गुण्डा एक्ट में हरीश छह माह के लिए जिला बदर
सिविल लाइन पुलिस की प्रभावी पैरवी के बाद अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन के न्यायालय का आदेश, ढोल बजाकर कराई गई मुनादी
मेरठ। थाना सिविल लाइन पुलिस की प्रभावी पैरवी के बाद गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई का सामना कर रहे अभियुक्त हरीश पुत्र राकेश कश्यप, निवासी आर्य नगर, सूरजकुंड, थाना सिविल लाइन, मेरठ को न्यायालय के आदेश पर छह माह के लिए जिला बदर किया गया है। पुलिस के अनुसार न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराते हुए 9 सितंबर 2026 को अभियुक्त को जिला बदर आदेश की प्रति तामील कराई गई और इसके बाद उसे मेरठ जनपद की सीमा से बाहर छोड़ा गया।
आपराधिक गतिविधियों को लेकर की गई कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक हरीश के आपराधिक इतिहास और गतिविधियों को देखते हुए उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। पुलिस का कहना है कि अभियुक्त की आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण क्षेत्र में भय का वातावरण होने की बात सामने आई थी और आमजन उसके खिलाफ गवाही देने में भयभीत रहते थे। पुलिस के अनुसार उसकी गतिविधियों से लोक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए थाना सिविल लाइन पुलिस ने प्रकरण तैयार कर इसे अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन), मेरठ के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने छह माह के लिए जिला बदर करने के दिए आदेश
पुलिस द्वारा मामले में की गई प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने अभियुक्त हरीश को छह माह की अवधि के लिए जनपद मेरठ की सीमा से जिला बदर करने का आदेश पारित किया। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पुलिस ने 9 सितंबर को अभियुक्त को आदेश की प्रति उपलब्ध कराई। इसके साथ ही क्षेत्र में ढोल बजाकर मुनादी कराते हुए लोगों को भी न्यायालय के आदेश की जानकारी दी गई।
मेरठ सीमा से बाहर छोड़ा गया अभियुक्त
पुलिस के अनुसार आदेश की तामील के बाद अभियुक्त हरीश को जनपद मेरठ की सीमा से बाहर छोड़ा गया। उसे स्पष्ट हिदायत दी गई कि जिला बदर की निर्धारित छह माह की अवधि के दौरान वह न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए मेरठ जनपद की सीमा में प्रवेश न करे। पुलिस ने बताया कि जिला बदर की अवधि में आदेशों का अक्षरशः पालन करना अभियुक्त के लिए अनिवार्य है। आदेश का उल्लंघन होने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अभियुक्त के खिलाफ दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए आपराधिक इतिहास के अनुसार हरीश के खिलाफ थाना सिविल लाइन में अलग-अलग वर्षों में कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। इनमें आबकारी अधिनियम, लूट से संबंधित धाराएं, बीएनएस की धाराएं, धोखाधड़ी एवं जालसाजी से संबंधित धाराएं तथा उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम का मामला शामिल है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अभियुक्त के खिलाफ निम्न मामले दर्ज बताए गए हैं—
- मु0अ0सं0 510/2020, धारा 60 आबकारी अधिनियम, थाना सिविल लाइन।
- मु0अ0सं0 179/2021, धारा 394, 411 आईपीसी, थाना सिविल लाइन।
- मु0अ0सं0 95/2025, धारा 60 आबकारी अधिनियम, थाना सिविल लाइन।
- मु0अ0सं0 140/2025, धारा 115(2), 304(2) बीएनएस, थाना सिविल लाइन।
- मु0अ0सं0 116/2022, धारा 413, 420, 425, 465, 467, 468, 471 आईपीसी, थाना सिविल लाइन।
- वाद संख्या 1032/2026, धारा 3/4 उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, थाना सिविल लाइन।
पुलिस ने मुनादी कर लोगों को दी आदेश की जानकारी
जिला बदर की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने क्षेत्र में ढोल बजाकर मुनादी कराई। इस दौरान न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बारे में लोगों को अवगत कराया गया। पुलिस का उद्देश्य न्यायालय के आदेश की सार्वजनिक जानकारी सुनिश्चित करना और जिला बदर अभियुक्त के मेरठ में प्रवेश पर निगरानी रखना बताया गया है।
कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम
जिला बदर की कार्रवाई का अनुपालन कराने वाली पुलिस टीम में थाना सिविल लाइन के थानाध्यक्ष अरुण भाटी, उपनिरीक्षक अमित कुमार, उपनिरीक्षक शुभम पचौरी और कांस्टेबल सौरभ कुमार शामिल रहे। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ के आदेश, पुलिस अधीक्षक अपराध के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी सिविल लाइन के निकट पर्यवेक्षण में की गई।