परशुराम अधिवेशन में राज्यमंत्री असीम अरुण को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित करते पंडित सुनील भराला
लखनऊ, 9 सितंबर 2026। राष्ट्रीय परशुराम परिषद, उत्तर प्रदेश का एक दिवसीय अधिवेशन बुधवार को लखनऊ स्थित संघ भवन, डिप्लोमा इंजीनियर संघ, गवर्नर हाउस गेट नंबर-1 के सामने आयोजित किया गया। प्रातः 10 बजे शुरू हुए इस अधिवेशन में संगठन के आगामी कार्यक्रमों, सदस्यता अभियान, संगठन विस्तार, सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकारों तथा समाजहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक के दौरान परिषद की आगामी कार्ययोजना को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
संगठन की एकजुटता और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर
अधिवेशन के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के निवर्तमान मंत्री पंडित सुनील भराला रहे। अपने संबोधन में उन्होंने संगठन की एकजुटता, अनुशासन और सक्रियता पर जोर देते हुए कहा कि समाजहित से जुड़े विषयों को मजबूती के साथ उठाने के साथ-साथ युवाओं को संगठन से जोड़ना भी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की मजबूती उसकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं की एकजुटता से होती है। ऐसे में परिषद को समाज से जुड़े विषयों को प्रभावी मंचों पर उठाने के साथ जमीनी स्तर पर भी अपनी गतिविधियों को मजबूत करना चाहिए।
सुवर्ण आयोग की मांग पर पंडित सुनील भराला की सहमति
अधिवेशन में सुवर्ण आयोग के गठन की मांग से जुड़े विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। परिषद की ओर से रखी गई इस मांग पर पंडित सुनील भराला ने सहमति व्यक्त की और कहा कि समाजहित तथा अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उचित मंचों पर मजबूती से उठाया जाना आवश्यक है।
उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से समाजहित से जुड़े विषयों पर एकजुट होकर अपनी आवाज प्रभावी ढंग से उठाने का आह्वान किया।
जलालाबाद का नाम “परशुरामपुरी” किए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार
अधिवेशन के दौरान शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम “परशुरामपुरी” किए जाने के विषय पर भी चर्चा हुई। पंडित सुनील भराला ने इस निर्णय के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री परशुराम जी से जुड़ी विरासत और नाम को सम्मान मिलना समाज के लिए गौरव का विषय है। परिषद की ओर से भगवान श्री परशुराम जी के विचारों, आदर्शों और सनातन परंपरा से जुड़े विषयों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करने की बात कही गई।
परशुराम कुंड तीर्थ यात्रा को सफल बनाने की तैयारी
अधिवेशन में आगामी 15, 16 और 17 नवंबर को प्रस्तावित भगवान श्री परशुराम कुंड तीर्थ यात्रा को सफल बनाने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। यात्रा के प्रचार-प्रसार, पंजीयन अभियान और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई।
परिषद के पदाधिकारियों के अनुसार, तीर्थ यात्रा के माध्यम से समाज को भगवान श्री परशुराम जी की तप, त्याग, शौर्य और सनातन परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं को यात्रा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी सहमति बनी।
UGC से जुड़े विषय और अवकाश की मांग पर चर्चा
बैठक में UGC से जुड़े विषय को लेकर भी चर्चा की गई। परिषद ने UGC के कथित “काले कानून” को पूर्ण रूप से समाप्त करने की मांग के समर्थन में अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की रणनीति पर विचार किया।
इसके साथ ही भगवान श्री परशुराम जी के अवतरण दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाने और इसके लिए आवश्यक स्तर पर प्रयास करने का निर्णय लिया गया।
सदस्यता अभियान और संगठन विस्तार को मिलेगी गति
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के सदस्यता अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने पर भी अधिवेशन में विशेष जोर दिया गया। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए जिला, महानगर और तहसील स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करने तथा योग्य एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने पर विचार-विमर्श किया गया।
