मीडिया से मुखातिब कपिल मुखिया
मेरठ। ब्लॉक प्रमुख मेरठ कपिल मुखिया ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने पार्टी से त्यागपत्र देते हुए सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कपिल मुखिया ने अपने त्यागपत्र में कहा है कि वह बेहद दुखी मन से भारतीय जनता पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी और उसकी सरकारों की नीतियों के कारण किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कपिल मुखिया ने प्रशासन पर भी कथित रूप से निरंकुश रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आम लोगों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है और नीचे से ऊपर तक शिकायतों के समाधान की व्यवस्था प्रभावी नहीं दिखाई दे रही है।
पेपर लीक को लेकर सरकार पर सवाल
त्यागपत्र में कपिल मुखिया ने छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इससे देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उनका आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण मेहनत करने वाले छात्रों को परेशानी उठानी पड़ती है और उनके भविष्य पर अनिश्चितता पैदा होती है। उन्होंने इसे सरकार से असंतोष का एक प्रमुख कारण बताया है।
भूमि अधिग्रहण में सर्किल रेट को लेकर आपत्ति
कपिल मुखिया ने सरकार द्वारा विभिन्न स्थानों पर किसानों की भूमि अधिग्रहित किए जाने के मुद्दे को भी अपने इस्तीफे का कारण बताया है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में किसानों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है, वहां सर्किल रेट में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सर्किल रेट पर्याप्त नहीं बढ़ाए जाने के कारण किसानों को उनकी कीमती जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों के हितों और उचित मुआवजे को प्राथमिकता देने की मांग उठाई है।
सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले का भी किया उल्लेख
अपने त्यागपत्र में कपिल मुखिया ने मेरठ के सेंट्रल मार्केट में हाल ही में हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से माननीय उच्चतम न्यायालय में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखे जाने का खामियाजा व्यापारियों और शास्त्रीनगर के निवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने इस मामले को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के हितों की पर्याप्त पैरवी होनी चाहिए थी। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई की नीति बना रही है, जिसे उन्होंने दमनकारी नीति करार दिया है।
फसल का उचित मूल्य और खाद की कीमत बढ़ने का मुद्दा
कपिल मुखिया ने किसानों से जुड़े आर्थिक मुद्दों को भी अपने इस्तीफे का कारण बताया है। उनका कहना है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि खाद सहित कृषि से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि कृषि लागत बढ़ने और फसलों का अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों की आय और कृषि लागत से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों पर असंतोष जताया है।
पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप
कपिल मुखिया ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में आरोप लगाया कि मेहनती और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया जाता तथा उनकी लगातार उपेक्षा की जाती है।
उनके अनुसार, पार्टी के लिए लंबे समय से काम करने वाले कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सुझावों को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को भी भाजपा छोड़ने के प्रमुख कारणों में शामिल किया है।
पांच प्रमुख कारण गिनाते हुए दिया इस्तीफा
कपिल मुखिया ने अपने त्यागपत्र में मुख्य रूप से पांच मुद्दों को इस्तीफे की वजह बताया है। इनमें छात्रों के भविष्य से जुड़े पेपर लीक के मामले, किसानों की भूमि अधिग्रहण के दौरान सर्किल रेट का मुद्दा, सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण और व्यापारियों से जुड़ी समस्याएं, किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिलना तथा खाद आदि की कीमतों में वृद्धि और पार्टी के मेहनती कार्यकर्ताओं की उपेक्षा शामिल है।
उन्होंने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के चलते उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है।
सरकार और पार्टी की नीतियों से असहमति जताई
कपिल मुखिया के इस्तीफे के बाद उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू होने की संभावना है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत राजनीतिक रुख और इस्तीफे के कारणों पर आधारित हैं। इन आरोपों पर संबंधित सरकार, प्रशासन या भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।