुख्य पुस्तकालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साक्षरता को सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए शिक्षा और ज्ञान का व्यापक प्रसार आवश्यक है।
साक्षरता को बताया विकास की कुंजी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मेरठ कॉलेज के प्राचार्य प्रो. युद्धवीर सिंह ने कहा कि साक्षरता विकास की कुंजी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास, सोचने-समझने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता को भी मजबूत करती है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे शिक्षा को अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग देश की सबसे बड़ी शक्ति है और शिक्षित एवं जागरूक युवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शिक्षा जीवन की अनिवार्य आवश्यकता : प्रो. वाचस्पति मिश्रा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. वाचस्पति मिश्रा ने शिक्षा को जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए कहा कि साक्षरता का विस्तार समाज के समग्र विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा के व्यापक प्रसार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा लोगों तक उनकी सहज और परिचित भाषा में प्रभावी ढंग से पहुंचती है, तो सीखने की प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी हो सकती है। मातृभाषा में शिक्षा के विस्तार से साक्षरता को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा से जोड़ने में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
ज्ञान और शिक्षा से बनता है प्रगतिशील समाज
पुस्तकालय एवं वाचनालय अध्यक्ष प्रो. एन. पी. सिंह ने साक्षरता और समृद्धि के बीच संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्ञान और शिक्षा किसी भी समाज को प्रगतिशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अध्ययन के प्रति निरंतर रुचि बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की ओर से पूछे गए विभिन्न प्रश्नों और जिज्ञासाओं का भी समाधान किया गया। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय विद्यार्थियों के ज्ञान-विस्तार और बौद्धिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसका अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों ने लिया शिक्षा के महत्व को समझने का संकल्प
विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उसे समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने में भी सक्षम बनाती है। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं शिक्षा के महत्व को समझें और अपने आसपास के लोगों को भी शिक्षा एवं साक्षरता के प्रति जागरूक करने में योगदान दें। कार्यक्रम के माध्यम से साक्षरता को केवल एक शैक्षणिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और बेहतर भविष्य की आधारशिला के रूप में रेखांकित किया गया।
शिक्षक और छात्र-छात्राएं रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रो. श्याम सिंह, श्री पुष्पेन्द्र कुमार, डॉ. जितेन्द्र कुमार, डॉ. सरवर हुसैन, प्रो. अनिला मौरल, श्री मुकेश कुमार, श्रीमती विनीता कश्यप, मनीष गौतम और दीप शिखा सहित विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में साक्षरता के व्यापक प्रसार, शिक्षा के महत्व और युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर जोर देते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।