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कानपुर। 11 सितंबर 2026 को वामपंथी बैंक यूनियनों की ओर से प्रस्तावित बैंक हड़ताल को लेकर उत्तर प्रदेश बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन और भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। संगठन का कहना है कि बैंक कर्मचारियों की कई मांगें न्यायसंगत हैं और भारतीय मजदूर संघ इन मांगों का समर्थन करता है, लेकिन मांगों के समाधान के लिए बातचीत और संवाद का रास्ता अपनाने के बजाय हड़ताल का रास्ता चुना जाना उचित नहीं है।
उत्तर प्रदेश बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन और भारतीय मजदूर संघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि संगठन बैंक कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार अपनी बात सरकार के सामने रखता रहा है। संगठन के मुताबिक, बैंक कर्मचारियों की मांगों में विशेष रूप से परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और पांच दिवसीय बैंकिंग जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
वित्त मंत्री के साथ बैठक में PLI का मुद्दा उठाने का दावा
संगठन के अनुसार, 7 सितंबर 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक में BMS और बैंक यूनियनों की ओर से बैंक कर्मचारियों के परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) की मांग को प्रमुखता से उठाया गया था। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि बैठक के दौरान PLI व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने और ऐसा न्यायसंगत फॉर्मूला तैयार करने पर चर्चा हुई, जिससे सभी बैंक कर्मचारियों को समान रूप से लाभ मिल सके।
संगठन का कहना है कि नए फॉर्मूले को बैंक यूनियनों के साथ बातचीत के माध्यम से तैयार करने की आवश्यकता है। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, वित्त मंत्री ने इस विषय पर विचार करने और बैंक यूनियनों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति व्यक्त की।
पांच दिवसीय बैंकिंग पर भी सरकार से बातचीत का दावा
प्रेस विज्ञप्ति में पांच दिवसीय बैंकिंग के मुद्दे का भी उल्लेख किया गया है। संगठन के अनुसार, सरकार इस विषय पर संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर रही है और यह देखा जा रहा है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को किस प्रकार व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सकता है।
BMS का कहना है कि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर बैंक कर्मचारियों के पक्ष को संबंधित पक्षों के सामने रखने और समाधान की दिशा में बातचीत किए जाने की बात कही गई है। संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद वामपंथी बैंक यूनियनें हड़ताल पर जाने के अपने फैसले पर कायम हैं।
BRICS सम्मेलन के दौरान हड़ताल की तारीख पर उठाए सवाल
संगठन ने 11 सितंबर को प्रस्तावित बैंक हड़ताल की तारीख को लेकर भी सवाल उठाए हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 12 और 13 सितंबर 2026 को देश में BRICS सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जबकि 11 सितंबर को बिजनेस फोरम प्रस्तावित है। ऐसे समय में बैंक हड़ताल का आह्वान किए जाने को संगठन ने उचित नहीं माना है।
BMS का आरोप है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह हड़ताल बैंक कर्मचारियों की मांगों के समाधान से अधिक राजनीतिक गतिविधि जैसी दिखाई देती है। संगठन ने दावा किया है कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है।
हड़ताल की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन के अनुसार, सरकार की ओर से बातचीत के दौरान बैंक यूनियनों को बताया गया कि इस प्रकार के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत 60 दिन पहले नोटिस देने का प्रावधान है।
BMS ने कहा कि कुछ जानकारों की ओर से भी प्रस्तावित हड़ताल की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित प्रावधानों और परिस्थितियों के आधार पर ही निर्धारित होगी।
BMS ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन की बात दोहराई
उत्तर प्रदेश बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन ने स्पष्ट किया कि वह बैंक कर्मचारियों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की जायज मांगों को सरकार और संबंधित संस्थानों के सामने प्रभावी ढंग से उठाया जाना चाहिए तथा उनके समाधान के लिए वार्ता का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
संगठन ने कहा कि वह बैंक कर्मचारियों की मांगों के खिलाफ नहीं है, बल्कि हड़ताल के तरीके और उसके समय को लेकर आपत्ति जता रहा है। BMS के अनुसार, बैंकिंग सेवाओं के बाधित होने से आम ग्राहकों और बैंकिंग व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
वामपंथी यूनियनों से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील
प्रेस विज्ञप्ति के अंत में उत्तर प्रदेश बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन और भारतीय मजदूर संघ ने वामपंथी बैंक यूनियनों से हड़ताल के निर्णय पर पुनर्विचार करने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
संगठन ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को मजबूती से उठाया जाना जरूरी है, लेकिन देशहित, बैंकिंग सेवाओं की सुगमता और मौजूदा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संवाद और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालना अधिक उचित होगा।