पदाधिकारियों ने कहा कि मजबूत और सक्रिय संगठन ही समाज से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकता है। इसी उद्देश्य से युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की योजना बनाई गई।
सनातन संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण पर मंथन
अधिवेशन में भगवान श्री परशुराम जी की विरासत, सनातन संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और समाज के संरक्षण से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। परिषद की ओर से सामाजिक जागरूकता, युवा सहभागिता और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में यह तय किया गया कि परिषद के आगामी कार्यक्रमों को व्यापक जनसरोकारों से जोड़ते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में संगठनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
अधिवेशन में लिए गए प्रमुख निर्णय
अधिवेशन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर कार्ययोजना तैयार की गई। इनमें प्रमुख रूप से सुवर्ण आयोग की मांग को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना, जलालाबाद का नाम “परशुरामपुरी” किए जाने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करना और UGC से जुड़े विषय पर परिषद की रणनीति को आगे बढ़ाना शामिल रहा।
इसके अलावा भगवान श्री परशुराम जी के अवतरण दिवस पर सार्वजनिक अवकाश की मांग, 15 से 17 नवंबर तक प्रस्तावित परशुराम कुंड तीर्थ यात्रा का व्यापक प्रचार-प्रसार, यात्रा के लिए पंजीयन अभियान को गति देना और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को जोड़ना भी प्रमुख निर्णयों में शामिल रहा।
परिषद के सदस्यता अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने तथा जिला, महानगर और तहसील स्तर पर संगठन विस्तार और कार्यकारिणियों के गठन की प्रक्रिया को गति देने पर भी सहमति बनी। साथ ही युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने तथा भगवान श्री परशुराम जी की विरासत, सनातन संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गतिविधियां बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
अधिवेशन में ये प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद
अधिवेशन में मुख्य अतिथि पंडित सुनील भराला, निवर्तमान मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार श्री असीम अरुण, राष्ट्रीय परशुराम परिषद के प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, प्रवक्ता श्री संतोष पाण्डेय, प्रदेश संयोजक श्री अंकुर शर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री बाल गोविंद दीक्षित, राष्ट्रीय IT संयोजक श्री जीवन शर्मा, क्षेत्रीय अध्यक्ष PSS पश्चिमी उत्तर प्रदेश श्री सी.एम. पाण्डेय, क्षेत्रीय कार्यसमिति सदस्य श्री दीपक पाण्डेय, प्रदेश मंत्री PSS उत्तर प्रदेश श्री कुशल पाण्डेय, परशुराम शक्ति वाहिनी से श्री कृष्णा शर्मा, डॉ. रघुनाथ शर्मा, श्री मनोज शर्मा, राष्ट्रीय परशुराम परिषद के प्रवक्ता श्री नितेश पाण्डेय, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से श्री दीपक पाण्डेय तथा PSS से श्री पवन त्यागी सहित राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।
संगठन को और मजबूत बनाने का लिया संकल्प
अधिवेशन के समापन पर राष्ट्रीय परशुराम परिषद के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन को अधिक मजबूत, सक्रिय, अनुशासित और जनसरोकारों से जोड़ने का संकल्प लिया। समाजहित से जुड़े विषयों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने तथा परिषद की आगामी गतिविधियों को व्यापक जनसहभागिता के साथ संचालित करने पर जोर दिया गया।
परिषद की ओर से कहा गया कि आने वाले दिनों में संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान, भगवान श्री परशुराम कुंड तीर्थ यात्रा, सुवर्ण आयोग की मांग, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां तथा समाजहित से जुड़े विभिन्न विषय उसकी प्राथमिकताओं में रहेंगे। अधिवेशन में तैयार की गई कार्ययोजना को आगामी दिनों में चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की बात कही गई।
राष्ट्रीय परशुराम परिषद, उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित यह एक दिवसीय अधिवेशन संगठन की आगामी कार्यदिशा निर्धारित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।