अधिवक्ता रामकुमार शर्मा
मेरठ। मेरठ की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मस्जिद के नीचे बौद्ध मंदिर होने का दावा करते हुए अधिवक्ता रामकुमार शर्मा ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने भी मस्जिद परिसर और उसकी संरचना की ऐतिहासिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वे कराए जाने की मांग उठाई है।
शाही जामा मस्जिद के नीचे मंदिर होने का दावा
ज्ञापन के माध्यम से दावा किया गया है कि वर्तमान शाही जामा मस्जिद के नीचे पूर्व में बौद्ध मंदिर अथवा धार्मिक स्थल मौजूद था। इस दावे के आधार पर मस्जिद की संरचना और उसके निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की जांच कराने की मांग की गई है।
दावा करने वालों का कहना है कि मस्जिद की वर्तमान संरचना में कुछ ऐसे स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं, जिन्हें वे प्राचीन मंदिर अथवा अन्य धार्मिक संरचना से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र ऐतिहासिक या पुरातात्विक पुष्टि किए जाने की आवश्यकता है।
अधिवक्ता रामकुमार शर्मा ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
इस मामले में अधिवक्ता रामकुमार शर्मा ने मेरठ के जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में शाही जामा मस्जिद के इतिहास, निर्माण और वर्तमान संरचना से जुड़े तथ्यों की विशेषज्ञों के माध्यम से जांच कराने की मांग रखी गई है।
ज्ञापन देने वालों का कहना है कि ऐतिहासिक दावों को केवल आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर तय करने के बजाय संबंधित अभिलेखों, ऐतिहासिक स्रोतों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
हिंदू संगठनों ने भी ASI सर्वे की मांग उठाई
मामले को लेकर हिंदू संगठनों की ओर से भी ASI सर्वे की मांग की गई है। हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने शाही जामा मस्जिद की संरचना और उसके इतिहास की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सर्वे कराने की मांग उठाई है।

संगठन की ओर से कहा गया है कि यदि ऐतिहासिक संरचना को लेकर कोई दावा सामने आता है तो उसकी वास्तविकता पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक जांच के माध्यम से स्पष्ट होनी चाहिए।
मस्जिद की संरचना में मंदिरों की झलक होने का दावा
सचिन सिरोही और उनके समर्थकों की ओर से दावा किया गया है कि शाही जामा मस्जिद की संरचना में कुछ ऐसे स्थापत्य तत्व मौजूद हैं, जिनमें मंदिरों की झलक दिखाई देती है। इसी आधार पर मस्जिद के निर्माण से पहले वहां मौजूद संरचना के संबंध में जांच की मांग की जा रही है।
हालांकि इन स्थापत्य दावों की वास्तविक स्थिति और ऐतिहासिक प्रमाणों की पुष्टि संबंधित पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बौद्ध मंदिर के स्तंभ मिलने का भी दावा
मामले में यह दावा भी सामने आया है कि शाही जामा मस्जिद से जुड़े क्षेत्र में बौद्ध मंदिर के स्तंभ से संबंधित ऐतिहासिक साक्ष्य मिलने की बात कही जा रही है। दावा करने वालों का कहना है कि इन तथ्यों की विशेषज्ञों द्वारा जांच कराई जानी चाहिए, जिससे यह पता लगाया जा सके कि वर्तमान संरचना के निर्माण से पहले वहां किस प्रकार की संरचना मौजूद थी।
इस संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पुरातात्विक साक्ष्यों, ऐतिहासिक अभिलेखों और विशेषज्ञों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्चस्तरीय जांच की मांग
हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मुगल काल में कथित रूप से तोड़े गए मंदिरों को लेकर भी जांच और उनके पुनर्स्थापन की मांग उठाई।
सचिन सिरोही का कहना है कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच कराकर वास्तविक इतिहास सामने लाया जाना चाहिए।
ऐतिहासिक तथ्यों की जांच पर जोर
शाही जामा मस्जिद को लेकर उठे विवाद के बीच अब पूरे मामले की ऐतिहासिक और पुरातात्विक जांच की मांग जोर पकड़ रही है। मांग करने वालों का कहना है कि ASI सर्वे के माध्यम से संरचना, स्थापत्य अवशेषों और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों का परीक्षण कराया जाए।
वहीं, किसी भी ऐतिहासिक दावे की पुष्टि के लिए विशेषज्ञों की जांच और प्रमाणित ऐतिहासिक स्रोतों का अध्ययन आवश्यक होगा। फिलहाल इस मामले में ज्ञापन और सर्वे की मांग के बाद प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
प्रशासनिक जांच के बाद तस्वीर हो सकती है स्पष्ट
शाही जामा मस्जिद को लेकर सामने आए दावों के बीच अब निगाहें प्रशासन की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रशासन या संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच अथवा पुरातात्विक सर्वे कराया जाता है, तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मस्जिद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निर्माण से जुड़े दावों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सामने आए मंदिर और बौद्ध मंदिर से जुड़े दावे संबंधित पक्षों द्वारा किए गए दावे हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि जांच, ऐतिहासिक अभिलेखों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।